कहते हैं कि जेल की चहारदीवारी के अंदर कैदियों और बंदियों को सुधारने की प्रक्रिया अपनाई जाती है। तभी तो इसे बंदी सुधार गृह भी कहा जाता है। लेकिव वास्तव में इस चारदीवारी के अंदर बड़े-बड़े खेल चलते हैं, जिसका अंदाजा शायद ही किसी को होगा। जो बंदी जमानत पर छूटकर जेल से बाहर आए हैं, वह जेल कर्मियों की करतूत खोलने के लिए काफी है। जैसे की किसी बंदी के परिजन मुलाकात करके वापस जाते हैं तो उसका दोहन शुरूहो जाता है। शादी ब्याह में नेग की तरह सबको भेंट चढ़ानी पड़ती है। न देने पर प्रताड़ित किया जाता है।
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को बंदियों के जेल से भागने के बाद जांच करती पुलिस
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
रविवार की रात जिला जेल से दो कैदियों, अंकित और डिंपी, के फरार होने की घटना ने जेल प्रशासन की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवालिया निशान लगा दिए हैं। जेल प्रशासन द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, रात 9 बजकर 35 मिनट पर बिजली जाने के बाद, कैदियों ने महिला बैरक के पीछे लकड़ियों और कंबलों के सहारे सरिया का कुंडा बनाकर 22 फुट ऊंची दीवार फांदी और खेतों में उतरकर फरार हो गए। हालांकि, जिस तरह से यह घटना बताई जा रही है, वह कई लोगों के गले नहीं उतर रही है।
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को बंदियों के जेल से भागने के बाद जांच के लिए आते अफसर
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
सुबह जब बंदियों की गिनती हुई, तब अंकित और डिंपी के फरार होने का पता चला। सवाल यह उठता है कि यदि कैदी रात में ही भागे थे, तो सुबह गिनती तक किसी भी बंदी रक्षक, सर्किल वार्डन या ड्यूटी पर तैनात गार्ड की नजर उन पर क्यों नहीं पड़ी?
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जेल से भागा अंकित
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
जेल प्रशासन के अनुसार, कैदी पहले अपने बैरक से निकले, फिर बैरक हाता गेट, उसके बाद दो सीओ गेट पार करके महिला बैरक तक पहुंचे और वहां से दीवार फांदकर भागे हैं। इतनी लंबी दूरी तय करने और कई सुरक्षा घेरों को पार करने के दौरान किसी भी सुरक्षाकर्मी का सतर्क न होना, जेल प्रशासन की कार्यप्रणाली पर संदेह उत्पन्न करता है।
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जेल से भागा शिवा ऊर्फ डिंपी
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
बाहरी मदद या अंदरूनी साठगांठ का अंदेशा
घटना वाले दिन सुबह 8 बजे से शाम 4 बजे तक होमगार्ड जवान की आखिरी दीवार पर ड्यूटी थी। घटना के समय तक, उस क्षेत्र में बंदियों के भागने के कोई निशान नहीं थे। इसके बाद, दो पक्का कैदियों के साथ तीन-चार सिपाही आए और उन्होंने लकड़ी से जमीन पर निशान बनाए। फिर, कारागार सिपाही के साथ जेल अधीक्षक भीमसेन मुकंद पहुंचे।