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स्कूल कोमा में, खौफ जदा छात्र और शिक्षक
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, कानपुर
Updated Wed, 21 Dec 2016 09:56 PM IST
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स्कूल के मुख्य द्वार की तस्वीर
- फोटो : अमर उजाला, कानपुर
जहां एक तरफ सूबे की सरकार सरकारी शिक्षा के मंदिरों पर करोडो रुपयों को सर्व शिक्षा अभियान के तहत खर्च कर रही है वही ये सरकारी स्कूल कोमा में पड़े अपनी बदहाली पर आंसू बहाने पर मजबूर है। जर्जर स्कुल और उनमें पढ़ने वाले बच्चे मौत के साए में पढ़ने को मजबूर हैं, तो वंही शिक्षक भी इन स्कूलों से खौफजदा हैं।
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स्कूल की जर्जर हालत बंया करती तस्वीर
- फोटो : अमर उजाला, कानपुर
शिक्षा विभाग प्रशासन ,कितना सक्रीय है और कितना संवेदनशील इसकी बानगी आपको खबर से मिल जाएगी। कानपुर के जूही इलाके में मौजूद शिव रत्न शुक्ल इंटर कॉलेज को देख कर आपकी रूह कांप उठेगी। साथ ही जहन में कई सवाल उठ खड़े होंगे कि क्या शिक्षा के मंदिरों का यह हाल भी हो सकता है?
क्लास रूम की तस्वीर
- फोटो : अमर उजाला, कानपुर
कानपुर जैसे महानगर के तमाम सरकारी स्कूलों की तस्वीर ऐसी ही है। लीजिए पीने को पानी नहीं , क्लासरूम में पंखे तो लगे है लेकिन बिजली नहीं, बच्चों के लिए शौचालय तक ठीक से नहीं हैं। जर्जर स्कूल और क्लास में लगे ब्लेकबोर्ड किस तरह मुंह चिढाते दिख रहे है इसका दर्द बच्चे और शिक्षक बयां करते नहीं थकते।
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खाली पड़ा स्कूल
- फोटो : अमर उजाला, कानपुर
स्कूल भवन की ऐसी जर्जर स्तिथि में है कि जो कभी भी गिर सकता है। स्कूल के बच्चों की जान खतरे में है। स्कूल की हर क्लास लगभग 24 क्लास रूम है जिसमे पूरी बिल्डिंग एक जर्जर ढांचे में खडी है प्लास्टर टूटा है तो कही फर्श पर गिट्टियां व ईंटे तक पडी है। कक्षा की छत अत्यंत जर्जर है इस स्कुल में कभी 800 बच्चे पड़ते थे। जो अब सिर्फ 250 बच्चे ही बचे है।
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दिवार और फर्नीचर की हालत जर्जर
- फोटो : अमर उजाला, कानपुर
छतों के पपपड़ टूट टूट कर गिर रही है। डर से स्कूल में बच्चों ने आना बंद कर दिया है। इस टूटटी गिरती जर्जर इमारत के बारे में स्कूल के प्रधानाचार्य ने कई बार नगर निगम के अधिकारियों को अवगत कराया मगर कोई मदद नहीं मिली। इसके बाद शिक्षा विभाग को कई पत्र भेजे लेकिन नगर निगम ने इस पर कोई तवज्जो नहीं दी।