एशिया की सबसे बड़ी पाठा जलकल योजना सहित कई पेयजल योजना चलने के बावजूद मानिकपुर व मऊ क्षेत्र के ग्रामीण क्षेत्र में पेयजल का संकट बना रहता हैं। केंद्र सरकार ने चित्रकूट जिले को पिछड़ा घोषित कर विकास की पहल एक बार फिर शुरू कर दी है।
करोड़ों के खर्च के बाद भी प्यासा चित्रकूट
जिससे ग्रामीणों के चेहरे चमक उठे हैं। केंद्र सरकार ने पेयजल की योजनाएं पूरी करने को चित्रकूट जिले 42.41 करोड़ दिए हैं। इससे पहले भी चित्रकूट में पानी की समस्या के लिए सरकार करोड़ों खर्च कर चुकी है।
एशिया की सबसे बड़ी योजना के बाद भी पेयजल की समस्या से जूझ रहे ग्रामीण
जिले की अधिकतर जमीन पथरीली होने के कारण पेयजल का संकट बना रहता हैं। मानिकपुर व मऊ क्षेत्र में कई फीट बोरिंग करने के बाद भी पानी नहीं निकलता। हैंडपंप गर्मी आते ही सूख जाते हैं। जिले में कहने को तो एशिया की सबसे बड़ी पाठा जलकल योजना बनाई गई है।
19 पेयजल योजनाओं में 14 योजनाएं की निकली हवा
इसके साथ ही 19 पेयजल योजनाएं चल रही हैं जिसमें से 14 योजनाएं सही तरीके से न चल पाने से पेयजल की समस्या सुधर नहीं पा रही हैं। मानिकपुर क्षेत्र के मारकुंडी इलाके व बहिलपुरा क्षेत्र में सबसे अधिक समस्या होती है। जबकि मऊ क्षेत्र के बरगढ़ इलाके में भी पानी की समस्या विकराल बनी रहती है।
यमुना व मंदाकिनी का पानी बुझाएगा प्यास
जल संस्थान के परियोजना प्रबंधक इ. एस के सिंह ने बताया कि इन मऊ ग्राम्य योजना के तहत यमुना नदी से मऊ क्षेत्र के 58 गांव व बरगढ़ क्षेत्र के 38 गांव में पानी उपलब्ध कराने के लिए कार्य चल रहा है। इन योजनाओं के पूरी तरह से चालू हो जाने से पाठा क्षेत्र की पेयजल समस्या कम हो जाएगी।