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103 साल पहले बनी पुलिस लाइन, मरम्मत तक नहीं हुई, सिपाही बोले हर साल आता है पैसा पता नहीं कहां जाता है

Tue, 25 Aug 2020 12:32 PM IST
प्रभापुंज मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर Published by: प्रभापुंज मिश्रा Updated Tue, 25 Aug 2020 12:32 PM IST
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Police line built 103 years ago, not even repaired once
हादसे के बाद सिपाही - फोटो : amar ujala
कानपुर कोतवाली क्षेत्र में बनी पुलिस लाइन का निर्माण 1917-18 में हुआ था। इसके बाद से इसकी मरम्मत तक नहीं हुई। 15 अगस्त या 26 जनवरी को रंगाई पुताई जरूरी हो जाती है। वर्तमान में ज्यादातर क्वार्टर जर्जर हैं। इसी वजह से एक क्वार्टर की छत भरभराकर ढह गई। यहां रह रहे सिपाहियों ने आरोप लगाया कि जर्जर क्वार्टरों में छत का प्लास्टर गिरना, दीवार गिरना तो आम बात हो गई है। इसकी शिकायत कई बार की जा चुकी है लेकिन मरम्मत नहीं हुई। 


 
Police line built 103 years ago, not even repaired once
पुलिस लाइन में बैरक हुई ध्वस्त - फोटो : amar ujala
ड्यूटी खत्म करने के बाद आराम करने लगे थे अरविंद
हादसे में मारे गए सिपाही अरविंद अपनी पत्नी नीलेश व दो बेटों हिमांशु और प्रियांशु के साथ कल्याणपुर के बारासिरोही में किराये के मकान में रहते थे। बड़ा बेटा हिमांशु बीए प्रथम वर्ष का छात्र है, जबकि छोटा बेटा हाईस्कूल में पढ़ता है। अरविंद को ताऊ के बेटे नौरतन सिंह ने बताया कि सोमवार रात उनकी पुलिस लाइन के गेट पर ड्यूटी थी। ड्यूटी खत्म करने के बाद वे आराम करने लगे। तभी हादसा हो गया। नौरतन भी पुलिस लाइन में तैनात हैं।

 
Police line built 103 years ago, not even repaired once
बैरक ध्वस्त होने के बाद फैला मलबा - फोटो : amar ujala
ज्यादातर सिपाही मेस में थे, नहीं तो हो जाता बड़ा हादसा
सिपाही राम प्रताप, जितेंद्र और अंकित ने बताया कि बैरक की छत गिरते ही तेज धमका हुआ था। धमाके की आवाज सुनकर जब वे बाहर आए तो चार सिपाही मलबे में दबे कराह रहे थे। बताया कि ज्यादातर सिपाही मेस में खाना खाने गए थे। थोड़ी देर बाद छत गिरती तो हादसा बड़ा हो सकता था। क्योंकि ज्यादातर सिपाही बैरक के बाहर छत के नीचे या छत पर सोते हैं। 

 
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Police line built 103 years ago, not even repaired once
बैरक ध्वस्त होने के बाद साथियों को ढूंढते सिपाही - फोटो : amar ujala
आए दिन होती है पुलिस लाइन की चेकिंग
पुलिस कर्मियों का कहना है कि आलाधिकारी आए दिन पुलिस लाइन की बैरक, मेस, शौचालय आदि देखते हैं। जर्जर हालत देख मरम्मत का आश्वासन भी देते हैं। शनिवार को भी डीआईजी ने एसएसपी कार्यालय में सभी अनुभागों को चेक कर जर्जर विभागोें की मरम्मत का आश्वासन दिया था।

 
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Police line built 103 years ago, not even repaired once
देर रात पहुंची एनडीआरएफ की टीम - फोटो : amar ujala
सूचना के आधे घंटे बाद पहुंची एंबुलेंस
पुलिस कर्मियों का आरोप है कि हादसे के बाद उन्होंने घटना की जानकारी अधिकारियों को देने के साथ ही 118 नंबर पर दी। एंबुलेंस आधा घंटे बाद पहुंची। इस पर पुलिस कर्मियों ने गुस्सा जताया। 
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