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लॉकडाउन: घर पहुंचने की जिद के आगे भूख प्यास बेदम, रोते हुए सुनाई आपबीती, बोले पैरों में पड़ गए छाले
Sun, 29 Mar 2020 12:07 AM IST
प्रभापुंज मिश्रा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: प्रभापुंज मिश्रा
Updated Sun, 29 Mar 2020 12:07 AM IST
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रास्ते में यात्रियों का स्वास्थ्य परीक्षण किया गया
- फोटो : amar ujala
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कोरोना के चलते लॉकडाउन घोषित होने के बाद देश के विभिन्न प्रांतों और जिलों में काम करने वाले मजदूरों का घर वापस लौटने का सिलसिला जारी है। सवारी साधन न मिलने पर पैदल ही सफर तय कर रहे हैं। शनिवार दोपहर बाद हमीरपुर और महोबा जिले के निवासी चार युवक पैदल जाते दिखे। पूछने पर उन्होंने नम आंखों के साथ अपनी आपबीती सुनाई।
सड़क किनारे बैठकर आराम करते लोग
- फोटो : amar ujala
चंदौखी (हमीरपुर) निवासी कुलदीप और ग्योंड़ी (महोबा) निवासी सतीश ने बताया कि वह लोग नोएडा के सेक्टर-63 में स्पोर्ट्स कंपनी में मजदूरी करते हैं। लॉकडाउन होने के बाद घर वापस लौटने के लिए कोई साधन नहीं मिला। 23 मार्च की सुबह चारों लोग पैदल प्रस्थान कर दिए। रास्ते में भूखे-प्यासे किसी तरह सफर तय कर यहां तक पहुुंचे। किसी ने रास्ते में कुछ दे दिया तो खाकर पानी पीने के बाद फिर आगे को चलते रहे। पैदल चलने की वजह से पैरों में छाले पड़ गए हैं पर किसी भी हाल में घर तो पहुंचना ही है।
रास्ते में लोगों को ट्रेक्टर से ले जाया गया
- फोटो : amar ujala
इधर, क्षेत्र मेंनिर्माणाधीन 1980 मेगा पावर विद्युत प्लांट में काम करने वाले करीब 1200 मजदूरों को उनके घरों को रवाना करने के लिए डीएम के निर्देश पर बीते शुक्रवार की रात रोडवेज की 27 बसें भेजी गईं। जोकि मजदूरों के लेकर देररात रवाना हुईं। नेयवेली की सहायक कंपनी एलएंडटी के अधिकारियों ने बताया कि घर भेजे गए मजदूरों को बसें प्रदेश के बहराइच, गोरखपुर और चंदौली जिलों तक पहुंचाकर वापस लौटेंगी।
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रिक्शे पर दिल्ली से बिहार जाते लोग
- फोटो : amar ujala
घाटमपुर में यमुनापट्टी (तिरहर) के कई गांवों के 123 युवक कंटेनर ट्रक से शनिवार दोपहर अपने गांव पहुंचे। चालक ने उनको मुगल रोड स्थित नवेड़ी गांव में उतार दिया। गांव के लोगों ने निगरानी में लेने के बाद प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग को सूचना दी। सूचना के बाद कई गाड़ियों से पहुंची मेडिकल टीमों ने युवकों की गांवों के बाहर एक-एक की जांच की। इसके बाद उनको गांव में प्रवेश दिया गया। स्थानीय लोगों ने युवकों को ट्रैक्टरों पर बैठाकर उनके गांवों तक पहुंचाया।
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गांव पहुंचने पर लोगों को स्वास्थ्य परीक्षण के लिए रोका गया
- फोटो : amar ujala
डॉक्टरों ने बाहर से आए युवकों को कम से कम 14 दिन अपने घर-परिवार और गांव के लोगों से मिलने पर पाबंदी लगाई है। निमधा गांव के प्रधान शिवबरन सिंह, टिकरी गांव निवासी पुष्पेंद्र सिंह और घाटमपुर की ब्लॉक प्रमुख देविका सिंह के पति इंद्रजीत सिंह कुशवाहा ने बताया कि इलाके के कोटरा-मकरंदपुर, निमधा, चिटकिनपुर, गड़ाथा, रामपुर और महुवापुरवा समेत अन्य गांवों के सैकड़ों युवक सूरत (गुजरात) और अन्य शहरों में मजदूरी करते हैं। बताया कि वहां से कुल 123 युवक कंटेनर ट्रक से रवाना हुए थे, जो शनिवार को यहां पहुंचे।