उत्तर प्रदेश के कानपुर में हैलट अस्पताल के बाल रोग वार्ड में एक बेड पर तीन बच्चे भर्ती किए गए हैं। इन तीनों बच्चों को अलग-अलग बीमारी है। फिर भी अस्पताल प्रशासन ने इन्हें एक ही बेड पर भर्ती कर दिया है। ऐसे में संक्रमण फैलने का खतरा और बढ़ गया है।
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हाल बेहाल: कानपुर के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल में एक बेड पर तीन मरीज, आपको भी परेशान कर देंगी ये तस्वीरें
Thu, 21 Jul 2022 12:30 PM IST
शिखा पांडेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: शिखा पांडेय
Updated Thu, 21 Jul 2022 12:30 PM IST
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हैलट अस्पताल में बदहाल व्यवस्थाएं
- फोटो : अमर उजाला
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हैलट अस्पताल में बदहाल व्यवस्थाएं
- फोटो : अमर उजाला
सभी को उचित इलाज मिल पाए इसका पूरा ध्यान दिया जा रहा है। साफ-सफाई का भी ख्याल रखा जा रहा है। कानपुर के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल का ऐसा हाल देख हर कोई हैरान है।
हैलट अस्पताल में बदहाल व्यवस्थाएं
- फोटो : अमर उजाला
गर्मी से परेशान लोग हाथ से पंखा करने पर मजबूर हैं। एक वार्ड में मां पुष्पा अपनी बेटी श्रेया को हाथ का पंखा चला कर सुलाती नजर आईं।
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अखिलेश यादव ने खबर को किया ट्वीट
- फोटो : ट्विटर
हैलट अस्पताल की बदहाल व्यवस्था पर अमर उजाला में छपी खबर को समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने ट्वीट किया। जिसपर लोग अस्पताल प्रशासन व मौजूदा सरकार पर सवाल उठा रहे हैं।
— Akhilesh Yadav (@yadavakhilesh) July 21, 2022
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हैलट अस्पताल
- फोटो : सोशल मीडिया
मैटरनिटी विंग में कम नहीं हो पाएगा ऑक्सीजन का प्रेशर
हैलट के मैटरनिटी विंग में ऑक्सीजन का प्रेशर कम नहीं हो पाएगा। यहां की पाइप लाइन बदली जा रही है। बुधवार को लिंडे लिक्विड आक्सीजन कंपनी के इंजीनियरों और जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के प्रबंधन के अधिकारियों ने परिसर का दौरा किया और स्थिति देखी। मैटरनिटी विंग हॉस्पिटल में कोरोना काल के दौरान कई बाहर ऑक्सीजन का प्रेशर डाउन हो गया। इससे स्थिति बिगड़ गई थी और ऑक्सीजन सिलिंडर बैक अप देना पड़ा था। प्राचार्य ने बताया कि पाइप लाइन पतली होने की वजह से यह दिक्कत हो रही थी। इसकी पूरी पाइप लाइन बदल कर मोटी पाइप लाइन लगाई जाएगी। इससे प्रेशर कम नहीं होगा। इसके अलावा टीबी चेस्ट हॉस्पिटल में लिक्विड आक्सीजन प्लांट लगाने का निर्णय लिया गया।
हैलट के मैटरनिटी विंग में ऑक्सीजन का प्रेशर कम नहीं हो पाएगा। यहां की पाइप लाइन बदली जा रही है। बुधवार को लिंडे लिक्विड आक्सीजन कंपनी के इंजीनियरों और जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के प्रबंधन के अधिकारियों ने परिसर का दौरा किया और स्थिति देखी। मैटरनिटी विंग हॉस्पिटल में कोरोना काल के दौरान कई बाहर ऑक्सीजन का प्रेशर डाउन हो गया। इससे स्थिति बिगड़ गई थी और ऑक्सीजन सिलिंडर बैक अप देना पड़ा था। प्राचार्य ने बताया कि पाइप लाइन पतली होने की वजह से यह दिक्कत हो रही थी। इसकी पूरी पाइप लाइन बदल कर मोटी पाइप लाइन लगाई जाएगी। इससे प्रेशर कम नहीं होगा। इसके अलावा टीबी चेस्ट हॉस्पिटल में लिक्विड आक्सीजन प्लांट लगाने का निर्णय लिया गया।