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लाेकसभा चुनाव 2019: इस सीट के लिए संजीवनी हैं प्रियंका गांधी, भेद सकती हैं सपा-बसपा, भाजपा का गढ़

Sun, 17 Mar 2019 07:17 PM IST
प्रभापुंज मिश्रा यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर Published by: प्रभापुंज मिश्रा Updated Sun, 17 Mar 2019 07:17 PM IST
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priyanka gandhi for congress in lok sabha elections 2019
प्रियंका गांधी - फोटो : self
लोकसभा चुनाव 2019 जितना कांग्रेस के लिए खास है उतना ही भाजपा, सपा और बसपा के लिए भी है। इस लोकसभा चुनाव से पहले ही उत्तर प्रदेश की राजनीति में प्रियंका गांधी की एंट्री हो गई थी। प्रियंका गांधी की राजनीति में एंट्री यूपी ही नहीं पूरे देश में कांग्रेस के लिए संजीवनी बन सकती है। आजादी के बाद से कांग्रेस का गढ़ रहा फतेहपुर संसदीय क्षेत्र उससे काफी दूर हो चला है।


 
priyanka gandhi for congress in lok sabha elections 2019
कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के साथ प्रियंका गांधी वाड्रा - फोटो : PTI
चुनावी समर में 1989 के बाद से जो ब्रेक कांग्रेस पर लगा उससे वह अब तक उबर नहीं पाई। लोकसभा चुनाव में वह चौथे नंबर की पार्टी बनकर रह गई और कई बार तो प्रत्याशी की जमानत भी नहीं बची। इस बार प्रियंका कार्ड के सहारे फतेहपुर कांग्रेस को संजीवनी देने की तैयारी तेज की गई है। सूत्रों की मानें तो प्रियंका गांधी खुद कई रैलियां यहां करने की इच्छुक हैं।

 
priyanka gandhi for congress in lok sabha elections 2019
प्रियंका गांधी
खाटी कांग्रेसियों का भी मानना है कि उनकी संजीवनी जरूर कुछ असर दिखाएगी। बता दें कि जनपद में कांग्रेस का कोई उम्मीदवार पिछले तीन लोकसभा चुनाव में अपनी धमक साबित नहीं कर सका। कांग्रेस का वोट करीब एक लाख वोट से बढ़ नहीं पाया। लिहाजा पार्टी चौथे स्थान पर टिकती चली आ रही है। ऐसा नहीं कि कांग्रेस ने फतेहपुर संसदीय सीट पर कभी दांव नहीं खेला, दांव तो खेला लेकिन वह सपा-बसपा के गढ़ बन चुके क्षेत्र को ढहा नहीं पाया।

 
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महिलाओं से हाथ मिलातीं प्रियंका गांधी - फोटो : अमर उजाला
आंकड़ों पर गौर करें तो वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस ने पूर्व मंत्री स्व. मुन्ना लाल मौर्य की पत्नी ऊषा मौर्या को टिकट दिया। ऊषा मौर्या जनपद के लिए नया नाम तो नहीं है लेकिन वह अपनी छाप छोड़ने में सफल नहीं हो सकीं। नतीजा यह हुआ कि उन्हें महज 46588 वोट पाकर ही संतोष करना पड़ा। वर्ष 2009 के चुनाव में पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री के पुत्र हरिकृष्ण शास्त्री के बेटे विभाकर शास्त्री पर कांग्रेस ने दांव खेेला।

 
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प्रियंका गांधी के साथ कई बड़े नेता - फोटो : अमर उजाला
उनका नाम भी नया नहीं था। उनके साथ पूर्व प्रधानमंत्री का नाम जुड़ा रहा लेकिन जिले की जनता ने उन्हें 101853 वोट तक ही पहुंचाया। वह हार गए। इसके पहले 2004 में कांग्रेस ने मुस्लिम कार्ड खेलते हुए खान गुफरान जाहिदी पर दांव लगाया था। उन्हें भी जनता ने केवल 97441 वोट दिए। ऐसे में प्रियंका गांधी के सामने इस बार फतेहपुर में अपना प्रत्याशी चुनने की कड़ी चुनौती है।

 
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