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आप इसे केवल फूल मानते हैं तो शायद बड़ी गलती कर रहे हैं, फायदे सुनकर दांतों तले उंगलियां दबा लेंगे!
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर
Updated Wed, 14 Feb 2018 05:15 PM IST
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टेसू का फूल
बसंत पंचमी के बाद फागुन आते ही टेसू के रंग की चर्चाएं होने लगती थी। यह वृक्ष हिंदुओं के पवित्र माने हुए वृक्षों में से हैं। इसका उल्लेख वेदों तक में मिलता है। क्षेत्र में होली में फाग व टेसू का रंग प्रसिद्ध था। मगर अब संरक्षण का अभाव और केमिकल रंगों के चलते प्राकृतिक इस रंगों को सहेजने वाला कोई नही है। हालत यह है कि क्षेत्र में गांव गांव मिलने वाला टेसू का पेड़ अब चुनिंदा जगह पर ही दिखाई पड़ता है। जानें इसके औषधीय गुण...
टेसू का फूल
- फोटो : अमर उजाला
होली के कई दिन पहले से टेसू के फूल बीन कर उन्हें पानी में भिंगोकर रखते थे। जिन्हें एक-दो दिन बाद उबाल कर ठंडा हो जाने पर उसमें चूना मिला देते थे। इसके बाद सुंदर बसंती रंग उतर आता था। लेकिन अब टेसू के पेड़ों की अस्तित्व लगभग समाप्त होता जा रहा है। जिले में हालात ये है कि ककोर के पास व कुछ बीहड़ी क्षेत्रों में ही पेड़ बचे है। जिनका संरक्षण नहीं होने से यह खत्म होने की कगार पर पहुंच रहे है। आधुनिकता के दौर में पारंपरिक रंगों की पहचान खो गई है।
रंग ही नहीं औषधि भी हैं टेसू के फूल
टेसू का फूल
टेसू के फूल ही नहीं इसके पत्ते, टहनी, फली तथा जड़ तक का बहुत ज्यादा आयुर्वेदिक तथा धार्मिक महत्व है। देश में प्रचुर मात्रा में होने के बावजूद इसका व्यवसायिक उपयोग नहीं हो पा रहा है।
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टेसू का फूल
आयुर्वेद की माने तो होली के लिए रंग बनाने के अलावा इसके फूलों को पीस कर चेहरे में लगाने से चमक बढ़ती है। यही नहीं फलियां कृमिनाशक का काम तो करती ही है इसके उपयोग से बुढ़ापा भी दूर रहता है।
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टेसू का फूल
फूल के पानी से स्नान करने से लू नहीं लगती तथा गर्मी का अहसास नहीं होता। पत्तों का उपयोग ग्रामीण दोना पत्तल बनाने के लिए करते हैं।