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आज हुआ था बिकरू कांड: खाकी के खून से सनी वो रात, गोलियों की हुई थी बरसात, आठ की हुई थी मौत
Fri, 02 Jul 2021 06:07 AM IST
प्रभापुंज मिश्रा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: प्रभापुंज मिश्रा
Updated Fri, 02 Jul 2021 06:07 AM IST
सार
पुलिस और एसटीएफ ने मिलकर आठ दिन के भीतर विकास दुबे समेत छह बदमाशों को एनकाउंटर में ढेर कर दिया था।
विकास दुबे कांड
- फोटो : amar ujala
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आज से ठीक एक साल पहले। 2 जुलाई 2020 की आधी रात 12:45 बजे। बिकरू गांव में गैंगस्टर विकास दुबे और उसके गुर्गों ने डीएसपी और एसओ समेत 8 पुलिसकर्मियों की हत्या कर दी थी। एक-एक पुलिसकर्मी को दर्जनों गोलियां मारी थीं। पुलिस और एसटीएफ ने मिलकर आठ दिन के भीतर विकास दुबे समेत छह बदमाशों को एनकाउंटर में ढेर कर दिया था। 45 आरोपी जेल में बंद हैं। केस का ट्रायल जारी है। दो जुलाई 2020 की रात को चौबेपुर के जादेपुरधस्सा गांव निवासी राहुल तिवारी ने विकास दुबे व उसके साथियों पर हत्या के प्रयास का मुकदमा दर्ज कराया था। एफआईआर दर्ज करने के बाद उसी रात करीब साढ़े बारह बजे तत्कालीन सीओ बिल्हौर देवेंद्र कुमार मिश्रा के नेतृत्व में बिकरू गांव में दबिश दी गई। यहां पर पहले से ही विकास दुबे और उसके गुर्गे घात लगाए बैठे थे। घर पर पुलिस को रोकने के लिए जेसीबी लगाई थी। पुलिस के पहुंचते ही बदमाशों ने उनपर छतों सेे गोलियां बरसानी शुरू कर दी थीं। चंद मिनटों में सीओ देवेंद्र मिश्रा समेत आठ पुलिसकर्मियों की हत्या कर ये सभी फरार हो गए थे।
विकास दुबे कांड: शहीद डीएसपी देवेंद्र मिश्रा, जय बाजपेई
- फोटो : amar ujala
तीन जुलाई की सुबह से शुरू हुए थे एनकाउंटर
देश को हिला देने वाली वारदात के बाद तीन जुलाई की सुबह सबसे पहले पुलिस ने विकास के रिश्तेदार प्रेम कुमार पांडेय और अतुल दुबे को एनकाउंटर में मार गिराया। यहीं से एनकाउंटर पर एनकाउंटर शुरू हुए। इसके बाद हमीरपुर में अमर दुबे को ढेर किया। इटावा में प्रवीण दुबे मारा गया। पुलिस कस्टडी से भागने पर पनकी में प्रभात मिश्रा उर्फ कार्तिकेय मिश्रा ढेर कर दिया गया।
देश को हिला देने वाली वारदात के बाद तीन जुलाई की सुबह सबसे पहले पुलिस ने विकास के रिश्तेदार प्रेम कुमार पांडेय और अतुल दुबे को एनकाउंटर में मार गिराया। यहीं से एनकाउंटर पर एनकाउंटर शुरू हुए। इसके बाद हमीरपुर में अमर दुबे को ढेर किया। इटावा में प्रवीण दुबे मारा गया। पुलिस कस्टडी से भागने पर पनकी में प्रभात मिश्रा उर्फ कार्तिकेय मिश्रा ढेर कर दिया गया।
विकास दुबे कांड
- फोटो : amar ujala
विकास के एनकाउंटर पर उठे थे सवाल, आज भी बरकरार
विकास दुबे का नौ जुलाई की सुबह उज्जैन में नाटकीय ढंग से सरेंडर हुआ था। एसटीएफ की टीम जब उसको कानपुर लेकर आ रही थी तो सचेंडी थाना क्षेत्र में हुए एनकाउंटर में विकास मार दिया गया था। एसटीएफ ने दावा किया था कि गाड़ी पलटने की वजह से विकास पिस्टल लूटकर भागा और गोली चलाईं। जवाबी कार्रवाई में वो ढेर हो गया। हालांकि टोल पर मीडिया को रोकना, टीयूवी का अचानक पलट जाना। पहले वो सफारी में लाया जा रहा था, अचानक गाड़ी का बदल जाने जैसे तमाम सवाल उठे थे। हालांकि पुलिस और मजिस्ट्रेटी जांच में सभी एनकाउंटर सही ठहराए गए।
