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कानपुर नगर निगम: ब्लैकलिस्टेड कंपनियों को हाईकोर्ट से राहत, मुख्य अभियंता का आदेश अवैध, 19 नवंबर तक अंतरिम रोक

Fri, 16 Oct 2026 09:24 AM IST
Himanshu Awasthi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर Published by: Himanshu Awasthi Updated Fri, 16 Oct 2026 09:24 AM IST
सार

Kanpur News: कानपुर नगर निगम के चर्चित टेंडर घोटाले में बिना कारण बताओ नोटिस जारी किए पांच कंपनियों को ब्लैकलिस्ट किए जाने के मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। हाईकोर्ट ने 24 अगस्त को जारी नगर निगम के ब्लैकलिस्टिंग आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी है।

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Kanpur Nagar Nigam High Court grants relief to blacklisted companies Chief Engineers order deemed invalid
कानपुर नगर निगम - फोटो : amar ujala

विस्तार

कानपुर नगर निगम के टेंडर घोटाले में बिना नोटिस जारी किए कंपनियों को ब्लैकलिस्टेड करने पर हाईकोर्ट ने रोक लगा दी है। हाईकोर्ट ने प्रथम दृष्टया कार्रवाई को अवैध बताते हुए नगर निगम के मुख्य अभियंता से व्यक्तिगत हलफनामा दाखिल कर यह स्पष्ट करने को कहा है कि किन परिस्थितियों में कंपनी को नोटिस जारी किए बगैर ही ब्लैकलिस्टेड कर दिया। कोर्ट ने 24 अगस्त को जारी आदेश पर तत्काल रोक लगा दी है।

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ऐसा न करने पर उन्हें अगली सुनवाई में व्यक्तिगत रूप से अदालत में उपस्थित होना पड़ेगा। न्यायमूर्ति अजीत कुमार और न्यायमूर्ति गरिमा प्रसाद की खंडपीठ ने मेसर्स कैला देवी कंस्ट्रक्शन बनाम यूपी राज्य व दो अन्य मामले में 12 अक्तूबर को यह आदेश दिया है। याचिकाकर्ता कंपनी की ओर से अधिवक्ता आशीष कुमार चौरसिया ने कोर्ट को बताया कि कानपुर नगर निगम के मुख्य अभियंता ने बिना कारण बताए, बिना पक्ष जाने और नोटिस न देकर सीधे कंपनियों पर ब्लैकलिस्ट की कार्रवाई की है।

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23 अगस्त को किया गया निरीक्षण
इस पर नगर निगम की ओर से अधिवक्ता अभिनव कृष्ण श्रीवास्तव ने दलील दी कि ब्लैकलिस्टेड करने से पहले मुख्य अभियंता की ओर से 23 अगस्त को नोटिस तामील कराई गई थी और 24 घंटे में अपना पक्ष रखने को कहा था। कोर्ट ने नोटिस का परीक्षण करने के बाद पाया कि 23 अगस्त को निरीक्षण किया गया और कंपनी को 24 घंटे के भीतर जवाब देने के लिए नोटिस जारी करने का निर्देश दिया गया था।

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पीठ ने आदेश को प्रथम दृष्टया अवैध बताया
हालांकि, अदालत के सामने प्रस्तुत नोटिस पर उसकी तामील का कोई प्रमाण नहीं था। ऐसा कोई दस्तावेज भी पेश नहीं किया गया जिससे साबित हो कि नोटिस कंपनी को व्यक्तिगत रूप से दिया गया था। हाईकोर्ट ने प्रथम दृष्टया माना कि कंपनी को अपना पक्ष रखने और बचाव का उचित अवसर नहीं दिया गया। यह भी पाया कि मुख्य अभियंता ने कंपनी को स्थायी रूप से ब्लैकलिस्टेड कर दिया। पीठ ने इस आदेश को प्रथम दृष्टया अवैध बताया।

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पांच कंपनियां की गई थी ब्लैकलिस्टेड
नगर निगम के टेंडर घोटाले में 23 अगस्त को पांच ठेकेदारों पर एफआईआर दर्ज कराने के साथ ही पांच कंपनियां ब्लैकलिस्टेड की गई थीं। दो ठेकेदार संदीप जैन व रज्जन बाजपेई को गिरफ्तार किया गया जबकि सरगना गोविंद शर्मा हाईकोर्ट से गिरफ्तारी पर स्टे लेकर बाहर है। ठेकेदार फर्म दिलीप बाजपेई एंटरप्राइजेज, अजय एंटरप्राइजेज, पारसनाथ बिल्डर, तिरुपति और मेसर्स कैला देवी कंस्ट्रक्शन पर ब्लैकलिस्टेड करने की कार्रवाई हुई थी। मेसर्स कैला देवी कंस्ट्रक्शन ठेकेदार सिंडिकेट गोविंद शर्मा की कंपनी है।

सभी फर्मों को 19 नवंबर तक राहत
इस मामले में याचिका भले ही गोविंद शर्मा ने अपनी फर्म मेसर्स कैला देवी कंस्ट्रक्शन को ब्लैकलिस्ट होने से बचाने के लिए दायर की लेकिन इसका फायदा अन्य चार कंपनियों को भी मिला है। अब हाईकोर्ट के आदेश के बाद यह सभी पांच कंपनियां अगली सुनवाई 19 नवंबर तक ब्लैकलिस्ट की श्रेणी से हट गई हैं। एक तरह से इस अवधि में ये कंपनियां टेंडर भी डाल सकती हैं।

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