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फिदायीन तैयार करने लश्कर कमांडर के पास जाना चाहता था आतंकी जलीस, नेपाल में हैं कमांडर मदनी के ठिकाने
Wed, 22 Jan 2020 03:30 PM IST
शिखा पांडेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: शिखा पांडेय
Updated Wed, 22 Jan 2020 03:30 PM IST
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डॉ. बम
- फोटो : अमर उजाला
कानपुर के फेथफुलगंज से शुक्रवार को एसटीएफ के हत्थे चढ़ा आतंकी डॉ. बम आईएसआई समर्थित लश्कर-ए-तैयबा के स्लीपर सेल कमांडर उमर शम्स उर्फ मदनी के नेपाल स्थित ठिकाने पर जा रहा था। उसकी गिरफ्तारी के बाद शुरू की गई छानबीन में यह जानकारी एसटीएफ और अन्य सुरक्षा एजेंसियों को लगी है। यह भी पता चला है कि वह मदनी की नेपाल स्थित एजुकेशनल सोसाइटी से जुड़कर मास्टर अब्दुल्ला नाम से अपनी नई पहचान बनाना चाहता था। मदनी के दो ठिकानों में चल रहे आतंकी प्रशिक्षण केंद्रों से फिदायीनों को तैयार कर देश में आत्मघाती हमले करवाने की फिराक में भी था। इसके चलते अब भारत-नेपाल सीमा पर सुरक्षा बलों को अलर्ट किया गया है।
डॉ. बम
- फोटो : अमर उजाला
मूल रूप से बिहार के मधुबनी जिले का रहने वाला मदनी नेपाल में लश्कर के स्लीपर सेल का कमांडर है। जलीस ने मदनी को बम बनाने की ट्रेनिंग दी थी और 90 के दशक में बम ब्लास्ट की घटनाओं में वह जलीस के साथ भी था। जलीस के जेल जाने के बाद वह लश्कर गुट से जुड़ गया था। कुछ साल पहले दिल्ली की तीस हजारी कोर्ट से जमानत मिलने के बाद उसने देश छोड़कर नेपाल में ठिकाना बना लिया। पिछले साल अक्तूबर में जम्मू में हुए आतंकी हमले के बाद लश्कर के कुछ आतंकियों को भारत-नेपाल सीमा से पकड़ा गया तो मदनी का नाम फिर से सामने आया। सुरक्षा एजेंसियों ने काफी प्रयास किया लेकिन मदनी पकड़ में नहीं आया। सूत्रों के मुताबिक जलीस जेल में बैठकर मदनी से संपर्क बनाए हुए था। सीएए के विरोध में हिंसक प्रदर्शन शुरू होने के बाद उसने मदनी के साथ मिलकर देश में आत्मघाती हमले करवाने की साजिश थी।
डॉ. बम
- फोटो : अमर उजाला
जेल में ही बम बनाने की विधियों पर किया शोध
जलीस ने मुंबई और अजमेर जेल में ही बम बनाने की विधियों पर शोध कर रहा था। सूत्रों के अनुसार जेल प्रशासन की मदद से ही उसे हर सुविधाएं मुहैया हो रही थी। मौजूदा समय में जलीस कम खर्च में घातक बम बनाने का तरीका इजाद कर चुका है। मदनी उसके इस हुनर का इस्तेमाल अपने प्रशिक्षण केंद्र के लिए करना चाहता था। कहा तो यह भी जा रहा कि मदनी के इशारे पर ही जलीस के वकील ने उसे पैरोल दिलवाई थी। इसी के चलते वह नेपाल का रुख करना चाहता था।
जलीस ने मुंबई और अजमेर जेल में ही बम बनाने की विधियों पर शोध कर रहा था। सूत्रों के अनुसार जेल प्रशासन की मदद से ही उसे हर सुविधाएं मुहैया हो रही थी। मौजूदा समय में जलीस कम खर्च में घातक बम बनाने का तरीका इजाद कर चुका है। मदनी उसके इस हुनर का इस्तेमाल अपने प्रशिक्षण केंद्र के लिए करना चाहता था। कहा तो यह भी जा रहा कि मदनी के इशारे पर ही जलीस के वकील ने उसे पैरोल दिलवाई थी। इसी के चलते वह नेपाल का रुख करना चाहता था।
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डॉ. बम
- फोटो : अमर उजाला
कपिलवस्तु और तराई में चलता है मदनी का ट्रेनिंग कैंप
नेपाल में चैरिटी के लिए मदनी ने नेपाल एजुकेशनल सोसाइटी नाम से संस्था बनाई है। इसकी आड़ में वह आतंकी प्रशिक्षण केंद्र चलाता है। इसमें कई नेपाली युवा भी ट्रेनिंग ले रहे हैं। मदनी का मुख्य ठिकाना कपिलवस्तु है, यहां के दो ठिकानों को आतंकी ट्रेनिंग के लिए इस्तेमाल कर रहा है। इसके अलावा नेपाल से सटे यूपी के तराई इलाके में उसकी कुछ ठिकाने हैं, जहां अस्थायी प्रशिक्षण केंद्र चल रहे हैं। इन्हीं इलाकों से उसके आतंकी पूरे देश में घुसपैठ कर रहे हैं।
नेपाल में चैरिटी के लिए मदनी ने नेपाल एजुकेशनल सोसाइटी नाम से संस्था बनाई है। इसकी आड़ में वह आतंकी प्रशिक्षण केंद्र चलाता है। इसमें कई नेपाली युवा भी ट्रेनिंग ले रहे हैं। मदनी का मुख्य ठिकाना कपिलवस्तु है, यहां के दो ठिकानों को आतंकी ट्रेनिंग के लिए इस्तेमाल कर रहा है। इसके अलावा नेपाल से सटे यूपी के तराई इलाके में उसकी कुछ ठिकाने हैं, जहां अस्थायी प्रशिक्षण केंद्र चल रहे हैं। इन्हीं इलाकों से उसके आतंकी पूरे देश में घुसपैठ कर रहे हैं।
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डॉ. बम
- फोटो : अमर उजाला
मिर्जा के ठिकानों पर भी सुरक्षा एजेंसियों की निगाह
नेपाल में तीन दशक पहले चोरी की गाड़ियों का अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर कारोबार करने वाले दिलशाद मिर्जा बेग की मौत के कई साल बाद फिर से उसका कारोबार शुरू हो गया है। मिर्जा के रिश्तेदार और परिवारीजन इस धंधे को आगे ले जाने में आतंकी संगठनों का सहारा ले रहे हैं। आशंका जताई जा रही है कि जलीस मिर्जा के इस ठिकाने का भी इस्तेमाल कर सकता था। सुरक्षा एजेंसियां मिर्जा के अड्डों पर भी नजर बनाए हुए हैं।
नेपाल में तीन दशक पहले चोरी की गाड़ियों का अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर कारोबार करने वाले दिलशाद मिर्जा बेग की मौत के कई साल बाद फिर से उसका कारोबार शुरू हो गया है। मिर्जा के रिश्तेदार और परिवारीजन इस धंधे को आगे ले जाने में आतंकी संगठनों का सहारा ले रहे हैं। आशंका जताई जा रही है कि जलीस मिर्जा के इस ठिकाने का भी इस्तेमाल कर सकता था। सुरक्षा एजेंसियां मिर्जा के अड्डों पर भी नजर बनाए हुए हैं।