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Vikas Dubey News: नवादा गांव के चौधरियों की मारपीट से शुरू हुआ था विकास के अपराध का सफर
Thu, 09 Jul 2020 12:45 PM IST
शिखा पांडेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: शिखा पांडेय
Updated Thu, 09 Jul 2020 12:45 PM IST
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विकास दुबे
- फोटो : अमर उजाला
कानपुर में गुरुवार (2 जुलाई) देर रात दबिश देने गई पुलिस टीम के आठ जवानों को मौत की नींद सुलाने वाले विकास दुबे का अपराध करने का सिलसिला वर्ष 1990 से शुरू हुआ था। बिकरू गांव निवासी किसान के बेटे विकास ने पिता के अपमान का बदला लेने के लिए नवादा गांव के किसानों को वर्ष 1990 में पीटा था।
बेटे और पत्नी के साथ विकास दुबे
- फोटो : अम
विकास दुबे के खिलाफ शिवली थाने में पहला मामला दर्ज हुआ था। ब्राह्मण बाहुल्य क्षेत्र में पिछड़ों की हनक को कम करने के लिए विकास को राजनीतिक संरक्षण मिलता गया। उस वक्त पूर्व विधायक नेकचंद्र पांडेय ने विकास को संरक्षण दिया था।
गैंगस्टर विकास दुबे
- फोटो : Amar Ujala
विकास क्षेत्र में दबंगई के साथ मारपीट करता रहा, थाने पहुंचते ही नेताओं के फोन आने शुरू हो जाते थे। कुछ दिनों बाद तो पुलिस ने भी विकास पर नजर टेढ़ी करनी छोड़ दी थी। वर्ष 2000 में विकास ने इंटर कॉलेज के सहायक प्रबंधक सिद्धेश्वर पांडे को गोली मारकर पहला मर्डर किया था।
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विकास दुबे
- फोटो : अमर उजाला
वर्ष 2001 में दर्जा प्राप्त राज्यमंत्री संतोष शुक्ला को शिवली थाने के भीतर गोली मारकर मौत के घाट उतारकर विकास ने क्षेत्र में अपनी दहशत फैलाई। बिकरू और शिवली के आसपास क्षेत्र में विकास की दहशत कुछ इस कदर थी कि उसके एक इशारे पर चुनाव में वोट गिरना शुरू हो जाते थे।
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रिचा दुबे, कुख्यात अपराधी विकास दुबे
- फोटो : amar ujala
चुनावी रंजिश में ही विकास की दुश्मनी लल्लन बाजपेई से हुई। शिवली क्षेत्र की जमीनों और बाजार की वसूली में अपना कदम रखने के बाद विकास की क्षेत्र में हनक बढ़ती गई। राजनीतिक संरक्षण और दबंगई के बल पर विकास जिला पंचायत सदस्य चुना गया और आसपास के तीन गांवों में उसके परिवार की ही प्रधानी कायम हो गई।