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मनीष हत्याकांड: कोर्ट में सरेंडर करने की फिराक में हत्यारे पुलिसकर्मी, हत्या के बाद मिटाए थे साक्ष्य
Sun, 10 Oct 2021 09:37 AM IST
प्रभापुंज मिश्रा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर/गोरखपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर/गोरखपुर
Published by: प्रभापुंज मिश्रा
Updated Sun, 10 Oct 2021 09:37 AM IST
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आरोपी जेएन सिंह और अक्षय मिश्रा। (फाइल फोटो)
- फोटो : अमर उजाला।
मनीष गुप्ता हत्याकांड के आरोपी इंस्पेक्टर जेएन सिंह, चौकी इंचार्ज रहे अक्षय मिश्रा कोर्ट में सरेंडर करने की फिराक में हैं। कानपुर और गोरखपुर पुलिस का गिरफ्तारी के लिए बढ़ते दबाव के बीच इंस्पेक्टर जेएन सिंह ने गोरखपुर के कई बड़े अधिवक्ताओं से संपर्क साधा है। हालांकि कुछ ने केस लड़ने से मना भी कर दिया है। सूत्रों का कहना है कि जेएन सिंह भी कानून को बारीकी से जानता है। इस वजह से वह कोर्ट में छुट्टी के दिन हाजिर होने की फिराक में है ताकि अधिवक्ताओं के गुस्से से बच सके। इंस्पेक्टर जेएन सिंह और उसके आरोपी साथी पुलिस के काम करने के सभी तरीकों को बारीकी से जानते हैं। यही वजह है कि पुलिस उस तक आसानी से पहुंच नहीं पा रही है। फरार पुलिस वाले कोई पेशेवर अपराधी या छिटपुट बदमाश नहीं हैं। उन्हें खुद पुलिस विभाग का लंबा अनुभव है। इस मामले में मुख्य आरोपी बनाया गया इंस्पेक्टर जेएन सिंह खुद एसओजी व एसटीएफ में तैनात रहा है। ऐसे में वह पुलिस की रग-रग से वाकिफ है।
मनीष गुप्ता हत्याकांड के मामले में जांच करती एसआईटी।
- फोटो : अमर उजाला।
सिपाही से वह प्रमोशन पाकर इंस्पेक्टर बना था। अब तक की सर्विस में सैकड़ों गिरफ्तारियां, दर्जनों एनकाउंटर कर आउट ऑफ टर्न प्रमोशन पाने वाले जेएन सिंह के बारे में गोरखपुर पुलिस का भी मानना है कि उसकी तलाश में लगाई गई टीमें अभी जो सोच रही और कर रही हैं, उसके आगे का रास्ता वह जानता है।
मृतक व्यापारी मनीष गुप्ता व मानसी अस्पताल के बाहर मौजूद पुलिस।
- फोटो : अमर उजाला।
बाराबंकी में रुके थे इंस्पेक्टर और दरोगा
सूत्रों का कहना है कि वारदात के अगले दिन 28 सितंबर को इंस्पेक्टर जेएन सिंह और दरोगा अक्षय मिश्रा थाने में जीडी लिखकर बाकायदा अपनी सर्विस रिवाल्वर और सीयूजी मोबाइल जमा करते हुए लखनऊ नंबर की काली स्कार्पियो से निकल गए और पुलिस उनका बाल तक बांका नहीं कर सकी। इसके बाद भी आरोपी फरार नहीं हुए।
सूत्रों का कहना है कि वारदात के अगले दिन 28 सितंबर को इंस्पेक्टर जेएन सिंह और दरोगा अक्षय मिश्रा थाने में जीडी लिखकर बाकायदा अपनी सर्विस रिवाल्वर और सीयूजी मोबाइल जमा करते हुए लखनऊ नंबर की काली स्कार्पियो से निकल गए और पुलिस उनका बाल तक बांका नहीं कर सकी। इसके बाद भी आरोपी फरार नहीं हुए।
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मनीष हत्याकांड
- फोटो : अमर उजाला।
सूत्रों के मुताबिक वह यहां रामगढ़ताल थाने से निकलकर सीधा लखनऊ गए और बाराबंकी में पूरी रात गुजारी। कहा जा रहा है कि बाराबंकी में स्थित अक्षय मिश्रा के घर पर ही इंस्पेक्टर और दरोगा रात में ठहरे थे। इसके बाद वह लखनऊ चिनहट भी गए। हालांकि, इस बीच पुलिस का बढ़ता दबाव देख वह जब गायब हुए तो फिर पुलिस उनकी परछाई भी नहीं छू सकी। बलिया में भी दोनों ने कुछ समय गुजारा है।
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मनीष हत्याकांड: कमरे से बाहर लेटे मनीष को तौलिया लेकर देते दरोगा।
- फोटो : अमर उजाला।
साक्ष्य मिटाने में होटल के लोग फंस सकते हैं
एसआईटी की जांच अभी जारी है तो अब खबर यह भी है कि इस मामले में आपराधिक साजिश की धारा (120) और साक्ष्य मिटाने की धारा (201) के तहत भी कई लोगों की गर्दन फंसती नजर आ रही है। साक्ष्य मिटाने में होटल के लोग फंस सकते हैं तो उन्हें बचाने वालों पर एसआईटी 120 की धारा में कार्रवाई कर सकती है। इस ओर भी एसआईटी की जांच जारी है।
एसआईटी की जांच अभी जारी है तो अब खबर यह भी है कि इस मामले में आपराधिक साजिश की धारा (120) और साक्ष्य मिटाने की धारा (201) के तहत भी कई लोगों की गर्दन फंसती नजर आ रही है। साक्ष्य मिटाने में होटल के लोग फंस सकते हैं तो उन्हें बचाने वालों पर एसआईटी 120 की धारा में कार्रवाई कर सकती है। इस ओर भी एसआईटी की जांच जारी है।