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देश में पहली बार कानपुर से शुरू अरोमा टेक्नलॉजी, प्रोसेसिंग और मैनेजमेंट का कोर्स
प्रदीप अवस्थी, अमर उजाला, कानपुर
Updated Fri, 31 Aug 2018 02:14 PM IST
सार
- एफएफडीसी करवाएगा एक वर्षीय डिप्लोमा, राष्ट्रीय कौशल विकास एजेंसी से मिली मान्यता
- 14 से आवेदन, 24 से शुरू होगी पढ़ाई, कन्नौज की अरोमा यूनिट में कराएंगे प्रैक्टिकल
- अरोमा इंडस्ट्री को मिलेंगे दक्ष लोग, कोर्स करने के बाद अपना काम भी कर सकेंगे शुरू
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सुगंध एवं सुरस विकास संस्थान अब सुगंध (अरोमा) की तकनीक, प्रोसेसिंग एवं उसके प्रबंधन पर एक वर्षीय डिप्लोमा कोर्स करवाएगा। इस कोर्स की शुरुआत देश में पहली बार यूपी के कानपुर से होने जा रही है। राष्ट्रीय कौशल विकास एजेंसी ने इस कोर्स को डिजाइन किया है। कोर्स की सफलता और अरोमा इंडस्ट्री में छात्र-छात्राओं की नियुक्ति के बाद इसे देश के दूसरे हिस्सों में लागू किया जाएगा।
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देश में अरोमा इंडस्ट्री का तेजी से विकास हो रहा है। सुगंध का क्षेत्र अब सिर्फ अगरबत्ती, इत्र या परफ्यूम तक सीमित नहीं रहा। अरोमा थेरेपी से लेकर हर तरह के उत्पाद में सुगंध का इस्तेमाल किया जाने लगा है। अब यह हजारों करोड़ रुपये की इंडस्ट्री हो गई है। एक तरफ इंडस्ट्री फलफूल रही है तो दूसरी तरफ फूल, पत्तियों, पौधों या जड़ी बूटियों से सुगंध निकालने की पद्धति पुरानी हो रही है। ऐसे में अरोमा इंडस्ट्री ने इस क्षेत्र में दक्षता की कमी महसूस की। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कौशल विकास मिशन तक यह बात पहुंचाई गई। अरोमा इंडस्ट्री में तकनीकी और प्रबंधकीय रूप से दक्ष कर्मियों की कमी को पूरा करने के लिए एक समग्र कोर्स पर विचार किया गया। कई महीने की रिसर्च के बाद एक वर्ष के लिए दो तरह के कोर्स डिजाइन किए गए। पहला ‘पोस्ट डिप्लोमा इन अरोमा प्रोसेस एंड इट्स मैनेजमेंट’ और दूसरा ‘अरोमा प्रोेसेस असिस्टेंट’। इन कोर्स के जरिये छात्र-छात्राओं को सुगंध निकालने की तकनीक, रखरखाव के तरीके और क्वालिटी बेहतर बनाए रखने की तरकीब सिखाई जाएगी। इसके साथ ही किसी अरोमा यूनिट में काम करने के तरीके, उसका प्रबंधन आदि सिखाया जाएगा। कोर्स की थ्योरी कानपुर में पढ़ाई जाएगी जबकि प्रैक्टिकल कन्नौज की अरोमा यूनिटों में कराया जाएगा।
आगे की स्लाइड में पढ़ें- ये कर सकते हैं आवेदन...
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‘पोस्ट डिप्लोमा इन अरोमा प्रोसेस एंड इट्स मैनेजमेंट’ कोर्स के लिए बीएससी, बीटेक या किसी भी विषय में स्नातक तथा संबंधित क्षेत्र में दो वर्ष का अनुभव रखने वाले आवेदन कर सकते हैं।
‘अरोमा प्रोेसेस असिस्टेंट’ कोर्स के लिए इंटरमीडिएट या नेशनल स्किल क्वालीफिकेशन फ्रेमवर्क स्तर-3 की दक्षता रखने वाले अभ्यर्थी आवेदन कर सकते हैं। इन दोनों कोर्स की सालाना फीस एक-एक लाख रुपये है। दोनों कोर्स के लिए सिर्फ 20-20 सीटें निर्धारित की गई हैं। दोनों ही कोर्स में उम्र की बाध्यता नहीं है।
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‘अरोमा प्रोेसेस असिस्टेंट’ कोर्स के लिए इंटरमीडिएट या नेशनल स्किल क्वालीफिकेशन फ्रेमवर्क स्तर-3 की दक्षता रखने वाले अभ्यर्थी आवेदन कर सकते हैं। इन दोनों कोर्स की सालाना फीस एक-एक लाख रुपये है। दोनों कोर्स के लिए सिर्फ 20-20 सीटें निर्धारित की गई हैं। दोनों ही कोर्स में उम्र की बाध्यता नहीं है।
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इस कोर्स की शुरुआत 24 सितंबर से एफएफडीसी प्रसार इकाई फजलगंज में हो रही है। आवेदन प्रक्रिया 14 सितंबर से शुरू होगी। आवेदन फार्म एफएफडीसी प्रसार इकाई से मिलेंगे। मेरिट और साक्षात्कार के आधार पर प्रवेश मिलेगा। इन दोनों कोर्स को राष्ट्रीय कौशल योग्यता स्तर-छह और चार की श्रेणी में रखा गया है।
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एफएफडीसी के उप निदेशक डॉ. भक्ति विजय शुक्ल बताते हैं कि अरोमा इंडस्ट्री को बहुतायत में दक्ष लोगों की जरूरत है। आवेदक कोर्स पूरा करने के बाद अपनी योग्यता के अनुसार 10 से 30 हजार रुपये की नौकरी पा सकते हैं। सुगंध से संबंधित कोई भी काम शुरू कर सकते हैं। लोन लेकर खुद की यूनिट स्थापित कर सकते हैं।