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IIT Student Suicide: खुदकुशी से पहले परिवार से वीडियो कॉल पर की बात, उदास चेहरे की बताई थी ये वजह; बड़ा खुलासा
Sun, 13 Oct 2024 12:03 PM IST
शाहरुख खान
अमर उजाला नेटवर्क, कानपुर
अमर उजाला नेटवर्क, कानपुर
Published by: शाहरुख खान
Updated Sun, 13 Oct 2024 12:03 PM IST
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IIT Student Suicide
- फोटो : अमर उजाला
उत्तर प्रदेश के कानपुर स्थित आईआईटी के हॉस्टल में पीएचडी (भू-गर्भ विज्ञान) तृतीय वर्ष की छात्रा प्रगति (27) ने फंदा लगाकर खुदकुशी कर ली। छात्रा की मौत के बाद परिवार ने गंभीर आरोप लगाए हैं। छात्रा की मौत से बदहवास हुई मां संगीता ने गंभीर आरोप लगाए हैं। संगीता का कहना है कि आईआईटी प्रशासन ने ही बेटी की जान ली है।
IIT Student Suicide Case
- फोटो : अमर उजाला
प्रगति की मां संगीता के मुताबिक, बुधवार की देर शाम भी उनकी बेटी से वीडियो कॉल पर बात हुई थी। उसका चेहरा काफी उतरा हुआ था, लग रहा थी कि वह परेशान है। उससे काफी पूछा, लेकिन उसने कुछ भी नहीं बताया। बोली कि जुखाम की वजह से चेहरा उतरा है। इसके बाद उन्हें रातभर ठीक से नींद नहीं आई।
गुरुवार सुबह उठते ही प्रगति को कई बार फोन किए, लेकिन उठा नहीं तो लगा कि शायद बेटी लैब या क्लास में व्यस्त हो। फिर दोपहर दो बजे फोन आया कि आप लोग अर्जेंट आ जाओ। प्रगति ने फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली है। आरोप है कि जब परिवार के लोग वहां पहुंचे तो कमरे का दरवाजा खुल चुका था। संगीता का कहना है कि बेटी की मौत की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
गुरुवार सुबह उठते ही प्रगति को कई बार फोन किए, लेकिन उठा नहीं तो लगा कि शायद बेटी लैब या क्लास में व्यस्त हो। फिर दोपहर दो बजे फोन आया कि आप लोग अर्जेंट आ जाओ। प्रगति ने फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली है। आरोप है कि जब परिवार के लोग वहां पहुंचे तो कमरे का दरवाजा खुल चुका था। संगीता का कहना है कि बेटी की मौत की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
प्रगति की फाइल फोटो
- फोटो : सोशल मीडिया
मोहल्ले की सड़क के लिए भी की थी भागदौड़
मोहल्ले की महिलाओं ने बताया कि प्रगति मेधावी होने के साथ-साथ काफी सामाजिक भी थी। मोहल्ले की खराब सड़क बनवाने के लिए भी प्रगति ने अधिकारियों के दफ्तरों के कई चक्कर लगवाए थे, लेकिन आखिर में सड़क बनवा कर ही दम लिया था। बताया कि परिवार मूलरूप से उरई का रहने वाला है, वह कई वर्षों से सनिगवां के सजारी फार्म मोहल्ले में अपना मकान बनाकर रह रहा है।
मोहल्ले की महिलाओं ने बताया कि प्रगति मेधावी होने के साथ-साथ काफी सामाजिक भी थी। मोहल्ले की खराब सड़क बनवाने के लिए भी प्रगति ने अधिकारियों के दफ्तरों के कई चक्कर लगवाए थे, लेकिन आखिर में सड़क बनवा कर ही दम लिया था। बताया कि परिवार मूलरूप से उरई का रहने वाला है, वह कई वर्षों से सनिगवां के सजारी फार्म मोहल्ले में अपना मकान बनाकर रह रहा है।
