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जानिए 'मोहानी साहब' के बारे में, जिन्होंने लिखे थे दिल छू लेने वाले अल्फ़ाज़
शिखा पांडेय, कानपुर
Updated Tue, 02 Jan 2018 09:00 AM IST
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डॉ. भीमराव अंबेडकर के साथ हसरत मोहानी
मौलाना हसरत मोहानी एक साहित्यकार, शायर, पत्रकार, इस्लामी विद्वान, समाजसेवक और "इंक़लाब ज़िन्दाबाद" का नारा देने वाले आज़ादी के सिपाही थे। हसरत मोहानी का पूरा नाम सय्यद फ़ज़ल-उल-हसन तख़ल्लुस हसरत था। इनका जन्म उत्तर प्रदेश के उन्नाव जिले में मोहान कस्बे में 1 जनवरी 1875 को हुआ। इनके वालिद का नाम सय्यद अज़हर हुसैन था। हसरत मोहानी ने प्रारंभिक तालीम घर पर ही हासिल की और 1903 में अलीगढ़ से बीए किया। शुरू ही से उन्हें शायरी का शौक़ था और अपना कलाम तसनीम लखनवी को दिखाने लगे।
हसरत मोहानी
35 साल पहले तीन तलाक के दर्द को दिखाती सुपरहिट फिल्म निकाह के सुपरहिट गीत जिसे गुलाम अली ने अपनी आवाज दी, इस गीत को यूपी के उन्नाव जिले के निवासी मशहूर शायर ने लिखा था। यहां बात हो रही है साहित्यकार, शायर, पत्रकार, इस्लामी विद्वान, समाजसेवक और आजादी के सिपाही मौलाना हसरत मोहानी की। जानें मोहानी जी के बारे में खास बातें...
हसरत मोहानी
इन्कलाब जिंदाबाद का दिया नारा
मौलाना हसरत मोहानी मशहूर शायर होने के साथ-साथ भारत की आजादी की लड़ाई के सच्चे सिपाही भी थे। इन्होंने ही इन्कलाब जिंदाबाद का नारा दिया था। भारत की आजादी की लड़ाई तो यह नारा उस लड़ाई की जान हुआ करता था।
मौलाना हसरत मोहानी मशहूर शायर होने के साथ-साथ भारत की आजादी की लड़ाई के सच्चे सिपाही भी थे। इन्होंने ही इन्कलाब जिंदाबाद का नारा दिया था। भारत की आजादी की लड़ाई तो यह नारा उस लड़ाई की जान हुआ करता था।
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हसरत मोहानी
गजल व कविता को दिया उन्नतशील मार्ग
मौलाना मोहानी ने उर्दू गजल को उन्नतशील मार्ग पर मोड़ दिया। साथ ही उर्दू कविता में स्त्रियों के प्रति शुद्ध और लाभप्रद दृष्टिकोण दिखाया। उनकी किताबें कुलियात-ए-हसरत, शरहे कलामे गालिब, नुकाते-ए-सुखन, मसुशाहदाते जिंदा आदि मशहूर हुईं।
मौलाना मोहानी ने उर्दू गजल को उन्नतशील मार्ग पर मोड़ दिया। साथ ही उर्दू कविता में स्त्रियों के प्रति शुद्ध और लाभप्रद दृष्टिकोण दिखाया। उनकी किताबें कुलियात-ए-हसरत, शरहे कलामे गालिब, नुकाते-ए-सुखन, मसुशाहदाते जिंदा आदि मशहूर हुईं।
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हसरत मोहानी
प्रमुख गजलें
- चुपके-चुपके रात दिन आंशू बहाना याद है
- आसान-ए-हकीकी है न कुछ सहल
- दर्द-ए-दिल की उन्हें खबर न हुई
- देखना भी तो उन्हें दूर से देखा करना
- हमें वक्फ-ए-गम सर-ब-सर देख लेते
- न सही गर उन्हें ख्याल नहीं
- किस्मत-ए-शौक आज़मा न सके
- रोग दिल को लगा गई आंखें
- वो चुप हो गए मुझसे क्या कहते कहते
- याद कर वो दिन कि तेरा कोई सौदाई
- चुपके-चुपके रात दिन आंशू बहाना याद है
- आसान-ए-हकीकी है न कुछ सहल
- दर्द-ए-दिल की उन्हें खबर न हुई
- देखना भी तो उन्हें दूर से देखा करना
- हमें वक्फ-ए-गम सर-ब-सर देख लेते
- न सही गर उन्हें ख्याल नहीं
- किस्मत-ए-शौक आज़मा न सके
- रोग दिल को लगा गई आंखें
- वो चुप हो गए मुझसे क्या कहते कहते
- याद कर वो दिन कि तेरा कोई सौदाई