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कबाड़ को बनाएं काम का, बोतलों का गमले के रूप में ऐसे करें इस्तेमाल 

Thu, 29 Nov 2018 01:24 PM IST
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर Updated Thu, 29 Nov 2018 01:24 PM IST
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कानपुर एचएएल कालोनी में रहने वाले हरिश्चंद्र आर्य प्लास्टिक के डिब्बे और बोतलों का गमले के रूप में इस्तेमाल कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दे रहे हैं। उनका मानना है कि प्लास्टिक का यह कचरा यूं ही छोड़ दिया गया तो कहीं न कहीं पर्यावरण को नुकसान पहुंचाएगा। उनके इस प्रयोग से प्रेरित होकर आसपास के लोग भी अपने घरों में इन बोतलों और डिब्बों में पौधे लगा रहे हैं। हरिश्चंद्र आर्य समाज सेवा में भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते हैं। नारायण सेवा संस्थान में हर वर्ष पितृपक्ष पर 5001 रुपये दान देकर दिव्यांगों के ऑपरेशन में मदद करते हैं। इसके अलावा एचएएल मैदान में लोगों को योग की निशुल्क शिक्षा भी देते हैं।

 
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हरियाणा (पहले पंजाब) में 1946 में जन्मे हरिश्चंद्र आर्य मार्च 2006 में एचएएल (कानपुर) से मुख्य पर्यवेक्षक पद से सेवानिवृत्त हो चुके हैं। हरिश्चंद्र बताते हैं कि बढ़ते प्रदूषण को देखकर वे बहुत चिंतित रहते थे। तभी उनके मन में प्लास्टिक की बोतलों का गमले के रूप में इस्तेमाल करने का विचार आया। इसके दो फायदे हैं।
 
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एक तो प्लास्टिक कम होगी, दूसरा पौधों से पर्यावरण भी स्वच्छ रहेगा। उन्होंने 1974 में मोतीझील में स्वामी देवमूर्ति से योग और प्राकृतिक चिकित्सक की शिक्षा भी ली। इस शिक्षा को वे जनकल्याण में लगा रहे हैं। वाराणसी से आयुर्वेद विशारद की शिक्षा भी ली है। लोगों को आयुर्वेदिक और प्राकृतिक चिकित्सा का निशुल्क परामर्श भी देते हैं। 
 
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जीवन स्वास्थ्य पर लिखी किताबें 
हरिश्चंद्र ने अनेक पुस्तकों का अध्ययन कर रोग अनेक औषधि एक, वैदिक भजन माला (स्वास्थ्य, संस्कार), उपचार पत्रिका, आर्यवीर दल और वैदिक शिक्षा नाम से पुस्तकें भी लिखी हैं। उन्होंने बताया कि 2006 में लिखी उनकी ‘स्वास्थ्य एवं शारीरिक शिक्षा’ की 11 हजार प्रतियां शहर के अलका प्रकाशन ने छपवाई हैं। प्रकाशक नरेंद्र शुक्ला के अनुसार यह पुस्तक दक्षिण भारत में लोकप्रिय हुई। इसके अलावा एचएएल की हर वर्ष हिंदी दिवस पर प्रकाशित होने वाली पुस्तिका में योग, उपचार संबंधी लेख भी लिखते हैं। 
 
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युवाओं में योग संस्कार के लिए आर्य वीर दल बनाया
हरिश्चंद्र आर्य ने बताया कि नौकरी के दौरान वे आर्य समाज मंदिर से जुड़े रहे। इस दौरान युवा पीढ़ी में योग संस्कार का संचार बनाए रखने के लिए आर्यवीर दल बनाया। इसमें बच्चों को योगाभ्यास कराया। इसमें उनके भी बच्चे शामिल होते थे। 
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