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पेट में पल रही थी लड़की, पति ने मारपीट कर दिया तलाक, तो किसी ने पोस्टकार्ड पर लिखकर भेज दिया तलाक
Fri, 02 Aug 2019 02:04 AM IST
प्रभापुंज मिश्रा
सुहेल खान, अमर उजाला, कानपुर
सुहेल खान, अमर उजाला, कानपुर
Published by: प्रभापुंज मिश्रा
Updated Fri, 02 Aug 2019 02:04 AM IST
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तीन तलाक बिल अब बना कानून
- फोटो : PTI
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फौरी तीन तलाक के खिलाफ कानून बनने का रास्ता साफ होने के बाद तलाकशुदा पीड़ित औरतों के जख्म हरे हो गए। अपने कड़वे अनुभव को साझा कर उनका दर्द छलक आया। इन महिलाओं का कहना है कि इतनी कठिनाइयां सहने के बाद अब इस कानून से उन्हें क्या हासिल होगा, लेकिन शुक्र है कि उनके जैसा हाल दूसरों का न होगा।। उनका यह भी कहना है कि समस्या के समाधान होने के बजाय समस्या विकराल नहीं होनी चाहिए।
तीन तलाक (फाइल फोटो)
- फोटो : PTI
तलाक भेजा फिर कभी मुड़कर नहीं देखा
चमनगंज में रहने वाली पेशे से शिक्षिका चमन आरा की शादी 2003 में बेकनगंज में हुई थी और 2005 में उनको एक पोस्टकार्ड भेजकर वकील के माध्यम से तलाक भेज दिया गया। चमन को इस बात का अंदाजा भी नहीं था कि यह चिट्ठी नहीं बल्कि तलाक का फरमान है। वह अपने जुड़वां बच्चों के जन्म के डेढ़ महीने बाद मायके आई थीं। उन्होंने बताया कि तलाक के पोस्टकार्ड के लेते वक्त एक बेटी तूबा फातिमा एक साल की थी और दो जुड़वां बच्चे बेटा नबील और बेटी नबा फातिमा डेढ़ महीने की थीं।
चमनगंज में रहने वाली पेशे से शिक्षिका चमन आरा की शादी 2003 में बेकनगंज में हुई थी और 2005 में उनको एक पोस्टकार्ड भेजकर वकील के माध्यम से तलाक भेज दिया गया। चमन को इस बात का अंदाजा भी नहीं था कि यह चिट्ठी नहीं बल्कि तलाक का फरमान है। वह अपने जुड़वां बच्चों के जन्म के डेढ़ महीने बाद मायके आई थीं। उन्होंने बताया कि तलाक के पोस्टकार्ड के लेते वक्त एक बेटी तूबा फातिमा एक साल की थी और दो जुड़वां बच्चे बेटा नबील और बेटी नबा फातिमा डेढ़ महीने की थीं।
तीन तलाक विधेयक पर सुनवाई करने से सुप्रीम कोर्ट ने इनकार किया है
- फोटो : PTI
इसके बाद से उनके शौहर ने कभी मुड़कर न देखा। शौहर मोहम्मद जजीम ने कभी भी बोलकर उन्हें तलाक नहीं दिया। बेकनगंज के एक प्राइवेट स्कूल में पढ़ाकर अपने तीनों बच्चों की परवरिश की। एक साल पहले उन्हें घाटमपुर में सरकारी प्राइमरी स्कूल में बतौर शिक्षिका की नौकरी मिली है। वह कहती हैं कि कोर्ट का फैसला अच्छा है। जब निकाह के वक्त काजी, गवाज सभी होते हैं, निकाह में पहले लड़की की रजामंदी ली जाती है फिर तलाक के वक्त कोई भी मर्द अपनी बीवी को बोलकर और पोस्टकार्ड भेजकर अकेले में तलाक कैसे दे सकता है। कानून में गुजारा भत्ता देने का प्रावधान होना चाहिए।
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तीन तलाक
- फोटो : PTI
बीवी और चार बच्चों को छोड़ बोला तलाक-तलाक-तलाक
करीब 65 साल की उम्र काट चुकीं श्याम नगर मंगला विहार में रहने वाली खलीकुन को भी तीन तलाक ने गहरा जख्म दिया। उनके पति ने करीब 40 साल पहले उन्हें तलाक दिया। तब उनके तीन पुत्र और एक पुत्री थी। हीरामन का पुरवा में शादी के बाद खलीकुन और उनके बच्चों को छोड़कर पति मुश्ताक मुंबई चले गए। इसके बाद वह किराये के मकान में तलाक महल में रहीं।
करीब 65 साल की उम्र काट चुकीं श्याम नगर मंगला विहार में रहने वाली खलीकुन को भी तीन तलाक ने गहरा जख्म दिया। उनके पति ने करीब 40 साल पहले उन्हें तलाक दिया। तब उनके तीन पुत्र और एक पुत्री थी। हीरामन का पुरवा में शादी के बाद खलीकुन और उनके बच्चों को छोड़कर पति मुश्ताक मुंबई चले गए। इसके बाद वह किराये के मकान में तलाक महल में रहीं।
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तीन तलाक
कुछ सालों तक भाइयों ने उनकी मदद की लेकिन भाइयों की शादी के बाद वह बेगानी हो गईं। उनके बेटे बड़े हुए। छोटा मोटा काम करके दो बेटों और एक बेटी की शादी की लेकिन अब दोनों विवाहित पुत्र भी उन्हें अपने साथ नहीं रखते हैं। वह श्याम नगर में अपने एक अविवाहित पुत्र के साथ किराये के कमरे में रहती हैं। शौहर का इंतकाल हो चुका है। वह चाहती हैं कि सरकार उन्हें मुआवजा दे। वरना कानून से किसे फायदा होगा, तलाक तो हो ही जाएगा। पति जेल चला जाएगा।