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‘सोने की चाभी’ से डबल लॉक है करोड़ों का सोना, अफीम और चरस
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर
Updated Fri, 23 Jun 2017 08:47 AM IST
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देश के ऐतिहासिक और औद्योगिक शहरों में शुमार कानपुर की एक खासियत बड़ी ही अजीब है। इसके बारे में शायद कम ही लोग जानते होंगे। कानपुर महानगर की एक ‘गोल्डन की’ है जिसकी सुरक्षा दो मजबूत तालों से पिछलों कई सालों से की जा रही है।
कानपुर
शायद आपको पता न हो, अपने कानपुर की एक चाभी भी है। इसे कोषागार में दो तालों में बंद करके रखा गया है। शहर में भले ही कोई गेट न हो लेकिन 225 ग्राम सोने की चाभी जरूर है। यह चाभी तत्कालीन मेयर सरला सिंह ने बनवाई थी।
कानपुर
मेयर जिले का प्रथम नागरिक होता है। प्रोटोकॉल के तहत उनके पास प्रतीकात्मक रूप से जिले की चाभी रहती है। इसीलिए तत्कालीन मेयर सरला सिंह ने प्रतीकात्मक सोने की चाभी बनवाई थी। इस चाभी के साथ कोषागार के डबल लॉक में सोना, अफीम और चरस भी रखी है।
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पहले अपराधियों से कोई भी वस्तु बरामद होती थी तो उसे मुकदमे का फैसला न आने तक कोषागार के डबल लॉक में रखा जाता था। हालांकि अब अब इस तरह की वस्तुएं थानों के मालखानों में रखवाई जाती हैं। कोषागार में दो मार्च 1956 में रखवाया गया मेटल, 23 जून 1964 को रखवाया गया एक बॉक्स सोना और 20 नवंबर 1993 को रखवाया गया विदेशी सोना भी रखा है।
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इसके अलावा 1968 में रखवाई गई अफीम भी है। मुख्य कोषाधिकारी शिव सिंह ने बताया कि कोषागार में मुकदमों से संबंधित 122 बहुमूल्य वस्तुएं हैं। यह भी जानकारी नहीं है कि इन मुकदमों का निस्तारण हो चुका है या नहीं। इसलिए शासन को पत्र लिखकर मादक पदार्थों के निस्तारण के बारे में लिखा जाएगा।