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बिकरू कांड: अपराधिक इतिहास छिपा पासपोर्ट बनवाने पर जय बाजपेई पर केस, एसआईटी की सिफारिश पर की गई कार्रवाई
Sun, 22 Nov 2020 10:57 PM IST
शिखा पांडेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: शिखा पांडेय
Updated Sun, 22 Nov 2020 10:57 PM IST
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जय बाजपेई
- फोटो : अमर उजाला
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फर्जी शपथ पत्र लगा और अपराधिक इतिहास छिपा पासपोर्ट बनवाने के मामले में नजीराबाद पुलिस ने जय बाजपेई पर शनिवार रात एक और एफआईआर दर्ज की है। एसआईटी की सिफारिश पर कार्रवाई की गई है। पुलिस की मिलीभगत से जय बाजपेई ने ये फर्जीवाड़ा किया था।
जय बाजपेई
- फोटो : अमर उजाला
दोषी पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई की सिफारिश पहले ही हो चुकी है। बिकरू कांड की जांच करने वाली एसआईटी की तफ्तीश में पता चला है कि जयकांत बाजपेई पर कई अपराधिक मामले दर्ज हैं। इसके बावजूद 2012 में उसका पासपोर्ट बन गया है।
जय बाजपेई
- फोटो : अमर उजाला
पुलिस द्वारा बनी सत्यापन रिपोर्ट भी लगी है। यही नहीं जय द्वारा दिया गया शपथ पत्र भी फर्जी निकला। उसमें सही तथ्य छिपाए गए थे। इसलिए एसआईटी ने इन तथ्यों के आधार पर एफआईआर की सिफारिश की। एसपी साउथ दीपक भूकर ने बताया कि जय के खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य हैं।
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जय बाजपेई पत्नी के साथ
- फोटो : फेसबुक
उसी आधार पर उसके खिलाफ धोखाधड़ी, जालसाजी, पासपोर्ट अधिनियम, तथ्य छिपाने, झूठे तथ्य प्रस्तुत करने समेत अन्य गंभीर धाराओं में केस दर्ज किया है। जांच शुरू की गई है। जल्द मामले में कोर्ट से अनुमति लेकर जय के बयान जेल में दर्ज करने विवेचक जाएगा।
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जय बाजपेई पत्नी के साथ
- फोटो : फेसबुक
किरायेदार पुलिसकर्मी ने लगाई थी रिपोर्ट
पासपोर्ट बनवाने की प्रक्रिया में आवेदक के स्थानीय थाने से सत्यापन रिपोर्ट लगाई जाती है। जिसमें पुलिस आवेदक का इतिहास खंगालती है। अगर आपराधिक इतिहास होता है तो आवेदन रद कर दिया जाता है। मगर जय पर पुलिस की मेहरबानी रही। उसके मकान के किरायेदार दरोगा ने ही जय के पासपोर्ट में सत्यापन रिपोर्ट उसके पक्ष में लगाई थी। थानेदार की भी मिलीभगत रही। ये सभी पुलिसकर्मी दोषी साबित हो चुके हैं। आगे की कार्रवाई जारी है।
पासपोर्ट बनवाने की प्रक्रिया में आवेदक के स्थानीय थाने से सत्यापन रिपोर्ट लगाई जाती है। जिसमें पुलिस आवेदक का इतिहास खंगालती है। अगर आपराधिक इतिहास होता है तो आवेदन रद कर दिया जाता है। मगर जय पर पुलिस की मेहरबानी रही। उसके मकान के किरायेदार दरोगा ने ही जय के पासपोर्ट में सत्यापन रिपोर्ट उसके पक्ष में लगाई थी। थानेदार की भी मिलीभगत रही। ये सभी पुलिसकर्मी दोषी साबित हो चुके हैं। आगे की कार्रवाई जारी है।