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दुर्दांत विकास दुबे के एनकांउटर के 102 दिन बाद कानपुर के एक थाने में फिर दर्ज हुई एफआईआर
Tue, 20 Oct 2020 09:30 AM IST
प्रभापुंज मिश्रा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: प्रभापुंज मिश्रा
Updated Tue, 20 Oct 2020 09:30 AM IST
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विकास दुबे
- फोटो : अमर उजाला
कानपुर के स्वरूपनगर में एक मकान पर कब्जा करने के मामले में विकास दुबे और उसके गुर्गे समेत तीन पर रविवार को कोतवाली थाने में केस दर्ज किया गया। गुर्गे की पत्नी भी नामजद है। स्वरूपनगर निवासी कमला देवी के मुताबिक महेश दीक्षित और उनकी पत्नी विजय लक्ष्मी दीक्षित उनके घर पर किराये पर रहते थे।
विकास दुबे कांड: शहीद डीएसपी देवेंद्र मिश्रा, जय बाजपेई
- फोटो : amar ujala
आरोप है 2007 में इस दंपती ने विकास दुबे के साथ मिलकर उनके घर के रजिस्ट्री समेत अन्य सभी फर्जी दस्तावेज तैयार कर लिए और विकास दुबे ने घर खाली करवा लिया। इन सभी ने मिलकर उनके पति शत्रुघ्न को भी गायब कर दिया। कोतवाली इंस्पेक्टर संजीव कांत मिश्र ने बताया कि जांच के बाद आरोपियों पर धोखाधड़ी, कूटरचित दस्तावेज तैयार करने समेत अन्य धाराओं में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।
विकास दुबे कांड
- फोटो : अमर उजाला
मौत के बावजूद इसलिए दर्ज हुई एफआईआर
विकास दुबे और विजय लक्ष्मी की मौत हो चुकी है। मरे हुए लोगों पर केस क्यों दर्ज हुआ इस पर कोतवाली इंस्पेक्टर का कहना है कि
इस वारदात में विकास और विजय लक्ष्मी की भी भूमिका थी, इसलिए उनको आरोपी बनाया गया है। जब चार्जशीट लगाई जाएगी तो उसमें इस तथ्य को शामिल किया जाएगा। तब दर्ज किया जाएगा कि इन आरोपियों की मौत हो चुकी है। बाकी पर केस चलेगा।
विकास दुबे और विजय लक्ष्मी की मौत हो चुकी है। मरे हुए लोगों पर केस क्यों दर्ज हुआ इस पर कोतवाली इंस्पेक्टर का कहना है कि
इस वारदात में विकास और विजय लक्ष्मी की भी भूमिका थी, इसलिए उनको आरोपी बनाया गया है। जब चार्जशीट लगाई जाएगी तो उसमें इस तथ्य को शामिल किया जाएगा। तब दर्ज किया जाएगा कि इन आरोपियों की मौत हो चुकी है। बाकी पर केस चलेगा।
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विकास दुबे कांड
- फोटो : amar ujala
बिकरू कांड में पुलिस ने तीन महीने बाद माती कोर्ट में 36 आरोपियों के खिलाफ करीब 1700 पन्नों की चार्जशीट दाखिल कर दी है। दो आरोपी अभी फरार हैं। विकास दुबे समेत छह बदमाश मारे जा चुके हैं। चार्जशीट के मुताबिक घटना को साजिश के तहत अंजाम दिया गया। दहशतगर्द विकास को पुलिसकर्मियों ने तहरीर पहुंचने से लेकर दबिश रवाना होने तक की जानकारी दी।
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विकास दुबे कांड
- फोटो : amar ujala
इसमें चौबेपुर के पूर्व एसओ विनय तिवारी और दरोगा केके शर्मा की मुख्य भूमिका रही। पुलिस ने विवेचना में इन्हीं तथ्यों को शामिल किया है। इससे संबंधित पारिस्थितिजन्य, वैज्ञानिक और फोरेंसिक साक्ष्यों को चार्जशीट में शामिल किया गया है। पुलिस की विवेचना के मुताबिक जब राहुल तिवारी ने विकास दुबे व उसके गुर्गों के खिलाफ पुलिस से शिकायत की थी तभी विकास को सूचना पहुंच गई थी।