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मदरसे में मिला कंकाल: ...तो बंद भवन में 20 मई 2023 को कौन पढ़ाने आया? बोर्ड पर लिखा था ये; कन्फ्यूज हुई पुलिस
Thu, 28 Nov 2024 11:24 AM IST
शाहरुख खान
अमर उजाला नेटवर्क, कानपुर
अमर उजाला नेटवर्क, कानपुर
Published by: शाहरुख खान
Updated Thu, 28 Nov 2024 11:24 AM IST
सार
कानपुर के जाजमऊ के पोखरपुर फार्म रोड पर चार साल से बंद पड़े मदरसे में बुधवार को एक किशोर का कंकाल मिला है। किशोर हॉफ पैंट पहने हुए था, जोकि खुला पड़ा था। कंकाल की शिनाख्त नहीं हो पाई है।
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kanpur human skeleton
- फोटो : अमर उजाला
कानपुर में चार साल से बंद मदरसे में किशोर का कंकाल मिलने के बाद पुलिस की चुनौती बढ़ गई है। कंकाल की शिनाख्त कराना आसान नहीं है। वहीं, मदरसे के ब्लैक बोर्ड पर अंकित 20 मई 2023 की तारीख से कई सवाल उठ रहे हैं।
ब्लैक बोर्ड पर लिखी तारीख और एबीसीडी
- फोटो : अमर उजाला
बता दें कि जिस मदरसे से कंकाल मिला है उसकी बिल्डिंग में बाहर लोहे का गेट लगा है। अंदर प्रवेश करने से पहले लोहे का चैनल लगा है। इसके अंदर एक ओर प्रथम तल पर जाने के लिए जीना बनाया गया है। दूसरी ओर एक क्लास रूम है, जिसमें धूल से सनी कुछ सीटें व बेंच पड़ी हैं।
चौंकाने वाली बात यह है कि ब्लैक बोर्ड पर क्लास वर्क में 20/05/2023 की तारीख लिखी गई है, जबकि परिवार और रिश्तेदारों का दावा है कि मदरसे में कोरोना काल से पढ़ाई बंद है।
चौंकाने वाली बात यह है कि ब्लैक बोर्ड पर क्लास वर्क में 20/05/2023 की तारीख लिखी गई है, जबकि परिवार और रिश्तेदारों का दावा है कि मदरसे में कोरोना काल से पढ़ाई बंद है।
बंद पड़े मदरसे के बाहर भीड़
- फोटो : अमर उजाला
अब सवाल उठता है कि बंद पड़े मदरसे में कौन पढ़ा गया? ऐसा लग रहा है कि कातिल पुलिस को गुमराह करने के लिए गलत तारीख लिख गया है। मदरसे में क्लास रूम के पीछे किचन है। इसके सामने कमरे में कंकाल मिला है।
पास में रहने वाले बोले अक्सर आती है दुर्गंध इसलिए नहीं हुआ शक
मदरसे के नजदीक रहने वाले विजय सिंह कहते हैं कि सामने जंगल है, जिसमें लोग मरे जानवर बोरी आदि में डालकर फेंक जाते हैं। इसलिए दुर्गंध आया करती है। यही वजह है कि पड़ोस के मकान में शव की दुर्गंध का आभास नहीं हुआ।
पास में रहने वाले बोले अक्सर आती है दुर्गंध इसलिए नहीं हुआ शक
मदरसे के नजदीक रहने वाले विजय सिंह कहते हैं कि सामने जंगल है, जिसमें लोग मरे जानवर बोरी आदि में डालकर फेंक जाते हैं। इसलिए दुर्गंध आया करती है। यही वजह है कि पड़ोस के मकान में शव की दुर्गंध का आभास नहीं हुआ।
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मौके पर पहुंची पुलिस
- फोटो : अमर उजाला
हॉफ पैंट व टी-शर्ट में कंकाल मिलने की खबर सुनकर दौड़ी अजबुन
छबीलेपुरवा से वाहिद अली का 11 साल का सबसे छोटा बेटा अयान 24 अगस्त 2023 को लापता हुआ था। उसकी 25 अगस्त 23 को गुमशुदगी दर्ज की गई थी। वह मानसिक रूप से कमजोर था। थाना प्रभारी ने बताया कि कंकाल में पड़ी टीशर्ट और हॉफ पैंट से वाहिद की पत्नी अजबुन ने बेटा के होने की आशंका जताई है। डीएनए जांच के बाद स्थिति स्पष्ट होगी।
छबीलेपुरवा से वाहिद अली का 11 साल का सबसे छोटा बेटा अयान 24 अगस्त 2023 को लापता हुआ था। उसकी 25 अगस्त 23 को गुमशुदगी दर्ज की गई थी। वह मानसिक रूप से कमजोर था। थाना प्रभारी ने बताया कि कंकाल में पड़ी टीशर्ट और हॉफ पैंट से वाहिद की पत्नी अजबुन ने बेटा के होने की आशंका जताई है। डीएनए जांच के बाद स्थिति स्पष्ट होगी।
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मदरसे में मिला कंकाल
- फोटो : अमर उजाला
चार साल से बंद पड़े मदरसे में मिला किशोर का कंकाल
कानपुर के जाजमऊ के पोखरपुर फार्म रोड पर चार साल से बंद पड़े मदरसे में बुधवार को एक किशोर का कंकाल मिला है। किशोर हॉफ पैंट पहने हुए था, जोकि खुला पड़ा था। कंकाल की शिनाख्त नहीं हो पाई है। पुलिस डीएनए टेस्ट कराने की बात कह रही है। जानकारी के अनुसार, नई सड़क निवासी परवेज अख्तर ने वर्ष 2015 में पोखरपुर में मदरसा कदरिया उलूम शुरू किया था। इसमें करीब 70-80 बच्चे पढ़ते थे। करीब चार साल पहले कोरोना काल में मदरसे का संचालन बंद कर दिया गया था। जून 2022 में परवेज की कैंसर से मौत हो गई थी।
कानपुर के जाजमऊ के पोखरपुर फार्म रोड पर चार साल से बंद पड़े मदरसे में बुधवार को एक किशोर का कंकाल मिला है। किशोर हॉफ पैंट पहने हुए था, जोकि खुला पड़ा था। कंकाल की शिनाख्त नहीं हो पाई है। पुलिस डीएनए टेस्ट कराने की बात कह रही है। जानकारी के अनुसार, नई सड़क निवासी परवेज अख्तर ने वर्ष 2015 में पोखरपुर में मदरसा कदरिया उलूम शुरू किया था। इसमें करीब 70-80 बच्चे पढ़ते थे। करीब चार साल पहले कोरोना काल में मदरसे का संचालन बंद कर दिया गया था। जून 2022 में परवेज की कैंसर से मौत हो गई थी।