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Kannauj case: 15 मुकदमों में पुलिस न रख सकी थी हाथ... इस बार नवाब पर कसा शिकंजा; अखिलेश के साथ की थी दगाबाजी!
Fri, 16 Aug 2024 12:56 PM IST
शाहरुख खान
अमर उजाला नेटवर्क, कन्नौज
अमर उजाला नेटवर्क, कन्नौज
Published by: शाहरुख खान
Updated Fri, 16 Aug 2024 12:56 PM IST
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Kannauj Case
- फोटो : अमर उजाला
पूर्व ब्लॉक प्रमुख नवाब सिंह यादव का मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं। नाबालिग ने दुष्कर्म के आरोपी नवाब सिंह पर पहले 15 मुकदमे दर्ज थे, लेकिन पुलिस ने कभी कार्रवाई नहीं की थी। इस बार नवाब के खिलाफ 16वां मुकदमा दर्ज हुआ तो उस पर शिकंजा कस गया। एक समय सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष का करीबी था, लेकिन 2017 के बाद सपा ने उससे दूरी बना ली थी। कहा तो ये भी जाता है कि नवाब सिंह ने अखिलेश यादव के साथ दगाबाजी की थी।
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नवाब सिंह यादव
- फोटो : पीटीआई
दरअसल, नवाब सिंह यादव का यह सियासी रसूख ही था कि उसके खिलाफ अलग-अलग समय पर कुल 15 मुकदमे दर्ज हुए, लेकिन कभी पुलिस कार्रवाई नहीं कर सकी। यह मुकदमे बसपा, भाजपा, सपा शासन में लगते रहे। भाजपा की पिछली सरकार में भी मुकदमा दर्ज हुआ, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।
पुलिस की गिरफ्त में आरोपी
- फोटो : वीडियो ग्रैब
इस बार चूंकि मामला एक नाबालिग की असमत से जुड़ा था, तो पुलिस ने कार्रवाई करने में कोई हिचक नहीं दिखाई। अब उसे सलाखों के पीछे भेज दिया गया है। आगे और भी कड़ी कार्रवाई की तैयारी की जा रही है।
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अखिलेश यादव और डिंपल के साथ नवाब सिंह
- फोटो : अमर उजाला
2017 के बाद सपा से बनने लगी थी दूरी, घटने लगा था कद
सपा शासन के दौरान सत्ता के गलियारों में अपनी धमक रखने वाले नवाब सिंह के पार्टी से मतभेद भी शुरू हुए। इसकी शुरुआत हुई वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव के दौरान। कहा जाता है कि तब नवाब सिंह यादव ने तिर्वा विधानसभा सीट से टिकट की मांग की। पार्टी ने मांग नहीं मानी।
सपा शासन के दौरान सत्ता के गलियारों में अपनी धमक रखने वाले नवाब सिंह के पार्टी से मतभेद भी शुरू हुए। इसकी शुरुआत हुई वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव के दौरान। कहा जाता है कि तब नवाब सिंह यादव ने तिर्वा विधानसभा सीट से टिकट की मांग की। पार्टी ने मांग नहीं मानी।
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Nawab Singh Yadav
- फोटो : अमर उजाला
इससे खेमेबंदी शुरू हो गई। वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव में डिंपल यादव यहां से चुनाव हारीं तो नवाब सिंह यादव पर दगाबाजी का आरोप लगा। तब सपा ने पूरी तरह से दूरी बना ली थी। कभी पार्टी की बागडोर संभालने वाले नवाब सिंह को पार्टी के ही कार्यक्रम की जिम्मेदारी से दूर किया जाने लगा।