मानकों की अनदेखी व बिना सुरक्षा उपकरण पहाड़ों पर काम कराए जाने से घटनाएं हो रही हैं। पत्थरमंडी कबरई के गंज पहाड़ में बुधवार को खनन के लिए पहाड़ में छेद करते समय दो श्रमिकों की मौत पहली घटना नहीं है। इससे पहले पहाड़ों में काम करते समय दर्जनों मजदूर काल के गाल में समा चुके हैं।
महोबा: खनन के खेल में दांव पर जिंदगी, 200 से 250 फीट गहरी खदानों में श्रमिक करते हैं काम, नहीं है कोई इंतजाम
पत्थरमंडी में कब-कब हुईं श्रमिकों की मौत
12 जून 2020
पत्थरमंडी के पहरा गांव स्थित डिंगरा पहाड़ में आकाशीय बिजली चमकने से ब्लास्टिंग होने से तीन मजदूरों की मौत हो गई। मृतकों में बालचंद्र, बुद्घू व बालकिशन शामिल थे।
8 जनवरी 2021
पहरा गांव के ही डिंगरा पहाड़ में ब्लास्टिंग के लिए छेद करते समय पहरा निवासी चुन्नू कुशवाहा की गिरकर मौत हो गई थी। इस घटना के एक माह बाद मकरबई पहाड़ में संतू व ईश्वरी काम करते समय पहाड़ से गिरकर मौत का शिकार बने थे।
23 जनवरी 2022
कस्बा कबरई के घुरघुरु पहाड़ में ब्लास्टिंग के लिए छेद करते समय 150 फीट की ऊंचाई से गिरने से गांधीनगर निवासी चुन्नू की जान चली गई थी।
24 सितंबर 2022
कस्बे के गंगा मैया पहाड़ पर बिना सुरक्षा बेल्ट लगाए काम कर रहे कस्बे के रानीलक्ष्मीबाईनगर निवासी श्रमिक नागेंद्र वर्मा की 150 फीट गहरी खदान में गिरने से मौत हुई थी।
400 रुपये दिहाड़ी के लिए जान पर खेलते हैं श्रमिक
पहाड़ों में खनन कार्य के लिए श्रमिकों को प्रतिदिन 400 रुपये दिहाड़ी दी जाती है। सैकड़ों फीट गहरी खदान में यह श्रमिक जान जोखिम में डालकर ब्लास्टिंग के लिए छेद करते हैं। जिससे पत्थर गिरने या रस्सा टूटने से हादसे हो जाते हैं। पत्थरमंडी कबरई में एक सैकड़ा पहाड़ संचालित हैं। जहां खनन का कार्य होता है। इस कार्य में सैकड़ों श्रमिक लगे हैं।
श्रमिकों की मौत पर लगती है बोली
पहाड़ों में बिना मानक खनन का कार्य होता है। पट्टाधारकों की लापरवाही के चलते आए दिन मजदूरों की मौत हो जाती है लेकिन पट्टाधारक के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं होती। इसका मुख्य कारण खनन कार्य के दौरान मजदूरों की मौत होने पर रुपये की बोली लगाई जाती है। मृतक के परिजनों को पांस से दस लाख रुपये देकर मामला रफा-दफा कर दिया जाता है। दबाव के चलते गरीब श्रमिकों की आवाज दब जाती है।
खनिज नियमावली के अनुसार पहाड़ों में खनन कार्य जलस्तर से कम गहराई तक होना चाहिए जबकि यहां 200 से 300 फीट गहरी खदानों में खनन कार्य चल रहा है। पहाड़ों में खनन कार्य करने वाले श्रमिकों के सिर पर हेलमेट, कमर में सुरक्षा बेल्ट, पैरों में फुल जूते और ब्लास्टिंग का कार्य प्रशिक्षित श्रमिकों से कराए जाने का प्रावधान है लेकिन पहाड़ों में चल रहे खनन कार्य के दौरान नियम व मानकों का पालन नहीं किया जाता। जिससे घटनाएं हो रही हैं।
एसपी मैडम अब छोटे-छोटे बच्चों की कैसे होगी परवरिश
गंज पहाड़ में खनन कार्य के दौरान पत्थर गिरने से दो श्रमिकों की मौत की घटना के बाद परिजनों के आंसू नहीं थमे। चार माह की बेटी विनीता को गोद में लेकर दहाड़े मारकर रो रही मधु की पत्नी सुनीता को एसपी सुधा सिंह ढ़ाढस बंधाने पहुंची। सुनीता ने बताया कि उसके तीन बच्चे रितिक, कार्तिक और विनीता है। पति की मौत के बाद अब छोटे-छोटे बच्चों की परवरिश कैसे होगी। उनकी पढ़ाई-लिखाई व भरण-पोषण कहां से होगा। इस पर एसपी ने ढ़ाढस बंधाते हुए कार्रवाई और सहायता का भरोसा दिया। वहीं महेंद्र अहिरवार की पत्नी क्रांति रोते-रोते कई बार अचेत हो गई। परिजन पानी की छींटें मारकर उसे होश में लाने का प्रयास करते रहे। क्रांति नौ माह की बेटी मुस्कान को गोद में लेकर दहाड़े मारकर रोती रही।
घटना से पूरे गांव में नहीं जले चूल्हे
पहाड़ में दो श्रमिकों की मौत के बाद पूरे गांव में मातम का माहौल रहा। घटनास्थल पर जिसने भी श्रमिकों के क्षत-विक्षत शव देखे उनके रौंगते खड़े हो गए। घटना के बाद हर आंख नम नजर आई। दो श्रमिकों की मौत से बुधवार को पूरे दिन ग्रामीणों के चूल्हे नहीं जले। सुबह से दोपहर तक ग्रामीण घटनास्थल पर ही डटे रहे। इसके बाद गांव की महिलाएं मृतकों के परिजनों को ढ़ाढस बंधाने पहुंचती रहीं।