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सिविल सर्विसेज परीक्षा में होनहारों की सफलता की कहानी, पढ़िए इनकी जुबानी
Sun, 07 Apr 2019 05:07 PM IST
दुष्यंत शर्मा
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Sun, 07 Apr 2019 05:07 PM IST
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होनहारों के सफलता की कहानी, पढ़िए इनकी जुबानी
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संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) की सिविल सर्विसेज परीक्षा 2018 के तनीजे आते ही होनहारों के चेहरे खिल उठे। जानिए कानपुर शहर के होनहारों की सफलता की कहानी,,,
आईपीएस बने शुभांक, मिली 184वीं रैंक
- फोटो : अमर उजाला
आईपीएस बने शुभांक, मिली 184वीं रैंक
कानपुर के पी रोड के शुभांक मिश्रा 184 रैंक हासिल कर आईपीएस बन गए हैं। सिविल सर्विसेज परीक्षा 2017 में उन्हें 291 रैंक मिली थी। तब वह आईआरएस बने थे। शुभांक आईआरएस बनने से पहले दो नौकरी छोड़ चुके हैं। बीएनएसडी शिक्षा निकेतन से 2009 में शुभांक ने 12वीं की पढ़ाई की। फिर ट्रिपलआईटी हैदराबाद से बीटेक करने चले गए। शुभांक बताते हैं कि कंप्यूटर साइंस से बीटेक करने के बाद 2013 में उनकी सिटी बैंक में बतौर असिस्टेंट मैनेजर की नौकरी लग गई। एक साल इस पद पर काम किया फिर अमेजॉन ने सॉफ्टवेयर डेवलपर बन गए। 2016 में सिविल सर्विसेज में जाने का मन किया तो नौकरी ही छोड़ दी और दिल्ली पहुंच गए। एक साल तैयारी की और पहली ही बार में सफलता हासिल कर 291 रैंक पाई थी। अभी वह नागपुर में ट्रेनिंग कर रहे हैं।
घर की शिक्षा आई काम
शुभांक मिश्रा के पिता वीरेंद्र नाथ मिश्रा, पंजाब नेशनल बैंक में ऑफिसर पद से सेवानिवृत्त हुए हैं, जबकि मां शोभा मिश्रा, गवर्नमेंट स्कूल चुन्नीगंज में शिक्षिका हैं। आकांक्षा मिश्रा मुंबई में फिजिक्स की लेक्चरर हैं और दूसरे नंबर की बहन स्मिता मिश्रा फाइनेंशियल एग्जिक्यूटिव हैं। एक छोटा भाई मर्चेंट नेवी में ऑफिसर है। शुभांक बताते हैं कि घर की शिक्षा उन्हें सफलता हासिल करने में काम आई।
कानपुर के पी रोड के शुभांक मिश्रा 184 रैंक हासिल कर आईपीएस बन गए हैं। सिविल सर्विसेज परीक्षा 2017 में उन्हें 291 रैंक मिली थी। तब वह आईआरएस बने थे। शुभांक आईआरएस बनने से पहले दो नौकरी छोड़ चुके हैं। बीएनएसडी शिक्षा निकेतन से 2009 में शुभांक ने 12वीं की पढ़ाई की। फिर ट्रिपलआईटी हैदराबाद से बीटेक करने चले गए। शुभांक बताते हैं कि कंप्यूटर साइंस से बीटेक करने के बाद 2013 में उनकी सिटी बैंक में बतौर असिस्टेंट मैनेजर की नौकरी लग गई। एक साल इस पद पर काम किया फिर अमेजॉन ने सॉफ्टवेयर डेवलपर बन गए। 2016 में सिविल सर्विसेज में जाने का मन किया तो नौकरी ही छोड़ दी और दिल्ली पहुंच गए। एक साल तैयारी की और पहली ही बार में सफलता हासिल कर 291 रैंक पाई थी। अभी वह नागपुर में ट्रेनिंग कर रहे हैं।
घर की शिक्षा आई काम
शुभांक मिश्रा के पिता वीरेंद्र नाथ मिश्रा, पंजाब नेशनल बैंक में ऑफिसर पद से सेवानिवृत्त हुए हैं, जबकि मां शोभा मिश्रा, गवर्नमेंट स्कूल चुन्नीगंज में शिक्षिका हैं। आकांक्षा मिश्रा मुंबई में फिजिक्स की लेक्चरर हैं और दूसरे नंबर की बहन स्मिता मिश्रा फाइनेंशियल एग्जिक्यूटिव हैं। एक छोटा भाई मर्चेंट नेवी में ऑफिसर है। शुभांक बताते हैं कि घर की शिक्षा उन्हें सफलता हासिल करने में काम आई।
