जानिए दमदार आवाज और जानदार अभिनय के "बेमिसाल प्राण" के बारे में, अमिताभ बच्चन भी करते थे सैल्यूट
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प्राण का बचपन यूपी में उन्नाव जिले के केसरगंज इलाके में बीता। यहां के लोगों और यहां की सकरी गलियों में आज भी प्राण बसते हैं। इसी मोहल्ले के धीरेंद्र नाथ श्रीवास्तव बताते हैं कि जब वह शाम को अपने पिता के साथ मोहल्ला कैथियाना से गुजरते थे तो पिता जी कहते थे देख ले बेटा यही प्राण साहब का घर जिनके अभिनय की मुरीद है दुनिया। प्राण ने आठवीं तक की शिक्षा केसरगंज के विद्यालय में ग्रहण की। 1938 में उनके पिता का ट्रांसफर रामपुर में हो गया। लोग बताते हैं कि इसके बाद प्राण दोबारा लौटकर वापस नहीं आए लेकिन केसरगंज की तंग गलियां आज भी उनको भूल नहीं पाई हैं।
प्राण ने खानदान (1942), पिलपिली साहेब (1954) और हलाकू (1956) जैसी फ़िल्मों में मुख्य अभिनेता की भूमिका निभायी। उन्होने, मधुमती (1958), जिस देश में गंगा बहती है (1960), उपकार (1967), शहीद (1965), आँसू बन गये फूल (1969), जॉनी मेरा नाम (1970), विक्टोरिया नम्बर 203 (1972), बे-ईमान (1972), ज़ंजीर (1973), डॉन (1978) और दुनिया (1984) फिल्मों से अपने संजीदा अभिनय का लोहा मनवाया और फिल्मी पर्दे पर अपना एक अलग मुकाम बनाया।
जन्म 12 फ़रवरी 1920
पुरानी दिल्ली, ब्रिटिश भारत
मृत्यु 12 जुलाई 2013 (उम्र 93) मुंबई, महाराष्ट्र
आवास मुंबई, महाराष्ट्र
बच्चे अरविन्द सिकन्द, सुनील सिकन्द, पिंकी सिकन्द