किडनी कांड की परतें एक एक कर के खुल रहीं हैं। हर एक परत के साथ में एक हैरान करने वाला तथ्य सामने आ रहे हैं। दरअसल एक डोनर से सवा तीन लाख रुपये में किडनी का सौदा हुआ था, लेकिन किडनी ट्रांसप्लांट होने के बाद उसे 600 रुपये थमा दिए गए थे।
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किडनी सौदागरों के खेल में फंसा पिता, न पैसा मिला न बेटी को बचा पाया
Sun, 09 Jun 2019 02:34 PM IST
प्रभापुंज मिश्रा
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: प्रभापुंज मिश्रा
Updated Sun, 09 Jun 2019 02:34 PM IST
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किडनी कांड में आरोपी डॉक्टर दीपक शुक्ला
- फोटो : अमर उजाला
किडनी कांड के आरोपी डॉ. दीपक शुक्ला को ले जाती पुलिस
- फोटो : अमर उजाला
ये रुपये किराए के तौर पर दिए गए थे। वरदान के मुताबिक उसकी डेढ़ साल की बेटी के दिल में छेद था। उसके इलाज के लिए किडनी बेची थी। पैसे न मिलने के कारण बेटी की भी मौत हो गई थी। लखनऊ के वरदान चंद्र को सरगना टी राजकुमार और गौरव शुक्ला दिल्ली लेकर गए थे।
किडनी कांड में आरोपी डॉक्टर दीपक शुक्ला
- फोटो : अमर उजाला
यहां पर दोनों ने पीएसआरआई अस्पताल की कोआर्डिनेटर सुनीता व मिथुन से मिलकर किडनी का सौदा किया था। एसपी क्राइम के मुताबिक सवा तीन लाख रुपये वरदान को मिलने थे। किडनी ट्रांसप्लांट होने के बाद गौरव ने उसको पूरी रकम भी दी थी, लेकिन दो दिन बाद पूरे पैसे चुरा लिए थे।
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किडनी कांड के आरोपी डॉ. दीपक शुक्ला के पकड़े जाने के बाद पुलिस ने किए चौकाने वाले खुलासे
- फोटो : अमर उजाला
उसे किराया देकर भेज दिया गया था। ये बात वरदान को नहीं पता था। जब किडनी कांड का खुलासा हुआ तो पता चला कि राजकुमार व गौरव ने पैसे चुराए थे। पुलिस ने बताया कि पैसे चोरी होने की बात के आगे वरदान बेबस था। उसने कहा कि किसी तरह से उसे लखनऊ भेज दो।
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किडनी कांड
इस दौरान गौरव ने उसको 600 रुपये किराए के लिए दिए थे। साथ ही कहा था कि अब वह अगर एक-दो डोनर लेकर आया तो पैसे मिल सकते हैं। वरदान ने कानपुर विश्वविद्यालय से बीकॉम की पढ़ाई की है। वह लखनऊ के सदर इलाके में परिवार के साथ रहता है। क्षेत्र में ही उसकी मोबाइल रिपेयरिंग की दुकान थी। वरदान ने बताया कि बेटी के इलाज के पैसे नहीं थे। जून 2018 में सबूर अहमद उनकी दुकान पर आया था। उसने किडनी के बदले में पैसों की बात कही। इसके बाद उसने अपनी किडनी का सौदा किया था।