विकास दुबे का नौ जुलाई की सुबह उज्जैन में नाटकीय ढंग से सरेंडर हुआ था। एसटीएफ की टीम जब उसको कानपुर लेकर आ रही थी तो सचेंडी थाना क्षेत्र में हुए एनकाउंटर में विकास मार दिया गया था। एसटीएफ ने दावा किया था कि गाड़ी पलटने की वजह से विकास पिस्टल लूटकर भागा और गोली चलाईं। जवाबी कार्रवाई में वो ढेर हो गया। हालांकि टोल पर मीडिया को रोकना, टीयूवी का अचानक पलट जाना। पहले वो सफारी में लाया जा रहा था, अचानक गाड़ी का बदल जाने जैसे तमाम सवाल उठे थे। हालांकि पुलिस और मजिस्ट्रेटी जांच में सभी एनकाउंटर सही ठहराए गए।
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विकास दुबे एवं हमले में शहीद पुलिसकर्मी
- फोटो : amar ujala
नाबालिग खुशी समेत 45 आरोपी हैं बंद, तीन पर एनएसए
बिकरू कांड के बाद पुलिस ने नाबालिग खुशी दुबे समेत कुल 45 आरोपियों को जेल भेजा है। इसमें खुशी समेत चार महिलाएं भी शामिल हैं। इसके अलावा नौ आरोपी विकास के मददगार और असलहा खरीदने वाले हैं। असलहा खरीदने वाला भिंड के एक सपा नेता का रिश्तेदार था। जिसको एसटीएफ ने पकड़ा था। अब तक तीन आरोपियों शिवम दुबे उर्फ दलाल, राजेंद्र और बबलू मुसलान पर एनएसए लगाया जा चुका है।
बिकरू कांड के बाद पुलिस ने नाबालिग खुशी दुबे समेत कुल 45 आरोपियों को जेल भेजा है। इसमें खुशी समेत चार महिलाएं भी शामिल हैं। इसके अलावा नौ आरोपी विकास के मददगार और असलहा खरीदने वाले हैं। असलहा खरीदने वाला भिंड के एक सपा नेता का रिश्तेदार था। जिसको एसटीएफ ने पकड़ा था। अब तक तीन आरोपियों शिवम दुबे उर्फ दलाल, राजेंद्र और बबलू मुसलान पर एनएसए लगाया जा चुका है।
जमीदोज कर दिया गया था विकास दुबे का किला
- फोटो : amar ujala
8 महीने बाद होना था रिटायर्ड
शहीद सीओ देवेंद्र कुमार मिश्रा मूलरूप से बांदा के रहने वाले थे। वारदात जुलाई 2020 को हुई। इसके ठीक आठ महीने बाद यानी मार्च 2021 में सीओ को रिटायर्ड होना था। फिलहान उनका परिवार स्वरूपनगर स्थित एक अपार्टमेंट में रहता है। बड़ी बेटी स्नातक पास कर चुकी है छोटी बेटी 12वीं की पढ़ाई कर रही है।
ये जांबाज हुए थे शहीद
डीसीपी देवेंद्र कुमार मिश्रा
एसओ महेश कुमार यादव
दरोगा अनूप कुमार सिंह
दरोगा नेबूलाल
सिपाही जितेंद्र पाल
सिपाही सुलतान सिंह
सिपाही बबलू कुमार
सिपाही राहुल कुमार
शहीद सीओ देवेंद्र कुमार मिश्रा मूलरूप से बांदा के रहने वाले थे। वारदात जुलाई 2020 को हुई। इसके ठीक आठ महीने बाद यानी मार्च 2021 में सीओ को रिटायर्ड होना था। फिलहान उनका परिवार स्वरूपनगर स्थित एक अपार्टमेंट में रहता है। बड़ी बेटी स्नातक पास कर चुकी है छोटी बेटी 12वीं की पढ़ाई कर रही है।
ये जांबाज हुए थे शहीद
डीसीपी देवेंद्र कुमार मिश्रा
एसओ महेश कुमार यादव
दरोगा अनूप कुमार सिंह
दरोगा नेबूलाल
सिपाही जितेंद्र पाल
सिपाही सुलतान सिंह
सिपाही बबलू कुमार
सिपाही राहुल कुमार