केडीए सचिव का बेटा भी बनेगा अफसर, मिली 547 रैंक
- फोटो : अमर उजाला
केडीए सचिव का बेटा भी बनेगा अफसर, मिली 547 रैंक
संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) की सिविल सर्विसेज परीक्षा 2018 में सफलता हासिल करने वालों में कानपुर विकास प्राधिकरण (केडीए) के सचिव विकास प्रकाश सिंह का भी नाम शामिल है। विकास ने तीसरे प्रयास में 547वीं रैंक हासिल की है।
विकास को रैंक के हिसाब से आईपीएस या आईआरएस में जाने का मौका मिलेगा। उन्होंने बताया कि वह पांच बार सिविल सर्विसेज की परीक्षा दे चुके हैं। दो बार वह इंटरव्यू तक पहुंचे थे, लेकिन सफलता नहीं मिल पाई थी। इसके बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी। विकास ने शुरुआती पढ़ाई लखनऊ से की है। 2007 में उन्होंने 12वीं 77 प्रतिशत अंकों के साथ उत्तीर्ण की थी। 2012 में मनिपाल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी से इंजीनियरिंग की पढ़ाई करके 2014 में आईआईएम रायपुर से एमबीए कंप्लीट किया। विकास बताते हैं कि उन्हें फ्रांस सरकार ने स्टूडेंट एक्सचेंज प्रोग्राम के तहत तीन लाख रुपये की स्कॉलरशिप भी ऑफर की थी। पिता सत्य प्रकाश सिंह हाल ही में केडीए सचिव बनाए गए हैं, जबकि मां शांति सिंह गृहिणी हैं। बड़े भाई अंकुर सिंह बिजनेसमैन और छोटी बहन अनुष्का सिंह दिल्ली विवि से पत्रकारिता की पढ़ाई कर रही हैं। बताते हैं कि अभी वह रैंक सुधारने के लिए आगे भी प्रयास करते रहेंगे।
संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) की सिविल सर्विसेज परीक्षा 2018 में सफलता हासिल करने वालों में कानपुर विकास प्राधिकरण (केडीए) के सचिव विकास प्रकाश सिंह का भी नाम शामिल है। विकास ने तीसरे प्रयास में 547वीं रैंक हासिल की है।
विकास को रैंक के हिसाब से आईपीएस या आईआरएस में जाने का मौका मिलेगा। उन्होंने बताया कि वह पांच बार सिविल सर्विसेज की परीक्षा दे चुके हैं। दो बार वह इंटरव्यू तक पहुंचे थे, लेकिन सफलता नहीं मिल पाई थी। इसके बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी। विकास ने शुरुआती पढ़ाई लखनऊ से की है। 2007 में उन्होंने 12वीं 77 प्रतिशत अंकों के साथ उत्तीर्ण की थी। 2012 में मनिपाल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी से इंजीनियरिंग की पढ़ाई करके 2014 में आईआईएम रायपुर से एमबीए कंप्लीट किया। विकास बताते हैं कि उन्हें फ्रांस सरकार ने स्टूडेंट एक्सचेंज प्रोग्राम के तहत तीन लाख रुपये की स्कॉलरशिप भी ऑफर की थी। पिता सत्य प्रकाश सिंह हाल ही में केडीए सचिव बनाए गए हैं, जबकि मां शांति सिंह गृहिणी हैं। बड़े भाई अंकुर सिंह बिजनेसमैन और छोटी बहन अनुष्का सिंह दिल्ली विवि से पत्रकारिता की पढ़ाई कर रही हैं। बताते हैं कि अभी वह रैंक सुधारने के लिए आगे भी प्रयास करते रहेंगे।
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शिवांश के घर छाईं खुशियां
- फोटो : अमर उजाला
शिवांश के घर छाईं खुशियां
सिविल सर्विसेज परीक्षा में 77वीं रैंक हासिल करने वाले केशवपुरम के शिवांश अवस्थी के घर खुशियों का माहौल रहा। दिनभर बधाई देने वालों का तांता लगा रहा। शिवांश ने आईआईटी कानपुर से एयरोस्पेस विभाग से इंजीनियरिंग की है। पिता शैलेश अवस्थी, मां अर्पणा और दादी ने लोगों का मुंह मीठा कराया।
