विकास को धन तो बरसा, औद्योगिक विकास मंत्री का शहर सबसे ज्यादा तरसा, जानिए क्या है वजह
स्थापना के 15 साल बाद भी यह संसाधन विहीन है, जबकि टैक्स नगर निगम और यूपीएसआईडीसी मिलकर वसूलते हैं। यूपीएसआईडीसी ने औद्योगिक क्षेत्र रूमा की स्थापना 2003 में की थी। तीन किलोमीटर के दायरे में स्थापित इस औद्योगिक क्षेत्र में वर्तमान में 105 फैक्ट्रियां चालू हालत में हैं। 60 निर्माणाधीन हैं। यहां सड़कों के नाम पर रोड़ी बजरी बिखरी मिलती है। पानी निकासी की कोई व्यवस्था नहीं है। नालियां जाम हैं। बड़े- बड़े गड्ढे व बरसात में भीषण जलभराव है। 80 प्रतिशत स्ट्रीट लाइटें खराब हो चुकी हैं। सीवर लाइन व वाटर लाइन नहीं है। एक लाख लीटर क्षमता की पानी की टंकी पिछले 15 वर्षों से ठूंठ बनी खड़ी है। वाटर ट्रीटमेंट प्लांट बंद पड़ा है।
सरसैया घाट में एक करोड़ से बनेगा पार्क। गुमटी पार्किंग की डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट (डीपीआर) बनवाने के लिए अवस्थापना निधि से 10 लाख रुपये मंजूर किए गए हैं। साथ ही निधि से 20 लाख रुपये कैनाल पटरी पार्किंग में लिफ्ट लगाने के लिए भी मंजूर हुए हैं। शहर के चार पार्कों के विकास के लिए 1.65 करोड़ रुपये मंजूर किए हैं। गंगा बैराज रोड और कुलगांव में मुकदमों के वाहनों के सेंटर में सीसीटीवी कैमरे लगवाने के लिए 25 लाख रुपये का बजट स्वीकृत हुआ है। सर्किट हाउस के गेट व सड़क का निर्माण भी 45 लाख रुपये से कराया जाएगा।
सुभाष चंद शर्मा, मंडलायुक्त
यूपीएसआईडीसी व नगर निगम मिलकर लाखों की टैक्स वसूली कर रहे हैं। बावजूद इसके सुविधाओं के नाम पर उद्यमियों को सिर्फ धोखा मिला है। औद्योगिक विकास मंत्री सतीश महाना खुद यहां से विधायक हैं। इसके बावजूद क्षेत्र की बदहाली दूर करने को कोई ठोस कदम नहीं उठाए जा रहे।
बद्री प्रसाद गुप्ता, अध्यक्ष, रूमा इंडस्ट्रियल एसोसिएशन