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जब गजोधर की जान हुई 'मुहावरों से परेशान'
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Updated Wed, 11 Jul 2018 03:51 PM IST
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राजू श्रीवास्तव
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पिछले दिनों हम कानपुर मा रहेन तो आपन कुछ दोस्तन का दोपहर के खाने पे घर बुलायेन... तो हमाय घर केर महाराज हैं चिरौंजीलाल... हम उनका बुलावा... अउर कहा देखो हमरे बहुत खास दोस्त लंच पे आय रहे हैं... तो कुछ चौकस चीज बनैव। फिर कहा कि अइसा करौ पुलाव बनाय लेव... हम कहे चिरौंजीलाल बढ़िया बनायेव इज्जत का सवाल है... तो हमसे कहे लगा राजू भइया ये इज्जत का सवाल कितने नंबर का होत है... काहे से अबकी हाईस्कूल का फॉर्म हमहूं भरे हैं। हम कहा चिकाई ना करौ जाओ लंच की तैयारी करौ.. तो कहे लगा लंच बनाय तो देई पर खाओगे किस में? बर्तन कहां हैं भइया? हम कहा अरे डिनर सेट रखा तो है... वही निकाल लेव...।
राजू श्रीवास्तव
तो कहे लगा डिनर सेट मा खाली डिनर किया करौ...। हम कहा जादा महीन ना करौ... जाओ जाय के खाना तैयार करौ...। फिर ऊ खाना वाना तैयार कर दीस... हम आपन दोस्तन के साथ डाइनिंग टेबल पे खाय खातिर बइठे...। जइसेहे पहिला कौर खाय तो ओमा नमक नहीं रहा... हम कहे चिरौंजीलाल पुलाव में नमक नहीं है...। तो कहे लगा नमक कहा है घर मा... सारा नमक तो आप पेल देत हौ...। आपका दूसरों के जले पे नमक छिड़के की आदत जो है। हम कहा चलो जाओ बहुत बातैं बनाय लगे हौ...। तो कहिस कहां जाई? हम कहा भाड़ में जाओ... तो किरावा भाड़ा मांगे लगा। कहिस रिक्शा से जइबे...। फिर जइसेहेन खाय सुरु किये.. तो कौर मा पत्थर आय गवा... हम कहा यार एमा तो पत्थर आ रहे हैं...। फिर एक बड़ा पत्थर आवा... तो हम गुस्साय गए की यार ई कइसन पुलाव बनाय हौ। तो कहे लगा पत्थर तो अइबै करिहैं... काहे से ई कश्मीरी पुलाव हैं।
राजू श्रीवास्तव
अच्छा दुई दिन बाद हम एक शादी में सरसौल गए...। बरात आय मा देर रही तो अइसेहेन बइठ गए कुछ रिश्तेदारन के साथ... तबहीं ग्वालटोली वाली बुआ फोटोग्राफर का देख के कहिन चलो देर आये दुरुस्त आये.. हम कहा एमा दुरुस्त का भवा... जो देर से आवा वो दुरुस्त कैसे हुआ.. तो शिवाले वाली चाची कहिन अच्छा है सादी ब्याह में आवे का यहू फायदा है कि बढ़िया व्यंजन खाओ और फोटो सेशन कराओ मुफ्त मा... आम के आम गुठली के दाम... हम कहा चाची सब कहे की बात है कोई दाम वाम नहीं देत है... एक बार हम दुई बोरा गुठली इकठ्ठा कर के बाजार बेचे गए रहें... कोऊ नहीं खरीदे.. रिक्सा का किरावा लग गवा अलग से...। शुक्लागंज वाले फूफा कहिन... आजकाल केर औरतें आपन आदमियन का उंगली पे नचावत हैं .. तो हम कहा अरे फूफा ई कइसे होय सकत है.. इत्ती सी उंगली पे कहां डीजे बइठीहे अउर कहां रखियो साउंड सिस्टम...।
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राजू श्रीवास्तव
तो फूफा बोले अरे हम उड़ती चिड़िया के पर गिन लेत हैं...। हम कहा काहे छोड़ रहे हौ फूफा...। अब चिड़िया बची कहां हैं...। ई सब मोबाइल टावर के रेडिएशन से गायब हुई गई हैं। तबहीं जाजमऊ वाले चाचा फूफा से कहिन अरे कौनो के बारे मा अइसा नहीं बोले का चाही...। काहे से दीवारों के भी कान होत हैं तो नौघड़ा वाले जीजा बोले ये सब फालतू बात हैं... हम दिवार चेक किये हैं.. कौनो मा कान वान नइ ना...। तो कल्यानपुर वाले मनोहर बोले यार जीजा कुछौ बोल देत हौ.. अरे पहिले तोलो फिर बोलो .. तो जीजा कहिन अच्छा... मतलब अब तराजू बांट लैके घूमें !! हमका ज्ञान न पेलो... हमका पता है आज तुम आसमान के तारे तोड़ लिहे हौ...। हम कहा जीजा ईका का मतलब भवा? तो जीजा कहिन अरे भईया आज ड्राई डे के दिन ये पूरी बोतल जुगाड़ लाये।
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राजू श्रीवास्तव
तबहीं बरात आय गयी...। सब लोग सेट हुई गए तो बैंड वाला लड़के के बाप से कहिस कि भैया पइसे देव दूसर बरात में भी जाय का है...। तो ऊ कहिन कि तुमका भी अब्बै पइसा चाही...। तो बैंड वाला कहिस अउर का!! घोड़ा घास से दोस्ती करेगा तो खायेगा क्या? हम कहा यार ई सब मुहावरन के पीछे काहे पड़े हैं... तबहीं पंडित जी जोर से चिल्लाए...अरे ई मुहावरेबाजी छोड़ो भंवरी का टाइम हुई गवा है...। नहीं तो सांप निकल जाएगा अउर आप लाठी पीटोगे...। हम कहा पंडित जी आपहु मुहावरे पेले से बच नहीं पायेव!! अंत मा एकै बात कहे चाहत हुं दोस्तों... कि हमरी बात ध्यान से सुना करौ... काहे से घर में हमरी कोऊ सुनत नहीं है!!- राजू श्रीवास्तव (मशहूर कॉमेडियन)