फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें

यूपी-उत्तराखंड की 8000 कंपनियों पर 'नोटबंदी' का शिकंजा, अयोग्य घोषित 12000 निवेशक 

Wed, 08 Nov 2017 07:59 AM IST
प्रदीप अवस्थी, अमर उजाला, कानपुर
प्रदीप अवस्थी, अमर उजाला, कानपुर Updated Wed, 08 Nov 2017 07:59 AM IST
विज्ञापन
noteban effect on 8000 companies from uttarpradesh Uttarakhand
डेमो पिक

कालेधन पर अंकुश लगाने के लिए नोटबंदी कारगर साबित हुई है। यूपी और उत्तराखंड में ही एक साल के दौरान कालाधन सफेद करने वाली आठ हजार कंपनियों पर शिकंजा कसा गया है। इनमें से कानपुर की ही लगभग 700 कंपनियां हैं। शहर स्थित रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज ने शेल कंपनियों की आशंका में इन पर आजीवन प्रतिबंध लगा दिया है। इन आठ हजार कंपनियों के 12 हजार से अधिक निदेशकों को अयोग्य घोषित कर दिया गया है। ये पांच साल तक किसी भी कंपनी के निदेशक के तौर पर काम नहीं कर सकेंगे। 



रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज कार्यालय के सूत्र बताते हैं कि जिन आठ हजार कंपनियों पर कार्रवाई की गई है वे बीते दो-तीन साल से निष्क्रिय थीं, लेकिन नोटबंदी के दौरान इनकी सक्रियता देखी गई। इन कंपनियों के खातों में भारी भरकम रकम जमा हुई थी। इनकी पड़ताल की गई तो पता चला कि कैश जमा करने के अलावा इन कंपनियों की कोई सक्रियता नहीं रही। इनके निदेशकों की ओर से बीते दो तीन साल से फाइनेंशियल स्टेटमेंट भी दाखिल नहीं किया गया। इसी आशंका पर जांच हुई तो प्रथम दृष्टया ये फर्जी पाई गईं। 
 

noteban effect on 8000 companies from uttarpradesh Uttarakhand
डेमो पिक
जब्त होंगी संपत्तियां 
रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज के सूत्र बताते हैं कि प्रतिबंधित की गईं कंपनियां अपनी संपत्तियों की बिक्री नहीं कर सकेंगी। कालेधन से तैयार की गईं इन कंपनियों की संपत्ति को सरकार जब्त करने पर विचार कर रही है। वित्त मंत्रालय से निर्देश मिलते ही इन पर आगे की कार्रवाई शुरू होगी। दोषियों के खिलाफ कई स्तर पर शिकंजा कसा जाएगा। 
 
noteban effect on 8000 companies from uttarpradesh Uttarakhand
डेमो पिक
कानपुर है शेल कंपनियों का गढ़ 
कानपुर शेल कंपनियों का गढ़ है। नोटबंदी के बाद यह बात पुख्ता हो गई। खातों में भारी भरकम रकम जमा होने के बाद रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज ने यहां की करीब सात सौ कंपनियों को प्रतिबंधित किया है। आरओसी के सूत्र बताते हैं शहर में इतनी ही फर्जी कंपनियां विभाग के रडार पर हैं। यूपी और उत्तराखंड में प्रतिबंधित आठ हजार कंपनियों में से सात हजार यूपी की हैं। इनमें से सात सौ कानपुर की हैं। 
 
विज्ञापन
विज्ञापन
noteban effect on 8000 companies from uttarpradesh Uttarakhand
डेमो पिक
कालेधन के खिलाफ सरकार कड़े एक्शन के मूड में है। आने वाले समय में बाजार में वही टिकेगा जिसका काम साफ सुथरा है। फर्जी कंपनियों पर कड़ी कार्रवाई की तैयारी चल रही है। वित्त मंत्रालय से निर्देश मिलने का इंतजार है।  - पुनीत दुग्गल, रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज 
 
विज्ञापन
noteban effect on 8000 companies from uttarpradesh Uttarakhand
डेमो पिक
किसे कहते हैं शेल कंपनियां 
शेल कंपनियां वे कंपनियां होती हैं जो प्राय: कागजों पर चलती हैं। ये पैसे का भौतिक लेनदेन नहीं करतीं लेकिन मनी लांड्रिंग का आसान जरिया बनती हैं। इन्हें मुखौटा या फर्जी कंपनियां भी कहते हैं। इनका अस्तित्व केवल कागजों पर ही होता है। इनका कोई आधिकारिक कारोबार भी नहीं होता। ये कंपनियां न्यूनतम पेड अप कैपिटल के साथ काम करती हैं। डिविडेंड इनकम जीरो होती है। टर्नओवर और ऑपरेटिंग इनकम भी बहुत कम होती है। कहा जाता है कि काले धन को सफेद करने के लिए बड़े पैमाने पर शेल कंपनियों का इस्तेमाल किया जाता है।
अगली फोटो गैलरी देखें
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed