कानपुर के बिल्हौर में कालिंदी एक्सप्रेस को डिरेल करने की साजिश रचने वालों की तलाश के बीच बुधवार को लखनऊ से फोरेंसिक विशेषज्ञों की एक टीम घटनास्थल पहुंची। करीब दो घंटे तक चली जांच करते समय टीम ने घटना में इस्तेमाल हुए इंडेन के उसी एलपीजी सिलिंडर को ट्रैक पर रखकर पूरे घटनाक्रम का सीन रीक्रिएट किया।
Kalindi Express: सीन रीक्रिएट कर जानी हकीकत, फोरेंसिक ने जांच के लिए भेजे 10 सैंपल, इन स्थानों को किया चिह्नित
सिलिंडर फटा नहीं और झाड़ियों में जा गिरा
इस दौरान पता चला है कि इंजन से टकराने के बाद करीब पचास मीटर की दूरी के बीच सिलिंडर 71 बार ट्रैक के स्लीपरों से टकराया लेकिन फटा नहीं और फिर झाड़ियों में जा गिरा। टीम ने हर उस निशान को चिह्नित किया, जहां सिलिंडर टकराया था।
जांच एजेंसियों के विशेषज्ञ भी मौजूद रहे
इसके अलावा टीम ने साथ ही पेट्रोल व बारूद के मिलने वाले स्थान व साजिशकर्ताओं के रेलवे ट्रैक के किनारे के संभावित ठिकाने को लेकर भी आंकलन किया। घटना से जुड़े नक्शा नगरी तैयारी कर टीम वापस लौट गई। इस दौरान कई अन्य जांच एजेंसियों के विशेषज्ञ भी मौके पर सादी वर्दी में मौजूद रहे।
घिसटते हुए नहीं, टकराते हुए गया सिलिंडर
जांच के बाद अधिकारियों का कहना है कि सिलिंडर ट्रेन से टकराने के बाद घिसटते हुए नहीं बल्कि उछलकर टकराते हुए दूर जा गिरा। टक्कर के बाद सिलिंडर 50 मीटर दूर 77वें स्लीपर के पास दाएं ओर पड़ा मिला। इस दौरान सिलेंडर चौथे, सातवें, 12वें, 13वें, 14वें, 27वें, 39वें, 48वें और 50वें स्लीपर से टकराया।
77 स्लीपर में से अधिकांश में टकराने के निशान होते
इन सभी स्लीपर में टकराने के निशान दिखाई पड़े। यह सभी निशान स्लीपर के बाएं तरफ थे लेकिन इसके बाद सिलिंडर 59वें, 60वें और 70वें स्लीपर के दाएं तरफ टकराने के बाद सात स्लीपर आगे दाहिनी ओर ट्रैक से बाहर जा गिरा। टीम का मानना है कि सिलेंडर ट्रेन के साथ घिसटता नहीं गया, नहीं तो 77 स्लीपर में से अधिकांश में टकराने के निशान होते।