जम्मू कश्मीर के पहलगाम की बायसरन घाटी में मंगलवार को हुए आतंकी हमला के बाद से पूरे देश में आक्रोश है। आतंकियों ने एक पर्यटकों के ग्रुप को निशाना बनाया। हमले में 26 पर्यटकों की मौत हो गई। 14 से ज्यादा लोग घायल भी हुए, घायलों का इलाज चल रहा है। उधर, पहलगाम हमले में मारे गए कानपुर के शुभम द्विवेदी की पत्नी ऐशान्या भी पहली बार मीडिया के सामने आईं। पहलगाम में क्या हुआ, उन्होंने पूरा घटनाक्रम बताया।
ऐशान्या ने कहा कि हम लोग हंसी-खुशी बैठे थे, इतने में आतंकी आए और बंदूक रख के शुभम को पूछा कि हिंदू है कि मुसलमान, पहले हम लोगों को समझ नहीं आया, फिर उन्होंने दोबारा पूछा कि हिंदू है कि मुसलमान। इस पर शुभमन ने नहीं कहा, इस पर आतंकियों ने तुरंत गोली मार दी। सबसे पहले आतंकी हमारे ही पास आए थे, पहली गोली भी शुभम को मारी थी।
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जानकारी देती ऐशान्या
- फोटो : X @ANI
कानपुर के रामादेवी चौराहे से फतेहपुर जाने वाले मार्ग पर छह किमी दूर स्थित हाथीपुर गांव में है पहलगाम में आतंकियों की गोली का शिकार हुए शुभम का घर। बुधवार को अमर उजाला की टीम उसके गांव पहुंची तो वहां काफी संख्या में गाड़ियां खड़ी थीं। इसी बीच कुछ रिश्तेदार महिलाएं घर के अंदर दाखिल हुईं तो वहां से आ रहीं शुभम की चाची की रोने की आवाज तेज हो गई। कुछ महिलाएं शुभम की चाची को दिलासा देती दिखीं पर चाची बार-बार चिल्लाकर कह रही थीं कि हाय मेरे लाल ये क्या हो गया। बाहर दीवार से टिककर बैठे चाचा ज्योतिषाचार्य पंडित मनोज आंसू छिपाने की नाकाम कोशिश करते दिखे।
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pahalgam attack
- फोटो : अमर उजाला
सोमवार को वीडियो कॉल पर हुई थी शुभम से बात
चाची ने बताया कि सोमवार शाम ही तो वीडियो कॉल पर शुभम से बात हुई थी। उन्हें क्या पता था कि वे आखिरी बार अपने भतीजे को देख रही हैं। उन्होंने हाल-चाल लिया था। रोते हुए बताया कि जब उनकी शादी होकर ससुराल आई थीं तो शुभम पांच साल का था। वह पूरे परिवार का दुलारा था। 12 फरवरी को शादी होने के 14 दिन बाद 26 फरवरी को उसका जन्मदिन था। इस मौके पर रुद्राभिषेक कराया गया था।
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रोती-बिलखती शुभम की दादी
- फोटो : अमर उजाला
'आतंकियों से बदला लिया जाना चाहिए'
घर के बाहर कुर्सियों पर गमगीन बैठे लोगों की जुबान पर बस एक ही बात थी कायर आतंकी खुलकर क्यों नहीं लड़ते, ऐसी घटना करने की जरूरत क्या थी। लोग शुभम और ऐशान्या की शादी के दिनों को याद करते दिखे। शुभम के पारिवारिक चाचा लगने वाले बुजुर्ग ने बताया कि इस तरह हम सब लोग शुभम की शादी में ही मिले थे। क्या पता था कि अगली मुलाकात ऐसे होगी। बोले, शुभम हमारी गोद में खेल कर बढ़ा हुआ था। कभी भी गांव आता तो उससे मिलना न भूलता। मृदु भाषी स्वभाव का था। चाचा मनोज द्विवेदी ने कहा कि भइया, भाभी और बहू किसके सहारे जिएंगे? उनके परिवार को दुख देने वाले आतंकियों से बदला लिया जाना चाहिए।
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ताबूत से शव निकालकर डीप फ्रीजर में रखने की तैयारी करते परिजन
- फोटो : अमर उजाला
शुभम के चाचा ने बताया कि उनसे परिवार के लोग लगातार संपर्क में हैं। बताया कि बहू ऐशान्या के सामने पूरी घटना हुई है। ऐसे में वह बदहवास हो गई है। उन्होंने बताया कि शुभम, शुभम की पत्नी ऐशान्या, पिता संजय द्विवेदी, मां सीमा, बहन आरती द्विवेदी, बहनोई शुभम दुबे, बहन के ससुर सुरेश कुमार दुबे और सास, शुभम के ससुर राजेश पांडेय, सास सुनीता पांडेय और साली शांभवी जम्मू-कश्मीर गए थे।