कन्नौज में आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे पर हुए हादसे के बाद सैफई मेडिकल कॉलेज के जूनियर स्टोर ऑफीसर राकेश कुमार की हादसे में मौत की सूचना पर पहुंचे बच्चों का करुण क्रंदन सुनकर लोग भी द्रवित हुए बिना नहीं रह सके।
पापा... पापा... उठ जाओ एक बार, हम आ गए... कहकर बच्चे बिलख रहे थे। बच्चों को देख वहां मौजूद हर किसी की आंख नम हो गई। जनपद बिजनौर कोतवाली देहात गांव जीवनपुर निवासी राकेश कुमार सैफई मेडिकल कॉलेज में जूनियर स्टोर ऑफीसर के पद पर तैनात थे।
लखनऊ आगरा एक्सप्रेस-वे पर हुए हादसे में उनकी मौत की सूचना पर पत्नी और चार वर्ष की बेटी अर्निका, आठ वर्ष का पुत्र समृद्ध मौके पर पहुंचे। पिता को देखकर दोनों बच्चे रोने लगे। बच्चे पिता से कह रहे थे पापा एक बार उठ जाओ। बच्चों को रोता हुआ देखकर आस पास खड़े लोग भी अपने आंसुओं को रोक नहीं पाए। साथ आए अन्य परिजन व रिश्तेदार भी बच्चों को चुप करा रहे थे।
एक्सप्रेसवे पर दोस्त करता रहा इंतजार, मिली मौत की खबर
उधर, एक घंटे तक डॉ. अरुण कुमार का दोस्त सलिल आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे पर इंतजार करता रहा। रात में 2.45 बजे अरुण ने फोन करके सलिल को फगुहा कट पर लेने के लिए बुलाया था, लेकिन मोबाइल बंद बताने की वजह से बात नहीं हो सकी थी। लखनऊ से विवाह समारोह में शामिल होकर वापस आ रहे डॉ. अरुण ने रात को 2.45 बजे नर्सिग होम के पार्टनर सलिल को फोन करके फगुहा कट पर बुलाया था। सलिल फगुहा कट पर पहुंच गया और दोस्त का एक घंटे तक वहां इंतजार करता रहा।
इसके बाद अरुण का मोबाइल स्वीच ऑफ हो गया था। सलिल ने सोचा मोबाइल की बैटरी खत्म हो गई है। इस कारण दोस्त का मोबाइल बंद हो गया है। इसके बाद भी अरुण नहीं आया तब सलिल टोल प्लाजा पर पहुंचा। वहां कर्मचारियों ने बताया कि एक स्कार्पियो हादसे का शिकार हो गई है। घायलों को पुलिस तिर्वा मेडिकल कॉलेज लेकर गई है। कुछ देर में स्कार्पियों को क्रेन टोल के पास लाती हुई सलिल को दिखाई दी।
सलिल के होश उड़ गए। वह मेडिकल कॉलेज पहुंचा वहां दोस्त अरुण और चार अन्य के शव देखकर दंग रह गया। सलिल की आंखों से आंसू बहने लगे और वह कुछ बोल भी नहीं पा रहा था। दोस्त अरुण का वह एक घंटे से एक्सप्रेसवे पर इंतजार कर रहा था। काल ने उसको अपने पास बुला लिया। शायद मोबाइल स्वीच ऑफ नहीं होता तो सलिल दोस्त को कॉल करके रोक लेता।
एक्सप्रेसवे पर 19 हादसों में हो चुकी 20 मौतें
आगरा लखनऊ एक्सप्रेसवे पर जनवरी से अब तक 19 हादसों में 20 लोगों की मौत हो चुकी है जबकि 98 लोग गंभीर रूप से घायल हुए है। कई लोगों ने दुर्घटना में अपने अंग भी गंवा दिए हैं। आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे पर ओवर स्पीड को रोकने के लिए कैमरे लगाए गए हैं। तय समय से पहले पहुंचने पर वाहनों के चालान कर दिए जाते हैं। कैमरे दिखाई देने पर स्पीड 100 किलोमीटर प्रति घंटे से नीचे कर लेते हैं।