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IIT Student Suicide Case
- फोटो : अमर उजाला
मेधावी प्रगति को पढ़ाई का टेंशन होना साथियों की समझ से परे
प्रगति मेधावी थी, पीएचडी कोर्स वर्क में उसे 8.13 सीपीआई मिला था। हर सेमेस्टर के ग्रेड भी अव्वल रहे हैं। हालांकि आत्महत्या के पीछे के कारणों की जांच के लिए कमेटी का गठन है। आंतरिक जांच कर रिपोर्ट प्रस्तुत करेगी। प्रगति ने 2021 में पीएचडी कोर्स में दाखिला लिया था। गाइड ऑलट होने से पहले छात्रों को पीएचडी कोर्स करना होता है। इसमें प्रगति को 8.13 सीपीआई यानी की लगभग 81 फीसदी अंक मिले। प्रगति के एकेडमिक को लेकर भी कभी गड़बड़ी नहीं रही। सीनियर प्रोफेसरों का कहना है कि प्रगति का एकेडमिक रिकार्ड अच्छा रहा है। प्रगति के साथी भी मानते हैं कि पढ़ाई के तनाव की बात गले से नहीं उतर रही है। मामले की जांच होनी चाहिए।
प्रगति मेधावी थी, पीएचडी कोर्स वर्क में उसे 8.13 सीपीआई मिला था। हर सेमेस्टर के ग्रेड भी अव्वल रहे हैं। हालांकि आत्महत्या के पीछे के कारणों की जांच के लिए कमेटी का गठन है। आंतरिक जांच कर रिपोर्ट प्रस्तुत करेगी। प्रगति ने 2021 में पीएचडी कोर्स में दाखिला लिया था। गाइड ऑलट होने से पहले छात्रों को पीएचडी कोर्स करना होता है। इसमें प्रगति को 8.13 सीपीआई यानी की लगभग 81 फीसदी अंक मिले। प्रगति के एकेडमिक को लेकर भी कभी गड़बड़ी नहीं रही। सीनियर प्रोफेसरों का कहना है कि प्रगति का एकेडमिक रिकार्ड अच्छा रहा है। प्रगति के साथी भी मानते हैं कि पढ़ाई के तनाव की बात गले से नहीं उतर रही है। मामले की जांच होनी चाहिए।
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IIT Student Suicide
- फोटो : अमर उजाला
तीन आत्महत्याओं के बाद हुआ था ग्रेडिंग में बदलाव
एक माह में हुई तीन आत्महत्याओं के बाद आईआईटी में छात्रों की ग्रेडिंग सिस्टम में 2023-24 सत्र से बड़ा बदलाव किया गया है। छात्रों को मानसिक तनाव न हो इसके लिए ए, बी, सी के आधार पर होने वाली ग्रेडिंग को अब ए एप्लस, बी बीप्लस कर दिया गया। इतना ही नहीं पीएचडी अगर कोई बीच में छोड़ना चाहता है तो उस छात्र को भी एमएस की डिग्री दी जाने लगी है। पहले थीसिस का मूल्यांकन बाहर के प्रोफेसरों से कराया जाता था, अब इसे भी इंटर्नल कर दिया गया है। अंग्रेजी की दिक्कत को देखते हुए छात्रों के लिए इसकी भी कक्षाएं संचालित की जाने लगी हैं।
एक माह में हुई तीन आत्महत्याओं के बाद आईआईटी में छात्रों की ग्रेडिंग सिस्टम में 2023-24 सत्र से बड़ा बदलाव किया गया है। छात्रों को मानसिक तनाव न हो इसके लिए ए, बी, सी के आधार पर होने वाली ग्रेडिंग को अब ए एप्लस, बी बीप्लस कर दिया गया। इतना ही नहीं पीएचडी अगर कोई बीच में छोड़ना चाहता है तो उस छात्र को भी एमएस की डिग्री दी जाने लगी है। पहले थीसिस का मूल्यांकन बाहर के प्रोफेसरों से कराया जाता था, अब इसे भी इंटर्नल कर दिया गया है। अंग्रेजी की दिक्कत को देखते हुए छात्रों के लिए इसकी भी कक्षाएं संचालित की जाने लगी हैं।