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गंगा में प्रदूषण परखने पहुंची इसरो टीम, रिपोर्ट में सामने आयी ये बात

Sat, 01 Dec 2018 02:04 PM IST
मनोज चौरसिया, अमर उजाला, कानपुर
मनोज चौरसिया, अमर उजाला, कानपुर Updated Sat, 01 Dec 2018 02:04 PM IST
सार

- टेनरियां बंद होने से जाजमऊ से वाजिदपुुर तक पानी थोड़ा साफ पाया
- सीसामऊ नाले का फ्लो कम होना भी बताया सुधार का कारण
 

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pollution Improvement in ganga during ISRO team trial
गंगा में प्रदूषण की जांच करती टीम - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

कानपुर शहर में दो साल बाद गंगा की शुद्धता परखने आई इसरो (भारतीय अंतरिक्ष शोध संगठन) की टीम को गंगा बैराज से वाजिदपुर तक गंगा में सुधार दिखा। 20 स्थानों से गंगाजल के नमूनों की जांच के बाद टीम इस निष्कर्ष पर पहुंची। जांच के दौरान सैटेलाइट से भी गंगा की तस्वीर ली। दो साल पहले गंगाजल की जांच कर टीम ने बताया था कि यह स्नान के लायक नहीं है।
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इसरो की टीम ने सुबह नौ बजे बैराज से गंगाजल के नमूनों की जांच शुरू की। मोटर बोट से गंगा की धारा के बीच जाकर पानी के नमूने लिए। वहां से भैरोघाट, परमट, बाबा घाट, सरसैय्या घाट, गुप्तारघाट होते हुए टीम ने गंगाघाट मार्ग (शुक्लागंज पुल) के पुराने व नए गंगा पुुल के बीच पहुंचकर पानी के नमूने लिए। इसके बाद टीम ने जाजमऊ, सिद्धनाथ घाट होते हुए वाजिदपुर तक गंगा, इसमें गिर रहे नालों, किनारे गंदगी देखी।
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इसरो की टीम के साथ सीएसजेएमयू के केमिकल विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. प्रवीण भाई पटेल भी शामिल रहे। उन्होंने बताया कि कुछ नमूनों की जांच हो गई है। दो साल पहले की तुलना में गंगाजल में काफी सुुधार हुआ है। इसमें स्वच्छता बढ़ी है। लेकिन, कई जगह स्थिति अब भी रेड जोन में है। सीसामऊ नाले से गंगा में पहले की तुलना में कम गंदगी गिरती मिली। मैस्कर घाट से जाजमऊ तक गंगा में किनारे की तरफ झाग दिखा, पर इसका स्रोत नहीं पता चल पाया। जाजमऊ से वाजिदपुुर तक पानी साफ था। जो नाले गंगा में गिर रहे थे, उनमें भी टेनरियों का क्रोमियम युक्त पानी नहीं दिखा। उनका कहना है कि इसी अनुपात में सुधार हो, सभी नाले टैप हो जाएं और लोग भी इस गंगा में गंदगी फेंकना बंद कर दें तो यह अपने बहाव से ही साफ हो जाएगी।
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गंगा में प्रदूषण की जांच करती इसरो टीम - फोटो : अमर उजाला
सैटेलाइट बताएगा पानी कैसा
इसरो की टीम की जांच के दौरान सैटेलाइट इमेज ली गई। इससे नमूने लेने के लिए संभावित लोकेशन के भी संकेत मिलते रहे। टीम ने उन्हीं स्थानों से गंगाजल के नमूने लिए। टीम प्रभारी प्रवीण ने बताया कि पानी के नमूनों की जांच के दौरान सैटेलाइट इमेज की तुलना की जाएगी। इसका डाटा सैटेलाइट में फीड किया जाएगा। इसके बाद सैटेलाइट से जिस नदी के पानी की जांच होगी, उसके पानी में पीएच वैल्यू, टीडीएस आदि की तुरंत जानकारी मिल जाएगी।

स्थान        पीएच वैल्यू    टीडीएस    टर्बिडिटी
बैराज        8.19            229            44
परमट        8.04            208            39
गंगाघाट पुल    7.99        244            42
जाजमऊ     8.8            241            46
वाजिदपुर    8.03            246            45

पीएच वैल्यू का मानक - 7.0 
पीने योग्य पानी का पीएच - 7.4 से 7.5। पानी में पीएच 8 से ज्यादा होने पर हाजमा खराब, त्वचा में संक्रमण का खतरा रहता है।
जीव-जंतुओं के लिए अधिकतम पीएच - 8.5
टीडीएस (टोटल डिजॉल्व सालिड) का मानक - 100-150
दो साल पहले जांच में मिला टीडीएस - 475
दो साल पहले इसरो की जांच में गंगा जल में मिला था औसत पीएच - 9.0
पीने योग्य पानी की टर्बिडिटी का मानक - 2.25
दो साल पहले वाजिदपुर में मिली टर्बिडिटी - 70

pollution Improvement in ganga during ISRO team trial
डेमो पिक
टर्बिडिटी बताता है पानी में गंदगी की मात्रा
जलकल विभाग की जल विश्लेषक अमिता वाजपेयी के अनुसार पानी की गंदगी को टर्बिडिटी कहते हैं। पानी की टर्बिडिटी जितनी ज्यादा होगी, उसमें उतने ज्यादा बैक्टीरिया होने की आशंका रहती है। पीने योग्य पानी की टर्बिडिटी 2.5 एनटीयू (नेफ्लोमीट्रिक टर्बिडिटी यूनिट) है। कोई और विकल्प न हो तो 10 एनटीयू टर्बिडिटी तक का पानी पिया जा सकता है।

सीडोम, क्लोरोफिल की जांच पहली बार
टीम ने गंगा में पहली बार 20 स्थानों पर गंगाजल में पीएच, टीडीएस आदि के साथ सीडोम, क्लोरोफिल की जांच के लिए नमूने लिए। सीडोम की जांच से पता चलता है कि पानी में आर्गेनिक मेटल कितने हैं। इसकी जांच हैदराबाद स्थित इसरो की लैब में होगी। इसी तरह क्लोरोफिल की जांच से पता चलता है कि पानी में जलकुंभी सहित कृषि संबंधी कितना कचरा आ रहा है।
 

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डेमो पिक
जांच टीम में ये सदस्य रहे शामिल
इसरो हैदराबाद के भू-विज्ञानी अनुराग मिश्र, भरत, जोधपुर के रिमोट सेेंसिंग साइंटिस्ट सुुशील कुमार, एसएचएआईवीटीएच इलाहाबाद के प्रोफेसर संतोष श्रीवास्तव, हिमांशु शुक्ला, डॉ. प्रवीण भाई पटेल, असिस्टेंट प्रोफेसर अभिषेक चंद्रा, सीएमजेएमयू के रसायन विभाग की डॉ. अर्पिता यादव आदि।

वाराणसी में दो, इलाहाबाद में 7 को जांच
इसरो की टीम दो दिसंबर को वाराणसी और 7 दिसंबर को इलाहाबाद में गंगाजल की जांच करेगी। टीम ने इन दोनों जिलों के आला अफसरों को इसकी सूचना दे दी है।
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