फतेहपुर जिले में चार लोगों की जान लेने वाले हादसे की वजह बनी स्कॉर्पियो का पिछला दाहिना टायर, जिसमें धीरे-धीरे हवा निकल रही थी। चालक राहुल को करीब 20 मिनट पहले टायर पंक्चर होने का अहसास हुआ, लेकिन उसने सोचा आगे चलकर ठीक करवा लेगा। इसी दौरान स्कॉर्पियो 100 किमी प्रति घंटे से ज्यादा की रफ्तार से दौड़ रही थी।
ओवरब्रिज से पहले राहुल को झपकी आ गई और स्कॉर्पियो अनियंत्रित होकर पलटी खाते हुए तालाब में जा गिरी। थाने में खड़ी स्कॉर्पियो को जब बुधवार रात आठ बजे चेक किया गया तो उसके दाहिने टायर में बिलकुल भी हवा नहीं थी। इससे यह माना जा रहा है कि टायर पूरी तरह से पंक्चर हो गया था। पुलिस का कहना है कि अगर उसी वक्त गाड़ी रोकी जाती, तो हादसा बच सकता था।
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fatehpur road accident
- फोटो : amar ujala
मौत को छूकर लौटे, कांपते रहे शरीर और चेहरे दिखे सहमे
तालाब के सर्द पानी से निकल जब अमित, महेश और राहुल को प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र गोपालगंज लाया गया, तब तक हादसे को करीब दो घंटे बीत चुके थे। इसके बाद भी उनके कांपते जिस्म और डर से जड़े चेहरों पर वक्त जैसे थम गया था। भीगे कपड़ों में लिपटे तीनों एक-दूसरे से लिपटते, फिर सिसक-सिसक कर रो पड़ते। उन्हें तो यह भी पता था कि हादसे में कौन जिंदा और कौन मौत की नींद सो गया। उनको देखने के लिए अस्पताल में काफी देर तक भीड़ लगी रही। लोगों का कहना था कि किस्मत वाले थे, जो बचकर निकल आए।
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हादसे के प्रमुख तीन कारण
- 100 किमी प्रति घंटे के आसपास थी वाहन की रफ्तार।
- टायर पंचर होने के बाद कम हवा होने से अनियंत्रित होना।
- पूरी रात जागने के कारण चालक को झपकी आना।
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ब्रेक लगाने से फिसली स्कॉर्पियो, टायरों की रगड़ बने गवाह
चालक राहुल कुमार के मुताबिक ओवरब्रिज के पास स्कॉर्पियो का पिछला दाहिना पहिया पंचर था। हवा कम होने से गाड़ी अचानक लहराने लगी। स्कॉर्पियो के लहराने पर उसने ब्रेक लगाया, तेज रफ्तार में गाड़ी नियंत्रण से बाहर हो गई। दो से तीन बार पलटने के बाद तालाब में जा गिरी। हादसे के बाद मौके पर जांच करने पहुंची पुलिस को तालाब के पास टायरों की रगड़ के साफ निशान मिले, जो तेज ब्रेक लगाने की पुष्टि करते हैं। दिलचस्प बात यह रही कि स्कॉर्पियो के एयरबैग नहीं खुले, जिससे यह स्पष्ट होता है कि कोई सीधी टक्कर नहीं हुई थी और वाहन खुद-ब-खुद पलट गया।
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तालाब किनारे नहीं कराई गई थी बैरिकेडिंग
बड़ौरी ओवरब्रिज से पहले स्थित जिस तालाब में स्कॉर्पियो गिरी, उसके किनारे कोई बैरिकेडिंग नहीं थी, जिससे वाहन सीधा पानी में जा गिरा। सरकारी रिकॉर्ड में तालाब दर्ज है, लेकिन ग्राम पंचायत की ओर से सुरक्षा या रखरखाव का कोई कार्य नहीं कराया गया। पूरे तालाब में जलकुंभी फैली होने से उसकी गहराई का अंदाजा लगाना मुश्किल था, जो हादसे के वक्त वाहन चालकों के लिए और खतरनाक साबित हुआ। इस हादसे में जान गंवाने वाले साहिल गुप्ता स्नातक का छात्र था। शिवम साहू, रितेश सोनकर उर्फ ननकी और राहुल केसरवानी हलवाई का काम करते थे। सभी अपने परिवार के सहारे और भविष्य की उम्मीदों के साथ बरात में शामिल हुए थे।