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अब चेहरे के तापमान से होगी अपराधी की पहचान, कानपुर आईआईटी ने किया नया शोध, अंतरराष्ट्रीय जर्नल में प्रकाशित
Sun, 06 Dec 2020 10:45 AM IST
प्रभापुंज मिश्रा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: प्रभापुंज मिश्रा
Updated Sun, 06 Dec 2020 10:45 AM IST
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आईआईटी कानपुर
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अब शातिर से शातिर अपराधी अपने चेहरे के तापमान की वजह से पकड़ में आएंगे। चेहरे के तापमान और हावभाव उसके काले कारनामों की पोल खोलने में मददगार बनेंगे। आईआईटी कानपुर के वैज्ञानिकों ने इसकी शोध की हैं। शर्म, पश्चाताप पर किए गए इस शोध को अंतरराष्ट्रीय जर्नल फ्रंटियर इन साइकोलॉजी में प्रकाशित किया गया।
तकनीक का इस्तेमाल लाई डिटेक्टर और नार्को टेस्ट की तरह करने के लिए नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी के जर्नल को मॉड्यूल का पूरा प्रस्ताव भेजा जाएगा। यह मॉड्यूल इंटरव्यू, भर्ती प्रक्त्रिस्या और अन्य जगह उपयोग में लाया जा सकता है। आईआईटी के ह्यूमैनिटी एंड सोशल साइंसेज के विभागाध्यक्ष प्रो. ब्रज भूषण, मैकेनिकल इंजीनियरिंग के प्रो. पीके पाणिग्रही, शोधार्थी शबनम बासु और सौरभ दत्ता की टीम ने दो चरणों में शोध किया।
पहले चरण में 30 छात्रों से जिंदगी में घटित होने वाले शर्म और पश्चाताप के किस्से लिखने को कहा गया। फिर टीम ने छात्रों की कहानी का परिस्थितियों के अनुसार चित्रण तैयार किया। इस चित्रण को 150 नए छात्रों को दिखाया गया। वही चित्रण कंप्यूटर स्क्त्रस्ीन पर दिखाए गए। छात्रों से राय ली गई कि उन्हें क्या महसूस हुआ।
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तकनीक का इस्तेमाल लाई डिटेक्टर और नार्को टेस्ट की तरह करने के लिए नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी के जर्नल को मॉड्यूल का पूरा प्रस्ताव भेजा जाएगा। यह मॉड्यूल इंटरव्यू, भर्ती प्रक्त्रिस्या और अन्य जगह उपयोग में लाया जा सकता है। आईआईटी के ह्यूमैनिटी एंड सोशल साइंसेज के विभागाध्यक्ष प्रो. ब्रज भूषण, मैकेनिकल इंजीनियरिंग के प्रो. पीके पाणिग्रही, शोधार्थी शबनम बासु और सौरभ दत्ता की टीम ने दो चरणों में शोध किया।
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पहले चरण में 30 छात्रों से जिंदगी में घटित होने वाले शर्म और पश्चाताप के किस्से लिखने को कहा गया। फिर टीम ने छात्रों की कहानी का परिस्थितियों के अनुसार चित्रण तैयार किया। इस चित्रण को 150 नए छात्रों को दिखाया गया। वही चित्रण कंप्यूटर स्क्त्रस्ीन पर दिखाए गए। छात्रों से राय ली गई कि उन्हें क्या महसूस हुआ।
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इस पर उन्होंने शर्म, पश्चाताप और प्रायश्चित होने की जानकारी दी। पहले हिस्से को जर्नल में छापा गया। दूसरे हिस्से में जैविक विश्लेषण हुआ। अबकि बार नए 31 छात्र लिए। उन्हें वही चित्रण दिखाए गए। हाई रेजोल्यूशन के थर्मल कैमरे लगाए गए। छात्रों के मत्थे, दोनों गाल, नाक का ऊपरी हिस्सा, आंख के दोनों किनारों को देखा गया।
प्रो. ब्रज भूषण के मुताबिक थर्मल कैमरे में तीनों में से किसी तरह के भाव आने पर चेहरे का तापमान गर्म हो गया। यह अधिकतम 0.5 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचा। इस तापमान को ठंडा होने में अमूमन 15 सेकेंड का समय लग गया।
रोचक रहे परिणाम
इनकी स्टडी में रोचक परिणाम सामने आए। प्रायश्चित के मुकाबले अपराध बोध के केस में गाल का दायां हिस्सा, होंठ के आसपास और मत्था अधिक गर्म हो गया। इसी तरह शर्म के मामले में गाल का बायां हिस्सा अधिक गर्म हो गया और नाक का ऊपरी हिस्सा हल्का गर्म हुआ। प्रो. ब्रज भूषण के मुताबिक मॉड्यूल को नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी ऑफ लॉ के जर्नल को प्रेषित किया जाएगा।
प्रो. ब्रज भूषण के मुताबिक थर्मल कैमरे में तीनों में से किसी तरह के भाव आने पर चेहरे का तापमान गर्म हो गया। यह अधिकतम 0.5 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचा। इस तापमान को ठंडा होने में अमूमन 15 सेकेंड का समय लग गया।
रोचक रहे परिणाम
इनकी स्टडी में रोचक परिणाम सामने आए। प्रायश्चित के मुकाबले अपराध बोध के केस में गाल का दायां हिस्सा, होंठ के आसपास और मत्था अधिक गर्म हो गया। इसी तरह शर्म के मामले में गाल का बायां हिस्सा अधिक गर्म हो गया और नाक का ऊपरी हिस्सा हल्का गर्म हुआ। प्रो. ब्रज भूषण के मुताबिक मॉड्यूल को नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी ऑफ लॉ के जर्नल को प्रेषित किया जाएगा।