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कौन हैं 'श्यामाचरण गुप्त' जिन्होंने लोकसभा चुनाव से ठीक पहले भाजपा को झटका दे थामा सपा का दामन
Sun, 17 Mar 2019 05:22 PM IST
प्रभापुंज मिश्रा
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: प्रभापुंज मिश्रा
Updated Sun, 17 Mar 2019 05:22 PM IST
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अखिलेश यादव, श्यामाचरण गुप्ता, पीएम मोदी
- फोटो : अमर उजाला
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टिकट कटने पर सपा से नाता तोड़ने वाले श्यामाचरण गुप्त ने टिकट मिलने पर फिर सपा का दामन थाम लिया है। पिछले चुनाव में सपा से टिकट न मिलने पर वह भाजपा में शामिल हो गए और वहां से टिकट लेकर प्रयागराज के सांसद बन गए। गठबंधन में मिली बांदा-चित्रकूट संसदीय सीट पर उन्हें टिकट मिलने से अन्य दावेदार हाथ मलते रह गए। श्यामाचरण इसके पूर्व भी बांदा से सपा के सांसद रह चुके हैं।
पूर्व भाजपा सांसद श्यामाचरण गुप्ता
- फोटो : अमर उजाला
शनिवार को प्रयागराज के भाजपा सांसद श्यामाचरण गुप्त के सपा में शामिल होने और लगे हाथ बांदा-चित्रकूट संसदीय सीट से टिकट का तोहफा मिल जाने के बाद सपा और बसपा के गलियारों में राजनीतिक सरगर्मियां बन गईं। उधर, भाजपा में भी गुणा-भाग और कयासबाजी शुरू हो गई। इसके पूर्व यहां गठबंधन से सपा के मिर्जापुर के पूर्व सांसद बालकुमार पटेल का नाम सबसे ज्यादा चर्चा में था।
पूर्व भाजपा सांसद श्यामाचरण गुप्ता
- फोटो : अमर उजाला
श्यामाचरण वर्ष 2004 में सपा के टिकट पर बांदा-चित्रकूट से चुनाव जीतकर सांसद चुने गए थे। उन्होंने बसपा के रामसजीवन को 56 हजार से ज्यादा वोटों से हराया था। 1999 में भी सपा के टिकट पर चुनाव लड़े थे, लेकिन बसपा के रामसजीवन से हार गए थे। श्यामाचरण को सपा में शामिल कर गठबंधन का प्रत्याशी घोषित करके बांदा-चित्रकूट संसदीय सीट पर प्रत्याशी की घोषणा में सपा अव्वल रही है।
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श्यामाचरण गुप्ता
- फोटो : अमर उजाला
भाजपा और कांग्रेस अब तक अपने प्रत्याशी नहीं घोषित कर पाए हैं। कांग्रेस के गलियारों में चर्चा है कि यहां भी दूसरे दल से आने वाले को टिकट का तोहफा मिल सकता है। 1989 में भाजपा से इलाहाबाद के मेयर बने। 1991 में कमल के निशान पर ही इलाहाबाद से चुनाव लड़े। 1999 में बांदा-चित्रकूट से सपा से चुनाव लड़े। 2009 में प्रयागराज के फूलपुर लोकसभा क्षेत्र से सपा से चुनाव लड़े।
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श्यामाचरण गुप्ता
- फोटो : अमर उजाला
2014 में प्रयागराज से भाजपा के टिकट पर सांसद चुने गए। पत्नी जमुनोत्री गुप्ता 1995 में भाजपा के टिकट पर इलाहाबाद मेयर का चुनाव लड़ चुकी हैं। बुंदेलखंड में लोकसभा चुनाव भाजपा, सपा-बसपा गठबंधन और कांग्रेस के बीच ही सीमित रहेगा। अन्य दलों की फिलहाल यहां कोई खास हलचल नहीं है। उधर, उद्योगपति के साथ कई चुनाव लड़कर राजनीति में माहिर हो चुके श्यामाचरण की गठबंधन प्रत्याशिता से भाजपा और कांग्रेस को अपने प्रत्याशी चयन में रणनीति बदलनी पड़ सकती है।