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संजीत अपहरण हत्याकांड: काश! ये चार दिन की मेहनत पहले कर लेते, आज जिंदा होता वो
Sun, 26 Jul 2020 08:44 AM IST
शाहरुख खान
अमर उजाला नेटवर्क, कानपुर
अमर उजाला नेटवर्क, कानपुर
Published by: शाहरुख खान
Updated Sun, 26 Jul 2020 08:44 AM IST
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kanpur kidnapping case
- फोटो : अमर उजाला
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संजीत अपहरण हत्याकांड की गुत्थी आखिरी के चार दिन में सुलझी है। सर्विलांस, संदिग्धों से पूछताछ और मुखबिरों की मदद से अपहर्ता सलाखों तक पहुंचे। ऐसे में सवाल है कि अपहरण के बाद चार चार दिन तक संजीत जीवित था, अगर पुलिस उस वक्त मेहनत कर लेती तो एक परिवार उजड़ने से बच जाता।
kanpur kidnapping case
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22 जून की शाम संजीत का अपहरण हुआ था। 26 जून को देर रात संजीत को मारा गया। यानी अपहरण के बाद संजीत चार दिनों तक जीवित था। वहीं, बर्रा इंस्पेक्टर से लेकर एसपी साउथ की सर्विलांस टीम हाथ पर हाथ धरे बैठी रही। इसका नतीजा सबके सामने है। इधर फिरौती देने के बाद एसएसपी ने मामले का संज्ञान लिया। 18 जुलाई को नए इंस्पेक्टर हरमीत सिंह को बर्रा प्रभारी बनाया गया।
पुलिस की गिरफ्त में आरोपी
- फोटो : अमर उजाला
आठ टीमों ने काम शुरू किया। मोबाइल नंबर डेटा फिल्टरेशन की मदद से संदिग्ध नंबर निकाले गए। पुलिस तब हिमांशु तक पहुंची। पूछताछ में जो भी सुराग मिलने उसकी मदद से संदिग्धों को उठाया। 22 जुलाई की रात आरोपी नीलू हत्थे चढ़ गया। बस यहीं से एक के बाद एक कड़ी खुलती गई। ईशु तुरंत पकड़ा गया। कुछ ही घंटे में सभी आरोपी दबोच लिए गए। अंदाजा लगाया जा सकता है कि शुरुआती चार दिन की लापरवाही संजीत की जान ले गई।
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- फोटो : अमर उजाला
एसपी साउथ की सर्विलांस टीम फेल
22 जून को मामला दर्ज होने के बाद पुलिस ने उसका मोबाइल तक सर्विलांस पर नहीं लगाया। सर्विलांस प्रभारी को भी जानकारी नहीं दी। जब फिरौती की कॉल आई तो एसपी साउथ अपर्णा गुप्ता की सर्विलांस टीम ने नंबर सर्विलांस पर लगाकर जांच शुरू की। टीम में दो पुलिसकर्मी मयंक और शिवराम शामिल थे।
22 जून को मामला दर्ज होने के बाद पुलिस ने उसका मोबाइल तक सर्विलांस पर नहीं लगाया। सर्विलांस प्रभारी को भी जानकारी नहीं दी। जब फिरौती की कॉल आई तो एसपी साउथ अपर्णा गुप्ता की सर्विलांस टीम ने नंबर सर्विलांस पर लगाकर जांच शुरू की। टीम में दो पुलिसकर्मी मयंक और शिवराम शामिल थे।
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हैरानी की बात यह है कि एक ही नंबर से अपहर्ताओं के कई बाद कॉल करने पर भी दोनों पुलिसकर्मी उसको ट्रेस नहीं कर पाए। मोबाइल कई-कई घंटे तक ऑन रहता था। केस में यह सबसे बड़ी लापरवाही रही। उधर बिकरू कांड में सर्विलांस की मुख्य टीम और स्वाट टीम लगी रही। 13 तारीख को जब फिरौती दी गई तब सर्विलांस की प्रमुख टीम ने जांच शुरू की।