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मैरिज काउंसिलिंग नहीं बच्चों को रामकथा सुनाएं, जो सत्ता का रखे ध्यान वही राम- मंदाकिनी दीदी

Sun, 30 Sep 2018 08:02 AM IST
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर Updated Sun, 30 Sep 2018 08:02 AM IST
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Mandakini Didi said Tell children ram katha
रामकथा में मंदाकिनी दीदी - फोटो : अमर उजाला
कानपुर: आजकल मैरिज काउंसिलिंग का फैशन हो गया है। बड़े-बड़े घरों के लोग बच्चों को शादी से पहले काउंसलर के पास ले जाते हैं। इसकी जरूरत नहीं हैं। अपने बच्चों को रामकथा सुनाना शुरू कर दीजिए। इससे परिवारों में फूट और संबंध विच्छेद जैसी स्थिति कभी नहीं आएगी। यह दिव्य वचन श्रीराम लीला सोसाइटी परेड की ओर से जेएनके इंटर कॉलेज में आयोजित रामकथा में मंदाकिनी दीदी ने व्यक्त किए।


 
Mandakini Didi said Tell children ram katha
रामकथा में मंदाकिनी दीदी - फोटो : अमर उजाला
मंदाकिनी दीदी ने कहा कि भारत के पाणिग्रह संस्कार और पाश्चात्य मैरिज में काफी अंतर है। हमारे देश के पाणिग्रह संस्कार के दौरान पढ़े जाने वाले मंत्रों से न केवल नवदंपति को जोड़ा जाता है बल्कि आत्मा और जीव का भी उद्धार होता है। 16 संस्कारों में विवाह एक पवित्र संस्कार है। इसी कारण विवाह और लिव-इन-रिलेशनशिप मे काफी अंतर होता है। उन्होंने कहा कि विवाह के दौरान आचार्य कन्या से कहते हैं कि वर के सीने पर हाथ रखों और मानों कि अब तुम दोनों का चित एक जैसा हो गया है।
Mandakini Didi said Tell children ram katha
रामकथा में मंदाकिनी दीदी - फोटो : अमर उजाला
मंदाकिनी दीदी कहती हैं कि सती की परिभाषा यह नहीं है कि वह अपने पति को ही केवल सुखी रखे। बल्कि वह जो अपने पति और उससे जुड़ी हर खुशी का ध्यान रखे। सास-ससुर का ह्दय से आदर करे वह सती है। उन्होंने कहा कि जब अगले जन्म में माता सती ने पार्वती के रूप में जन्म लिया तो भगवान शिव की प्रसन्नता को ध्यान में रखते हुए रामकथा सुनने की इच्छा जताई, तभी भगवान शिव ने उनको सती का दर्जा दिया। कथा की शुरूआत से पहले पंडाल में सजे शिव-पार्वती, राम दरबार और कृष्ण जी की आरती उतारी। मंदाकिनी दीदी के साथ रामलीला सोसाइटी के अध्यक्ष महेंद्र मोहन गुप्त, राजीव गर्ग, कमल किशोर अग्रवाल, महेंद्र कुमार शुक्ला ने आरती उतारी।
 
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Mandakini Didi said Tell children ram katha
रामकथा - फोटो : अमर उजाला
मंदाकिनी दीदी ने बताया कि किसी ने उनसे कहा राम की भक्ति क्यों करती हैं। राम की भक्ति में सतुआ ही खाने को मिलता है। दीदी कहती हैं कि मैंने उस व्यक्ति को उत्तर दिया कि राम वह है जो खुद सतुआ खाकर प्रजा को माखन मिश्री खिलाए। राम ने रामराज्य की स्थापना की है। उन्होंने कहा कि सूरदास जी कृष्ण के भक्त थे, लेकिन उन्होंने रामलीला की सुंदर पंक्तियां लिखीं हैं। 
 
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Mandakini Didi said Tell children ram katha
रामकथा में मंदाकिनी दीदी - फोटो : अमर उजाला
प्रभु को खुश रखना है तो संत को खुश करिए
उन्होने कहा कि संतों के पास जाकर दुखड़ा न रोएं, संतों के ह्दय में भगवान का वास होता है। भगवान को प्रसन्न करने का सबसे सरल तरीका है कि संतों को प्रसन्न करिए। 
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