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आईआईटीयन को मिली अमेरिका की स्कॉलरशिप
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, कानपुर
Updated Mon, 26 Sep 2016 09:41 PM IST
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डॉ. मानु प्रकाश
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अच्छा रिसर्च वर्क करने वाले आईआईटी कानपुर के पूर्व छात्र डॉ. मानू प्रकाश को दुनिया की प्रतिष्ठित ‘मैकआर्थर’ जीनियस फेलोशिप मिली है। इसके तहत डॉ. मानू को करीब चार करोड़ 18 लाख 75 हजार (6 लाख 25 हजार डॉलर) रुपये मिलेंगे। इस धनराशि से अगले पांच साल में रिसर्च करना है। यह फेलोशिप अमेरिका की स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी की तरफ से दी गई है। डॉ. मानू इसी यूनिवर्सिटी के डिपार्टमेंट ऑफ बायो इंजीनियरिंग में पढ़ाते हैं। 22 और विज्ञानियों को फेलोशिप मिली है।
36 वर्षीय डॉ. मानू प्रकाश ने आईआईटी कानपुर से वर्ष 2002 में कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग (बीटेक) की पढ़ाई पूरी की और मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (एमआईटी) अमेरिका से पीएचडी करने चले गए। पीएचडी के बाद डॉ. मानू को हार्वड सोसायटी ऑफ फेलो की तरफ से जूनियर फेलोशिप (2008-2011) मिली।
उन्होंने पॉकेट साइज पेपर माइक्रो स्कोप बनाया है। इसके जरिये मलेरिया की जांच आसानी से की जा सकती है। खून की एक बूंद से जांच हो जाएगी। पैथालॉजी जांच की कीमत भी 50 फीसदी कम हो जाएगी। इसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता मिल चुकी है। रिसर्च पेपर प्रकाशित हुए हैं। इस उपलब्धि पर आईआईटी कानपुर प्रशासन ने खुशी जताई है।
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36 वर्षीय डॉ. मानू प्रकाश ने आईआईटी कानपुर से वर्ष 2002 में कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग (बीटेक) की पढ़ाई पूरी की और मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (एमआईटी) अमेरिका से पीएचडी करने चले गए। पीएचडी के बाद डॉ. मानू को हार्वड सोसायटी ऑफ फेलो की तरफ से जूनियर फेलोशिप (2008-2011) मिली।
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उन्होंने पॉकेट साइज पेपर माइक्रो स्कोप बनाया है। इसके जरिये मलेरिया की जांच आसानी से की जा सकती है। खून की एक बूंद से जांच हो जाएगी। पैथालॉजी जांच की कीमत भी 50 फीसदी कम हो जाएगी। इसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता मिल चुकी है। रिसर्च पेपर प्रकाशित हुए हैं। इस उपलब्धि पर आईआईटी कानपुर प्रशासन ने खुशी जताई है।
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मयंक बने स्नैपडील के सप्लाई चेन हेड
मयंक
आईआईटी कानपुर के पूर्व छात्र मयंक जैन को ऑनलाइन क्षेत्र की बड़ी कंपनी स्नैपडील ने सप्लाई चेन का हेड बनाया है। मयंक ने आईआईटी से इलेक्ट्रीकल इंजीनियरिंग में बीटेक-एमटेक डुवल डिग्री प्रोग्राम की पढ़ाई पूरी की और जॉब करने लगे। अब कॅरियर की सर्वश्रेष्ठ ऊंचाई पर हैं। इसी वजह से आईआईटी कानपुर ने मयंक को बधाई पत्र भेजा है।