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ज्योति हत्याकांड: दो बार नाकाम हुई थी पत्नी को मौत के घाट उतारने की साजिश, तीसरी बार में मकसद को दिया था अंजाम

Fri, 21 Oct 2022 10:48 AM IST
शिखा पांडेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर Published by: शिखा पांडेय Updated Fri, 21 Oct 2022 10:48 AM IST
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Jyoti murder case: kanpur crime
ज्योति हत्याकांड - फोटो : amar ujala

पीयूष ने कई महीने पहले पत्नी ज्योति की हत्या की साजिश रची थी। दो बार साजिश नाकाम रही। कुछ न कुछ स्थित ऐसी बनी कि वह साजिश के तहत वारदात को अंजाम नहीं दे सका। आखिर में 27 जुलाई 2014 को उसने साजिश के तहत वारदात को अंजाम दिलाया था। आठ साल तक कोर्ट में ज्योति के परिजनों ने लड़ाई लड़ी। तब न्याय मिला।



पुलिस की विवेचना में सामने आया था कि ज्योति की हत्या का षड्यंत्र काफी दिन पहले ही रच लिया गया था। सबसे पहले 13 जुलाई को इटावा के पास एक क्लब में रेन पार्टी के नाम पर ज्योति को ले जाया गया लेकिन वह पार्टी भी निर्धारित समय से एक घंटे पहले खत्म हो गई जिसके चलते पीयूष की साजिश सफल नहीं हो सकी थी।

इसके बाद 20 जुलाई को हत्या की योजना बनाई गई थी। पीयूष ज्योति को गंगा बैराज ले गया था लेकिन भारी बारिश के चलते हत्यारे समय पर नहीं पहुंचे और प्लान फेल हो गया। तीसरी बार 27 जुलाई को हत्या की योजना बनाई और इस बार पीयूष अपने मकसद में कामयाब हो गया।

Jyoti murder case: kanpur crime
ज्योति हत्याकांड - फोटो : अमर उजाला

कोर्ट में दाखिल हुई 2700 पेज की केस डायरी
इस जघन्य हत्याकांड की विवेचना के लिए एक मुख्य विवेचक (राजीव द्विवेदी) के साथ ही छह सह विवेचकों की बड़ी टीम लगाई गई थी। कोई सीसीटीवी फुटेज खंगाल रहा था तो कोई कॉल डिटेल रिपोर्ट के आधार पर मोबाइल नंबरों की जांच कर रहा था।

Jyoti murder case: kanpur crime
ज्योति हत्याकांड - फोटो : अमर उजाला

कोई आरोपियों और गवाहों के बयान दर्ज करने में व्यस्त था तो कोई रेस्टोरेंट, घटनास्थल, पीयूष की फैक्ट्री व घर से सबूत जुटाने में लगा था। विवेचना पूरी होने के बाद लगभग 2700 पेज की केस डायरी कोर्ट में दाखिल की गई थी। एडीजीसी धर्मेंद्र पाल सिंह ने बताया कि केस डायरी में 109 गवाह बनाए गए थे। कोर्ट में अभियोजन की ओर से 37, बचाव पक्ष की ओर से पांच व कोर्ट साक्षी के रूप में तीन गवाह पेश किए गए थे।

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Jyoti murder case: kanpur crime
ज्योति हत्याकांड () - फोटो : फा

विवेचना में लापरवाही की कोर्ट में खुली थी कलई
ऐसे संगीन मामले में पुलिस विवेचना में लापरवाही की कलई कोर्ट में खुल गई थी। हत्याकांड में अभियुक्तों द्वारा मोबाइल का प्रयोग एक महत्वपूर्ण साक्ष्य है। विवेचना के दौरान पुलिस ने अवधेश के काले रंग के मोबाइल को सील किया था लेकिन कोर्ट के सामने जब सील खोली गई तो मोबाइल सफेद निकला। इसके अलावा अवधेश और सोनू के पास से बरामद मोबाइल व सिम भी उनके नहीं निकले।

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Jyoti murder case: kanpur crime
ज्योति हत्याकांड - फोटो : अमर उजाला

मोबाइल व सिम कार्ड की खरीद के फॉर्म में अवधेश और सोनू के न तो हस्ताक्षर थे न ही उनकी फोटो लगी थी। पुलिस का दावा था कि बरामद मोबाइलों से अवधेश और सोनू पीयूष व मनीषा से बात करते थे लेकिन कोर्ट में मोबाइल बदल जाने तथा सिमकार्ड व मोबाइल अवधेश व सोनू के न होने की बात सामने आने से विवेचना की लापरवाही उजागर हुई थी।

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