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चौथे दिन भी हुई डॉ. आदित्यवर्धन की खोज: ड्रोन कैमरों की मदद से प्रशिक्षित 80 जवानों ने 45 KM तक खंगाली गंगा
Tue, 03 Sep 2024 07:31 PM IST
शिखा पांडेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: शिखा पांडेय
Updated Tue, 03 Sep 2024 07:31 PM IST
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Deputy Director Health
- फोटो : अमर उजाला
बिल्हौर कोतवाली क्षेत्र के नानामऊ गंगा तट पर 31 अगस्त की सुबह स्नान के दौरान डूबे इंदिरानगर लखनऊ निवासी स्वास्थ्य विभाग के उप निदेशक डाॅ. आदित्यवर्धन सिंह का चौथे दिन भी पता नहीं चला। एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीमों ने ड्रोन कैमरों की मदद से गंगा बैराज तक करीब 45 किलोमीटर रेस्क्यू अभियान चलाया। इस दौरान नदी के साथ बहाव, झाड़ियों और रेतीले इलाकों को खंगाला गया।
Deputy Director Health
- फोटो : अमर उजाला
उच्चाधिकारियों के निर्देश पर मंगलवार को नदी किनारे झाड़ियों वाले इलाके में ड्रोन एक्सपर्ट के साथ खोजबीन की गई, लेकिन डाॅ. आदित्य का कोई पता नहीं लग सका है। वहीं, शिवराजपुर और चौबेपुर सहित बिठूर में निगरानी के लिए सिपाहियों की तैनाती की गई है।
Deputy Director Health
- फोटो : अमर उजाला
इधर आस्ट्रेलिया से आए आदित्यवर्धन सिंह के पिता रमेश सिंह, ताऊ शिवकुमार, ताऊ के पुत्र और बिहार सरकार में सचिव आईएएस अनुपम सिंह, मां शशि प्रभा, बहनाेई सहित पैतृक गांव कबीरपुर के लोग गंगा तट पर मौजूद रहे।
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Deputy Director Health
- फोटो : अमर उजाला
दोपहर करीब ढाई बजे सहायक पुलिस आयुक्त अजय कुमार भी मौके पर पहुंचे और आईएएस अनुपम सिंह से मामले को लेकर चर्चा की। एसडीएम रश्मि लांबा ने बताया कि बीते दो दिनों में गंगा नदी का जलस्तर भी नीचे गया है। पूरी उम्मीद है खोजबीन में लगी टीम को जल्द ही सफलता मिलेगी।
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Deputy Director Health
- फोटो : अमर उजाला
एनडीआरएफ जवानों को नदी में दिखे बड़े-बड़े कुछए
मंगलवार को शिवराजपुर तक खोजबीन कर लौटी एनडीआरएफ की टीम के सदस्यों ने बताया कि कई स्थानों पर खोजबीन के दौरान बड़े-बड़े कछुओं के झुंड भी दिखाई दिए है। वहीं, कई स्थानों मछलियां मिलीं। ठहरे हुए कई स्थानों पर एनडीआरएफ के जवान विशेष जीवनरक्षक यंत्रों के साथ नदी में उतरे भी, लेकिन बारिश के कारण पानी में मिट्टी की मात्रा अधिक होने से सफलता हाथ नहीं लग सकी।
मंगलवार को शिवराजपुर तक खोजबीन कर लौटी एनडीआरएफ की टीम के सदस्यों ने बताया कि कई स्थानों पर खोजबीन के दौरान बड़े-बड़े कछुओं के झुंड भी दिखाई दिए है। वहीं, कई स्थानों मछलियां मिलीं। ठहरे हुए कई स्थानों पर एनडीआरएफ के जवान विशेष जीवनरक्षक यंत्रों के साथ नदी में उतरे भी, लेकिन बारिश के कारण पानी में मिट्टी की मात्रा अधिक होने से सफलता हाथ नहीं लग सकी।