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कानपुर: मोर्चरी से पोस्टमार्टम हाउस तक परिजनों की चीखें, एक हादसे ने पांच परिवारों को दिए न भूल पाने वाले जख्म

Mon, 14 Oct 2024 09:49 PM IST
शिखा पांडेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर Published by: शिखा पांडेय Updated Mon, 14 Oct 2024 09:49 PM IST
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road accident in Kanpur: Screams of family members from mortuary to post mortem house
कानपुर में भीषण सड़क हादसा - फोटो : अमर उजाला
भौंती एलिवेटेड हाईवे पर हुए हादसे ने पांच परिवारों का जीवन भर का जख्म दे दिया। हादसे में किसी ने होनहार बेटी खोई तो किसी के परिवार का इकलौता चिराग हमेशा के लिए बुझ गया। माता-पिता के साथ भाई-बहनों ने जो सपने देखे थे, वे सभी एक पल में ही चकनाचूर हो गए। इस हादसे ने किसी परिवार के अरमानों को चकनाचूर कर दिया तो किसी को ऐसा गम दिया जो जीवन भर नहीं भुलाया जा सकता है। मॉच्यूरी से पोस्टमार्टम तक केवल चीखें ही सुनाई दे रहीं थी।


ममेरी बहन आयुषी का शव देख कांप गए हाथ-पैर
हादसे में जान गंवाने वाली आयुषी पटेल के पिता रमाशंकर पटेल हमीरपुर में फार्मासिस्ट हैं। परिवार में मां समता और एक भाई आयुष है। जो ग्यारहवीं का छात्र है। परिवार सनिगवां में केआर एजुकेशन सेंटर के पास रहता है। आयुषी कंप्यूटर साइंस फर्स्ट ईयर की छात्रा थी। पिता की दुलारी आयुषी की मौत ने पूरे परिवार की खुशियां छीन ली। दीपावली पर परिवार आयुषी संग खुशियां मनाने की सोच रहा था, मगर हादसे ने सबकुछ खत्म कर दिया। आयुषी की ममेरी बहन शालिनी उमराव सबसे पहले हैलट पहुंचीं। शव देख उनके हाथ पैर कांपने लगे। बोलीं कि विश्वास नही हो रहा, कल ही तो शालिनी से बात हुई थी।

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कानपुर में भीषण सड़क हादसा - फोटो : अमर उजाला
दो माह बाद ही थी प्रतीक की बहन की शादी
हैलट पहुंचे प्रतीक के परिजन उसका शव देखकर फफक पड़े। बोले, यह हमारा प्रतीक ही है। प्रतीक ईसी में फोर्थ ईयर का छात्रा था। परिवार में पिता राजेश सिंह गढ़ी पाली स्थित उदय भारती इंटर कॉलेज के प्रबंंधक हैं। मां मायादेवी गृहणी हैं। परिवार में दो बहनें 25 साल की शिखा उर्फ पारूल और 27 साल की साक्षी उर्फ काजल है। शिखा पीएचडी की तैयारी कर रही है जबकि साक्षी गुड़गांव में नौकरी कर रही है। दो माह बाद शिखा की शादी होनी है। परिवार में शिखा की शादी की तैयारियां चल रही थी। हादसे से शादी की खुशियां भी मातम में तब्दील हो गई हैं। पूरा परिवार सेन पश्चिम पारा थाना क्षेत्र स्थित करौली गांव में रहता है।

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कानपुर में भीषण सड़क हादसा - फोटो : अमर उजाला
सतीश ने भाई से लिया था शॉपिंग कराने का वादा
सतीश की मौत की खबर सुनकर हैलट पहुंचे पिता रमेश चंद्र व भाई नितिश का रो रोकर बुरा हाल था। सतीश का शव देख पिता-पुत्र एक दूसरे को सांत्वना दे रहे थे। पिता रमेश चंद्र छत्तीसगढ़ के बीजापुर में सीआरपीएफ में सब इंस्पेक्टर हैं, वहीं नितीश चंदौली में सीआरपीएफ में दरोगा के पद पर कार्यरत है। परिवार में मां संतोष कुमारी हैं। दशहरे की छुट्टी में पिता और भाई कानपुर आए थे। भाई नितीश ने बताया कि सतीश कपड़े और जूतों का बहुत शौकीन था। उसने वादा लिया था कि इस बार घर आना तो उसे शॉपिंग जरूर कराना। नितीश कह रहा था कि अब किसे शॉपिंग कराएगा।

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कानपुर में भीषण सड़क हादसा - फोटो : अमर उजाला
लाडली गरिमा का शव देखकर दीवार पर सिर पीटने लगे पिता
बेटी गरिमा का शव एंबुलेंस में रखा देख हैलट पहुंची मां रीता बदहवास हो गई। उनकी जुबान से सिर्फ यही निकल रहा था कि बहुत होनहार थी बेटी, न जाने परिवार को किसकी नजर लग गई। गरिमा के पिता भरत कुमार त्रिपाठी इटावा में टीएसआई हैं। परिवार में इंटर में पढ़ने वाली बहन महिमा, आठवीं में पढ़ने वाला भाई कुश है। पिता की लाडली गरिमा की मौत की जानकारी जब परिवार वालों को लगी तो उन्हें विश्वास नहीं हुआ, लेकिन मार्चुरी आकर देखा तो दीवार से अपना सिर पीटने लगे। आसपास खड़े लोगों ने बड़ी मुश्किल से उन्हें संभाला।

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कानपुर में भीषण सड़क हादसा - फोटो : अमर उजाला
करवा चौथ से पहले उजड़ा सुमन का सुहाग
बेटे शशांक से लिपटी ड्राइवर विजय की पत्नी सुमन साहू को विश्वास ही नहीं हो रहा कि कुछ देर पहले ही जो पति घर से कार लेकर काॅलेज के लिए निकले थे, अब वह कभी लौट नहीं आएंगे। इस परिवार के मुखिया 54 साल के विजय साहू का मेडिकल स्टोर भी है। इसके अलावा वह अपनी कार से बच्चों को सुबह आठ बजे कॉलेज छोड़ने जाते और शाम करीब पांच बजे कॉलेज से घर लाते थे। सभी बच्चे आसपास के ही रहने वाले थे। करवा चौथ के एक सप्ताह पहले ही सुमन की मांग का सिंदूर उजड़ गया। परिवार में दो बेटे शशांक और हिमांशु हैं। शशांक एमसीए कर रहा है, जबकि हिमांशु 12 वीं का छात्र है। पिता का शव देख परिवार में कोहराम मच गया।
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