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सूरज ढलने के बाद इस मंदिर में जो गया जिंदा वापस नहीं लौटा, जानिए आखिर क्या है इस मंदिर की कहानी

Thu, 04 Oct 2018 12:32 PM IST
प्रतीक मिश्रा, कानपुर
प्रतीक मिश्रा, कानपुर Updated Thu, 04 Oct 2018 12:32 PM IST
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know about this ghostly temple of Kanpur
पांचवी सदी का ईटों का मंदिर
मंदिर जाने से इंसान के मन को शांति मिलती है और जिंदगी की कठिनाइयों से लड़ने की शक्ति भी। लेकिन क्या अापने कभी ये सोचा है कि किसी मंदिर में देर शाम जाने वाला इंसान कभी जीवित नहीं लौटा। यूपी के कानपुर में एक ऐसा मंदिर है जहां शाम के समय जाना मना है। 


आगे की स्लाइड में पढ़ें- आखिर क्या है इस मंदिर की कहानी...


 
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पांचवीं सदी का ईटों का मंदिर
यूपी का कानपुर शहर वैसे तो अपने प्रचीन मंदिरों के लिए मशहूर है लेकिन घाटमपुर तहसील के भीतरगांव में पांचवीं सदी का एक ईंटों का मंदिर है। प्राचीन कलाकृतियों के साथ इस मंदिर में कई अनसुलझे रहस्य भी छुपे हुए हैं। मंदिर परिसर में शाम होते ही इंसान तो दूर परिंदा भी पर नहीं मारता है। ग्रामीणोंं का कहना है कि मंदिर के नीचे खजाना छुपा है और इस खजाने की हिफाजत आत्माएं करती हैं। जिसने भी इस मंदिर मेंं सूर्य ढलने के बाद कदम रखा वह जिंदा वापस नहीं लौटा। यही कारण है कि 103 साल से शाम के 7 बजते ही मंदिर के कपाट बंद कर दिए जाते हैं। गांव के लोग बताते हैं कि रात होते ही मंदिर परिसर में से अजीब तरह की आवाजें आना शुरू हो जाती हैं।

आगे की स्लाइड में पढ़ें- यहां बंजारोंं की हुई थी दर्दनाक मौत...

 
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पांचवी सदी का ईटों का मंदिर
ग्रामीणोंं के मुताबिक सन् 1905 मेंं यहां पर बंजारे आए हुए थे और मंदिर परिसर के पास डेरा जमा लिया। इसी दौरान गांववालोंं से उन्हें खजाने के बारे में पता चला, खजाना पाने के लिए करीब एक दर्जन बंजारे मंदिर के पास खुदाई करने के लिए पहुंचे जहां उनकी रहस्यमयी ढंग से मौत हो गई। जब गांववाले सुबह मंदिर मेंं दर्शन के लिए पहुंचे तब बंजारों के शव क्षत-विक्षप्त हालत में पड़े मिले। इसी के बाद अंग्रेजी हुकूमत ने मंदिर पर शाम होते ही ताले लगवाना शुरू कर दिया और तब से लेकर अब तक यह सिलसिला जारी है।

आगे की स्लाइड में पढ़ें- रहस्यों से भरा है यह ईटों का मंदिर...

 
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प्रचीन मंदिर की अद्भुत कलाकृतियां
कानपुर से करीब 50 किलोमीटर की दूरी पर स्थित पांचवीे सदी का ईंटों का बना गुप्त कालीन मंदिर अद्भुत प्राचीन कलाकृति का अनूठा नमूना है। गांव के लोग बताते हैं कि इस मंदिर के अंदर एक विष्णु जी के बावन अवतार वाली मूर्ति है। मंदिर के नीचे चंद्रगुप्त शासन काल के दौरान का खजाना छुपा है और इसकी सुरक्षा इंसान नहीं बल्कि आत्माएं करती हैं।

आगे की स्लाइड में पढ़ें- चंद्रगुप्त मौर्य ने कराया था मंदिर का निर्माण...

 
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पांचवी सदी का ईटों का मंदिर
ग्रामीण बताते हैं कि इस मंदिर का निर्माण चंद्रगुप्त मौर्य ने कराया था। पूरा मंदिर ईंटों से बना हुआ है, पिरामिड आकार के इस मंदिर की ऊंचाई 20 मीटर और चौड़ाई 70 मीटर है। मंदिर पर तराशी कई मूर्तियां प्राचीन कलाकृति को दर्शाती है। लेकिन राहस्यमयी मौतों की वजह से रात होने के बाद इस मंदिर में कोई भी नहीं जाता।  
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