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मां को घर से निकालने वाला बेटा अब खुद होगा घर से बेदखल, इस टोल फ्री नंबर पर करें कॉल

Thu, 12 Apr 2018 12:55 PM IST
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर Updated Thu, 12 Apr 2018 12:55 PM IST
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 son who took the mother away from home will now be displaced from the house
डेमो पिक

मां को उसके ही बसाए घर से निकालने वाले बेटे को बेदखल किया जाएगा। कानपुर के चकेरी निवासी उर्मिला पांडे (60) ने हाईकोर्ट में बेटे की करतूत के खिलाफ अर्जी दी थी। कोर्ट ने एसडीएम सदर कोर्ट को मामले की सुनवाई का आदेश दिया था। 22 मार्च को एसडीएम कोर्ट ने माता-पिता एवं वरिष्ठ नागरिक का भरण पोषण एवं कल्याण अधिनियम के तहत कार्रवाई का आदेश दिया है। इस फैसले से बिठूर के रामधाम आश्रम में रह रही उर्मिला का दोबारा गृह प्रवेश हो सकेगा। 
 

मारपीट की रिपोर्ट चकेरी थाने में दर्ज

 son who took the mother away from home will now be displaced from the house
डेमो पिक
उर्मिला पांडेय ने याचिका में कहा था कि उनके पति राजेंद्र पांडेय एयरफोर्स में नौकरी करते थे। जिनका निधन 30 जून 1986 को हो गया था। पति के निधन के बाद उन्होंने जैसे-तैसे मकान बनवाया। बेटी रश्मि और बेटे मनीष को पाला-पोसा और दोनों का विवाह कराया। बेटी ससुराल में है। उर्मिला ने मनीष की शादी सन 2000 में अनीता से कराई थी। उर्मिला के अनुसार बेटा और बहू उसके साथ अक्सर मारपीट करते थे। 2008 में मारपीट की गई जिसकी रिपोर्ट भी चकेरी थाने में दर्ज है। दोनों ने घर से उन्हें निकाल दिया था। तबसे वह वृद्ध आश्रम में रह रही हैं।
 

देखभाल जरूरी

 son who took the mother away from home will now be displaced from the house
डेमो पिक
वरिष्ठ नागरिक का भरण पोषण एवं कल्याण अधिनियम 2007 में 60 साल या इससे ऊपर की उम्र के लोगों को सीनियर सिटीजन माना गया है। बेटा, बेटी, पौत्र और पौत्री पर इनकी देखभाल करने का प्रावधान है। अगर किसी के बच्चे नहीं हैं तो प्रापर्टी पर क्लेम करने वाले रिश्तेदारों को देखभाल करनी होगी। अगर कोई अपने मां-पिता, बाबा या दादी की देखभाल नहीं करता है तो एसडीएम दस हजार रुपये तक प्रतिमाह भत्ता दिला सकते हैं। न देने पर तीन माह की कैद, पांच हजार रुपये तक जुर्र्माना या दोनों की सजा दी जा सकती है।
 
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तो वसीयत शून्य

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डेमो पिक
अगर कोई मां-बाप अपने बच्चों के नाम प्रापर्टी की वसीयत कर देता है और उसके बाद बच्चे उनकी देखभाल नहीं करते हैं तो वसीयत शून्य घोषित हो सकती है। मां-बाप इसके लिए एसडीएम के यहां अर्जी देंगे। कोर्ट भी जा सकते हैं।
 
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एसडीएम से शिकायत

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डेमो पिक
मां-बाप की देखभाल न करने, उनका उत्पीड़न करने की शिकायत एसडीएम से की जाएगी। यह जरूरी नहीं है कि संबंधित व्यक्ति ही शिकायत करें। अधिनियम में प्राविधान है कि किसी भी व्यक्ति से सीनियर सिटीजन के उत्पीड़न की शिकायत मिलती है तो वह खुद संज्ञान लेकर कार्यवाही करेंगे। अधिनियम की धारा 22 में एसडीएम को कई अधिकार दिए गए हैं। वह पुलिस को सीनियर सिटीजन की सुरक्षा के विशेष बंदोबस्त करने को कह सकता है।
 
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