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पुलिस का दावा कानपुर में हिंसा भड़काने के पीछे सिमी, एआईएमआईएम और पीएफआई से जुड़े लोगों का हाथ

Mon, 23 Dec 2019 11:23 AM IST
प्रभापुंज मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर Published by: प्रभापुंज मिश्रा Updated Mon, 23 Dec 2019 11:23 AM IST
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People associated with SIMI, AIMIM and PFI are behind the violence in Kanpur
उपद्रवियों ने फूंकी पुलिस चौकी, गाड़ियों में लगाई आग - फोटो : अमर उजाला
कानपुर शहर में हुई हिंसा के पीछे सिमी(स्टूडेंट इस्लामिक मूवमेंट ऑफ इंडिया), एआईएमआईएम(ऑल इंडिया मजलिस ए इत्तेहादुल मुस्लिमीन) और पीएफआई(पीपुल फ्रंट ऑफ इंडिया) से जुड़े लोगों का हाथ है। पुलिस का दावा है कि इन तीनों संगठनों से जुड़े कई लोगों को चिह्नित कर लिया गया है, जिन्होंने हिंसा भड़काने में भूमिका अदा की है।


 
People associated with SIMI, AIMIM and PFI are behind the violence in Kanpur
उपद्रवियाें ने पुलिस चौकी की फूंकी, पेट्रोल बम से किया हमला - फोटो : अमर उजाला
सिमी से जुड़े रहे सुन्नी उलेमा कौंसिल के महामंत्री हाजी सलीस व जावेद उर्फ गुड्डू भी हिंसा भड़काने के आरोपी हैं। पुलिस को प्राथमिक सबूत तो मिल गए हैं, लेकिन कार्रवाई करने के पहले पुलिस और सबूत इकट्ठा करने में जुटी है। शहर में हुई हिंसा में अब तक तीन लोगों की मौत हो चुकी है। यतीमखाना में हुई हिंसा में पुलिस ने हाजी सलीस व जावेद को नामजद आरोपी बनाया है।

 
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सपा नेता इरफान सोलंकी और अमिताभ बाजपेयी के आने के बाद भड़की हिंसा - फोटो : अमर उजाला
एसपी पूर्वी राजकुमार अग्रवाल ने बताया कि ये दोनों आरोपी सिमी से जुड़े रहे हैं। दोनों जेल भी गए हैं। इससे इस बात को बल मिलता है कि हिंसा के पीछे सिमी का भी हाथ है। प्राथमि साक्ष्य तो मिल गए हैं, लेकिन और साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं। एसपी के मुताबिक एआईएमआईएम व पीएफआई से जुड़े लोग भी हिंसा में शामिल थे। कुछ वीडियो फुटेज व तस्वीरों में ये लोग कैद हुए हैं। कइयों की पहचान हो चुकी है।

 
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नागरिकता कानून पर कानपुर में भड़की हिंसा - फोटो : अमर उजाला
इन लोगों ने भीड़ को भड़काऊ भाषण दे उपद्रव के लिए उकसाया। जल्द ही कार्रवाई की जाएगी। उधर, सुरक्षा एजेंसियां भी सक्रिय हो गई हैं। पुलिस को यह भी शक है कि हिंसा के लिए सिमी, एआईएमआईएम और पीएफआई ने फंडिंग भी की है। शुरुआती जांच में यह बात सामने आई है। एसपी ने बताया कि इस बारे में गहनता से छानबीन की जा रही है। 

 
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उपद्रवियों को पुलिस ने नहीं छोड़ा तो लगा दी आग - फोटो : अमर उजाला
सिमी का गढ़ रहा है कानपुर 
सन् 1977 में सिमी का गठन हुआ। इसके बाद इस संगठन ने पांव पसारने शुरू किए। धीरे-धीरे कानपुर सिमी का गढ़ बन गया। सन् 1999 में कानपुर में सिमी का एक बड़ा सम्मेलन हुआ था, जिसके बाद इस संगठन की गतिविधियां बढ़ गईं। शहर में इसका एक कार्यालय भी था। यहां पर अंसार इरशाद शाहीन नामक फोर्स को प्रशिक्षण भी दिया जाता था। सन् 2001 में परेड चौराहे के पास पीएसी की गाड़ी पर सिमी के लोगों ने बम भी फेंका था। ये उस दौर की सबसे बड़ी घटना थी। इसमें एके-47 का भी इस्तेमाल हुआ था। 

 
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