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Mulayam Singh Yadav Died: राष्ट्रीय फलक पर चमका सैफई, मुलायम ने जिले को दी नई पहचान
Mon, 10 Oct 2022 01:44 PM IST
शिखा पांडेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इटावा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इटावा
Published by: शिखा पांडेय
Updated Mon, 10 Oct 2022 01:44 PM IST
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मुलायम सिंह, सैफई गांव (फाइल फोटो)
- फोटो : सोशल मीडिया
सपा संस्थापक मुलायम सिंह ने 19 साल पहले वर्ष 2003 में 29 अगस्त को तीसरी बार बतौर मुख्यमंत्री प्रदेश की बागडोर संभाली थी। उन्होंने हरित क्रांति और ग्राम्य विकास को लेकर खूब काम किए। उन्हें जब-जब सरकार चलाने का मौका मिला तो अपने काम व चुटीले अंदाज से विरोधियों को भी सराहना के लिए विवश कर दिया।
मुलायम सिंह यादव (फाइल फोटो)
- फोटो : अमर उजाला
1980 से 1988 तक विपक्ष के नेता के रूप में वह संघर्षरत रहे। 1989 में जनता दल की सरकार में वह प्रदेश के पहली बार मुख्यमंत्री बने तो सड़क, शिक्षा, बिजली, पानी, स्वास्थ्य की ओर विशेष रूप से ध्यान दिया। 1991 के मार्च में सरकार गिरने के बाद वह 1993 में सपा-बसपा सरकार में फिर मुख्यमंत्री बने। सैफई में मेडिकल कॉलेज सहित कई बड़े कार्य कराए। 1996 में देश के रक्षा मंत्री बने तो इटावा-मैनपुरी रेलवे मार्ग पर कार्य शुरू कराया।
मुलायम सिंह यादव (फाइल फोटो)
- फोटो : अमर उजाला
29 अगस्त, 2003 में बसपा सरकार गिरने पर वह तीसरी बार मुख्यमंत्री बने। इससे अधूरी विकास योजनाओं का विस्तार फिर से गतिमान हुआ। इटावा का उत्तर प्रदेश आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय सैफई, इटावा सफारी पार्क जैसे बड़े प्रोजेक्ट उन्हीं की देन हैं।
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मुलायम सिंह यादव (फाइल फोटो)
- फोटो : Instagram
दंगल के मैदान से लेकर राजनीति के क्षेत्र में विरोधियों को दी पटखनी
राजनीति के अखाड़े के माहिर खिलाड़ी समाजवादी नेता मुलायम सिंह यादव ने अपने राजनीतिक जीवन में विरोधियों को हमेशा शिकस्त दी। उनके धोबी पाट दांव से राजनीतिक विरोधी हमेशा परेशान रहे। मुलायम सिंह यादव के साथ बचपन बिताने वाले सुभाष यादव बताते हैं कि नेताजी को सांपों से बहुत डर लगता था। सूबे के मैनपुरी जनपद के करहल कस्बे के रहने वाले सुभाष यादव मुलायम सिंह यादव के राजनीतिक गुरु कहे जाने वाले चौधरी नत्थू सिंह के बेटे हैं। उन्हें मुलायम सिंह यादव ने 1998 में एमएलसी भी बनवाया था, फिर बाद में मंत्री भी बनाया। मुलायम सिंह के साथ बचपन में गुजारे अपने संस्मरणों में वे बताते हैं कि जब कभी हम लोग नेता जी के साथ किसी शादी समारोह में जाते थे, तो हम लोग उन्हें रबर के सांप से डरा कर काफी हंसी मजाक किया करते थे। मुलायम सिंह सफेद धोती-कुर्ता व सिर पर लाल टोपी पहनकर उनके साथ बाइक पर बैठ गांव-गांव चुनाव प्रचार के लिए जाते थे। जबकि चौ. नत्थू सिंह अपनी जीप में बैठकर गांव-गांव शिष्य मुलायम के चुनाव के लिए मेहनत करते थे।
राजनीति के अखाड़े के माहिर खिलाड़ी समाजवादी नेता मुलायम सिंह यादव ने अपने राजनीतिक जीवन में विरोधियों को हमेशा शिकस्त दी। उनके धोबी पाट दांव से राजनीतिक विरोधी हमेशा परेशान रहे। मुलायम सिंह यादव के साथ बचपन बिताने वाले सुभाष यादव बताते हैं कि नेताजी को सांपों से बहुत डर लगता था। सूबे के मैनपुरी जनपद के करहल कस्बे के रहने वाले सुभाष यादव मुलायम सिंह यादव के राजनीतिक गुरु कहे जाने वाले चौधरी नत्थू सिंह के बेटे हैं। उन्हें मुलायम सिंह यादव ने 1998 में एमएलसी भी बनवाया था, फिर बाद में मंत्री भी बनाया। मुलायम सिंह के साथ बचपन में गुजारे अपने संस्मरणों में वे बताते हैं कि जब कभी हम लोग नेता जी के साथ किसी शादी समारोह में जाते थे, तो हम लोग उन्हें रबर के सांप से डरा कर काफी हंसी मजाक किया करते थे। मुलायम सिंह सफेद धोती-कुर्ता व सिर पर लाल टोपी पहनकर उनके साथ बाइक पर बैठ गांव-गांव चुनाव प्रचार के लिए जाते थे। जबकि चौ. नत्थू सिंह अपनी जीप में बैठकर गांव-गांव शिष्य मुलायम के चुनाव के लिए मेहनत करते थे।
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मुलायम सिंह यादव व साधना गुप्ता (फाइल फोटो)
- फोटो : twitter@VinodSi41272815
छुआछूत व जातिगत व्यवस्था की खिलाफत की
मुलायम सिंह यादव के बालसखा व वर्तमान में सैफई गांव के प्रधान रामफल वाल्मीकि बताते हैं कि वर्ष 1967 के चुनाव में उनकी उम्र कोई 22 वर्ष थी। उन्होंने भी इस चुनाव में अपने सखा मुलायम को जिताने के लिए काफी मेहनत की थी। उस समय से ही वह छुआछूत, जातीय व्यवस्था की खिलाफत करते नजर आए। मुलायम जब भी गांव आते थे, तो हमारे समाज के लोगों से गले मिलते थे और हम लोगों को अखाड़े में पहलवानी भी सिखाते थे।