कैबिनेट मंत्री राकेश सचान इससे पहले तब चर्चा में आए थे, जब वह विधानसभा चुनाव के नामांकन के आखिरी दिनों में कांग्रेस छोड़कर अचानक भाजपा में आ गए और भोगनीपुर विधानसभा से प्रत्याशी भी बना दिए गए। आश्चर्यजनक तो तब रहा जब चुनाव जीतने के बाद उन्हें सीधे कैबिनेट मंत्री बना दिया गया। करीब एक महीने के अंतराल में ही उन्होंने भाजपा में उन ऊंचाइयों को छू लिया, जो पिछले 30 साल से भाजपा में शामिल लोग नहीं हासिल कर सके। राकेश सचान को लेकर भाजपा में अभी भी यह कहावत प्रचलित है कि सभी का भाग्य राकेश सचान जैसा नहीं होता है। आर्म्स एक्ट के तहत हुए मुकदमे और सजा के बावजूद जमानत पर रिहा होने के बाद इस कहावत की चर्चा कचहरी में भी रही। राकेश सचान ने अपना राजनीतिक कॅरियर जनतादल से शुरू किया था। बाद में वह समाजवादी पार्टी में शामिल हुए। पहले विधायक बने फिर सांसद भी बने। इनकी पत्नी भी जिला पंचायत अध्यक्ष रहीं।
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Rakesh Sachan
- फोटो : अमर उजाला
इसके बाद वह कांग्रेस पार्टी में आ गए। फतेहपुर से दोबारा लोकसभा चुनाव में उतरे लेकिन सफलता नहीं मिली। कांग्रेस में पिछड़ों के नेता के रूप में अपनी जगह बना ली थी। 2022 के विधानसभा चुनाव में पूरी तैयारी थी कि कांग्रेस उन्हें विधानसभा से प्रत्याशी बनाएगी।
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कैबिनेट मंत्री राकेश सचान अपने अधिवक्ता के चैंबर में
- फोटो : अमर उजाला
इसी बीच उन्होंने दिल्ली में भाजपा के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह के सामने जाकर भाजपा का दामन थाम लिया। भाजपा ने उन्हें कानपुर-बुंदेलखंड क्षेत्र में पिछड़ों खासकर इस बेल्ट में सचान बिरादरी के बड़े नेता के रूप में स्थापित कर दिया।
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राकेश सचान ने किया समर्पण
- फोटो : अमर उजाला
कहा जा रहा है कि आर्म्स एक्ट में हुई इस सजा के बाद अब राकेश के सामने भाजपा और योगी सरकार में अपनी जगह बनाए रखने को लेकर कड़ी जद्दोजहद भी करनी पड़ सकती है।
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कैबिनेट मंत्री राकेश सचान अधिवक्ता के चैंबर में
- फोटो : अमर उजाला
पार्टी और सरकार पल-पल की खबर लेती रही
राकेश सचान की कोर्ट में सुनवाई को लेकर चले घटनाक्रम की पल-पल की खबर सीएम कार्यालय और भाजपा प्रदेश मुख्यालय से ली जाती रही। कहा जा रहा है कि इस मामले में राकेश सचान से भी संगठन पूछताछ कर सकता है।