सिविल सर्विसेज परीक्षा में 77वीं रैंक हासिल करने वाले केशवपुरम के शिवांश अवस्थी के घर खुशियों का माहौल रहा। दिनभर बधाई देने वालों का तांता लगा रहा। शिवांश ने आईआईटी कानपुर से एयरोस्पेस विभाग से इंजीनियरिंग की है। पिता शैलेश अवस्थी, मां अर्पणा और दादी ने लोगों का मुंह मीठा कराया।
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असिस्टेंट कमिश्नर से आईएएस बने शिवांशु राजपूत
- फोटो : अमर उजाला
असिस्टेंट कमिश्नर से आईएएस बने शिवांशु राजपूत
केरला के पलक्कड़ जिले में इपीएफओ के असिस्टेंट कमिश्नर पद पर तैनात शिवांशु राजपूत अब आईएएस बन गए हैं। शिवांशु यहां आजाद नगर के रहने वाले हैं। उन्होंने सिविल सर्विसेज परीक्षा 2018 में 463 रैंक हासिल की है।
शिवांशु बताते हैं कि 2016 में यूपीएससी की असिस्टेंट कमिश्नर परीक्षा में उन्होंने 117वीं रैंक हासिल की थी। तब से वह केरला में नौकरी कर रहे हैं। नौकरी के साथ उन्होंने तैयारी जारी रखी और आखिरकार सफलता मिल ही गई। बताते हैं कि उनकी रैंक के अनुसार उन्हें आईएएस या आईपीएस का पद मिल जाएगा। आईएएस में काफी मुश्किल होगा कि यूपी काडर मिले, जबकि आईपीएस में यूपी काडर मिलना तय है। दोनों ही स्थिति में वह संतुष्ट हैं और आगे अब परीक्षा नहीं देंगे। पिता राम प्रकाश राजपूत अध्यापक और मां आशा हाउस वाइफ हैं। छोटा भाई हिमांशु राजपूत बैंगलुरु में स्थित एक मल्टीनेशनल कंपनी में सॉफ्टवेयर इंजीनियर हैं। शिवांशु ने 2007 में पं. दीन दयाल उपाध्याय सनातन धर्म विद्यालय से 77 प्रतिशत अंकों के साथ परीक्षा उत्तीर्ण की थी। इसके बाद 2012 में एमएनएनआईटी प्रयागराज से बीटेक कंप्लीट की। कैंपस प्लेसमेंट के जरिए ही उन्हें सैमसंग में जॉब मिल गई। 2014 तक वह नोएडा में जॉब कर रहे थे। फिर सबकुछ छोड़कर कोचिंग के जरिए तैयारी शुरू कर दी।
केरला के पलक्कड़ जिले में इपीएफओ के असिस्टेंट कमिश्नर पद पर तैनात शिवांशु राजपूत अब आईएएस बन गए हैं। शिवांशु यहां आजाद नगर के रहने वाले हैं। उन्होंने सिविल सर्विसेज परीक्षा 2018 में 463 रैंक हासिल की है।
शिवांशु बताते हैं कि 2016 में यूपीएससी की असिस्टेंट कमिश्नर परीक्षा में उन्होंने 117वीं रैंक हासिल की थी। तब से वह केरला में नौकरी कर रहे हैं। नौकरी के साथ उन्होंने तैयारी जारी रखी और आखिरकार सफलता मिल ही गई। बताते हैं कि उनकी रैंक के अनुसार उन्हें आईएएस या आईपीएस का पद मिल जाएगा। आईएएस में काफी मुश्किल होगा कि यूपी काडर मिले, जबकि आईपीएस में यूपी काडर मिलना तय है। दोनों ही स्थिति में वह संतुष्ट हैं और आगे अब परीक्षा नहीं देंगे। पिता राम प्रकाश राजपूत अध्यापक और मां आशा हाउस वाइफ हैं। छोटा भाई हिमांशु राजपूत बैंगलुरु में स्थित एक मल्टीनेशनल कंपनी में सॉफ्टवेयर इंजीनियर हैं। शिवांशु ने 2007 में पं. दीन दयाल उपाध्याय सनातन धर्म विद्यालय से 77 प्रतिशत अंकों के साथ परीक्षा उत्तीर्ण की थी। इसके बाद 2012 में एमएनएनआईटी प्रयागराज से बीटेक कंप्लीट की। कैंपस प्लेसमेंट के जरिए ही उन्हें सैमसंग में जॉब मिल गई। 2014 तक वह नोएडा में जॉब कर रहे थे। फिर सबकुछ छोड़कर कोचिंग के जरिए तैयारी शुरू कर दी।