अनधिकृत तरीके से किडनी ट्रांसप्लांट की रोगी पारुल तोमर (43) का पति विकास तोमर पत्नी को मौत के मुंह में डालकर लापता हो गया। उसने अपने छोटे साले दिव्यांक के साथ पत्नी को कानपुर भेज दिया। यह भी नहीं बताया कि उसे किडनी ट्रांसप्लांट के लिए ले जाया जा रहा है।
दिव्यांक ने बताया कि तब से जीजा का फोन स्विच ऑफ है। हालत तक नहीं पूछी है। दीदी का रो-रोकर बुरा हाल है। वह आईसीयू में हैं, सोच कर उनकी तबीयत और बिगड़ने लगती है। पारुल का भाई दिव्यांक इस समय हैलट के मल्टी सुपर स्पेशियलिटी के नेफ्रोलॉजी विभाग में भर्ती पारुल की तीमारदारी कर रहा है। उसने बताया कि मेरठ से वह 10-15 दिन पहले यहां आए थे।
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मल्टी सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल में पारुल की जांच करते मैडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. संजय काला
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
शिवलोक होटल में ठहरे थे। पारुल की डायलिसिस लाजपतनगर के निजी अस्पताल में हुई। 29 मार्च को रात में 11 बजे ऑपरेशन शुरू हुआ और तीन बजे तक चला। पहले डॉक्टर कह रहे थे कि रोगी को 48 घंटे ऑब्जर्वेशन में आईसीयू में रखेंगे लेकिन ट्रांसप्लांट के तुरंत बाद जिस कमरे में वह था, वहां शिफ्ट कर दिया।
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किडनी कांड के मरीज पारुल और आयुष चौधरी को देखते डॉक्टर
- फोटो : amar ujala
अस्पताल के स्टाफ से पूछा कि उससे तो कहा गया था कि रोगी को 48 घंटे आईसीयू में रखा जाएगा। इस पर कोई कुछ नहीं बोला। बाद में दोपहर में प्रिया हॉस्पिटल भेज दिया। वहां पुलिस आ गई।
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किडनी कांड के मरीज आयुष चौधरी की जांच करते प्राचार्य डॉ. संजय काला और अन्य
- फोटो : amar ujala
दिव्यांक ने बताया कि पारुल के साथ इनोवा कार से कानपुर आए थे। जब यहां आए तो पता चला कि किडनी ट्रांसप्लांट होना है। विकास तोमर को फोन किया कि तो मोबाइल बंद था। पारुल का 20 साल का बेटा और 14 साल की बेटी है।
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कानपुर किडनी कांड का मामला
- फोटो : amar ujala
दिव्यांक ने बताया कि डोनर आयुष चौधरी उसके लिए अजनबी है। ट्रांसप्लांट वाले दिन ही उसने आयुष को पहली बार देखा। डॉ. अफजल को उसने मेरठ के अल्फा हॉस्पिटल में एक बार देखा था। डॉ. अफजल स्विफ्ट कार में आया था।