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कानपुर एनकाउंटर: जय की अकूत संपत्ति के खुलेंगे राज, पहले 14 दिन की हिरासत अब पुलिस ने किया गिरफ्तार
Mon, 20 Jul 2020 12:11 PM IST
प्रभापुंज मिश्रा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: प्रभापुंज मिश्रा
Updated Mon, 20 Jul 2020 12:11 PM IST
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kanpur encounter
- फोटो : amar ujala
जय बाजपेई पांच भाइयों में तीसरे नंबर का है लेकिन संपत्ति के मामले में वह नंबर वन है। इस तथ्य का खुलासा जय के भाई रजय ने आईजी आलोक सिंह द्वारा कन्नौज के तत्कालीन एएसपी केसी गोस्वामी को सौंपी जांच में पूछताछ के दौरान 2017 में किया था। बिकरू कांड के मुख्य आरोपी विकास दुबे के सहयोगी जय के भाई रजय का रसूख भी कुछ कम नहीं था।
जय बाजपेई
- फोटो : अमर उजाला
सपा के सक्रिय सदस्य और सपा शासन में एसपीओ रहे रजय ने पुलिस के सवालों के बड़ी बेबाकी से जवाब दिए थे। रजय ने बताया था कि जय के नाम ब्रह्मनगर में दो मकान हैं, जबकि उसकी पत्नी श्वेता के नाम पर बी ब्लॉक पनकी व ब्रह्मनगर में एक-एक मकान है। बाकी चारों भाइयों या उनकी पत्नियों के नाम कोई मकान नहीं है।
Kanpur encounter
- फोटो : अमर उजाला
जय के नाम पर इंडिगो कार है, जबकि बाकी भाइयों के नाम दोपहिया वाहन ही हैं। जय के पास रिवॉल्वर का लाइसेंस और पासपोर्ट है। जय के एक चार मंजिला मकान में पुलिसवाले किराये पर रहते थे। इनमें तत्कालीन परमट चौकी प्रभारी राजपाल सिंह व पांच महिला कांस्टेबल भी थीं। जय ने कभी किराये की कोई रसीद नहीं काटी। रजय ने बताया था कि वह सपा में 15-16 साल से नेतागीरी कर रहा है और जय के काम देखता है।
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Kanpur encounter
- फोटो : अमर उजाला
बड़े भाई अजय की बैट्री व कार एसेसरीज की दुकान है। छोटा भाई राहुल मकानों व पुरानी गाड़ियों को बिकवाने का काम करता है जबकि शोभित एलएलबी का छात्र है। जांच के दौरान कन्नौज एएसपी ने शिकायतकर्ता सौरभ भदौरिया, विपक्षी जय-रजय व उसके परिजनों, आरोपी पुलिसकर्मियों सहित कई लोगों के बयान लेने के बाद 21 मार्च 2018 को दी 29 पन्नों की जांच रिपोर्ट में सभी तथ्यों का स्पष्ट उल्लेख किया था।
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जय बाजपेई
- फोटो : अमर उजाला
जांच रिपोर्ट में उन्होंने मुकदमे दर्ज होने के बावजूद जय के नाम से बजरिया थाने से रिवॉल्वर का लाइसेंस तथा नजीराबाद थाने से पासपोर्ट बनने पर दोनों थाना प्रभारी, संबंधित चौकी प्रभारियों, डीसीआरबी प्रभारी व स्थानीय अभिसूचना इकाई की भूमिका को संदिग्ध मानकर विस्तृत जांच की संस्तुति की थी।